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मेडिकल में एनआरआई कोटे पर पंजाब सरकार से क्या बोला सुप्रीम कोर्ट?

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल में एनआरआई कोटे को लेकर पंजाब सरकार को फटकार लगाई है! मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन में अप्रवासी भारतीयों (एनआरआई) के दूर के रिश्तेदारों को भी आरक्षण दिए जाने को धोखाधड़ी बताते हुए पंजाब सरकार की फटकार लगाई है। उच्चतम न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा कि यह फर्जीवाड़ा है और इसे बंद करना होगा। पंजाब में आम आदमी पार्टी (आप) की सरकार है और भगवंत मान मुख्यमंत्री हैं। मान सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा बढ़ाने की याचिका हाईकोर्ट से खारिज होने के बाद सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। अब हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली पंजाब सरकार की याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी रिजेक्ट हो गई। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि एनआरआई के दूर के रिश्तेदारों को एडमिशन में आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा, ‘यह धोखाधड़ी बंद होनी चाहिए।’ यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक सरकार 2025-26 शैक्षणिक वर्ष से सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 15% एनआरआई कोटा शुरू करने पर जोर दे रही है। इस महीने की शुरुआत में, पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने पंजाब सरकार की उस अधिसूचना को रद्द कर दिया था जिसमें राज्य भर के मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा से एडमिशन की शर्तों में संशोधन किया गया था। हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस शील नागू और जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की पीठ ने फैसला सुनाया कि राज्य की 20 अगस्त की अधिसूचना, जिसमें दूर के रिश्तेदारों को शामिल करने के लिए एनआरआई उम्मीदवारों की परिभाषा को व्यापक बनाया गया था, ‘पूरी तरह अनुचित’ थी।

अदालत ने कहा कि एनआरआई कोटा मूल रूप से वास्तविक एनआरआई और उनके बच्चों को लाभ पहुंचाने के लिए था, जिससे उन्हें भारत में शिक्षा प्राप्त करने में मदद मिले। हालांकि, चाचा, चाची, दादा-दादी और चचेरे भाई-बहनों जैसे रिश्तेदारों को एनआरआई श्रेणी में शामिल करने के सरकार के कदम ने नीति के मूल उद्देश्य को कमजोर कर दिया। अदालत ने कहा, ‘परिभाषा को व्यापक बनाने से संभावित दुरुपयोग का द्वार खुल जाता है, जिससे नीति के उद्देश्य से बाहर के व्यक्ति इन सीटों का लाभ उठा सकते हैं, जो संभावित रूप से अधिक योग्य उम्मीदवारों को दरकिनार कर सकते हैं।’ अदालत ने 28 अगस्त को गीता वर्मा और अन्य उम्मीदवारों की याचिका प्राप्त करने के बाद पहले ही नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी थी।

उन्होंने तर्क दिया कि मेडिकल प्रवेश के लिए एक प्रॉस्पेक्टस 9 अगस्त को जारी किया गया था, लेकिन सरकार ने 20 अगस्त के नोटिफिकेशन से एडमिशन क्राइटेरिया बदल दिया जो स्वीकार्य नहीं है। अदालत ने नए प्रावधान की अस्पष्टता की आलोचना की, जो दूर के रिश्तेदारों को केवल यह दावा करके अभिभावक के रूप में अर्हता प्राप्त करने की अनुमति देता है कि उन्होंने एक छात्र की देखभाल की है। इसने रेखांकित किया कि इससे हेरफेर के रास्ते खुल गए, जिससे व्यक्तियों को एनआरआई कोटे के तहत प्रवेश प्राप्त करने के एकमात्र उद्देश्य के लिए अभिभावक होने का दावा करने की अनुमति मिल गई। पीठ ने तर्क दिया कि यह योग्यता आधारित प्रवेश प्रक्रिया को कमजोर करता है, जिससे अधिक शैक्षणिक रूप से योग्य छात्रों को अनुचित रूप से नुकसान होता है।

इस बीच जून महीने में कर्नाटक के चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को पत्र लिखकर 22 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 508 अतिरिक्त एमबीबीएस सीटें तैयार करने की मंजूरी मांगी। ये सीटें एनआरआई छात्रों के लिए हैं। पाटिल ने इस प्रस्ताव के औचित्य के रूप में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का हवाला दिया, जो भारतीय संस्थानों में अंतरराष्ट्रीय छात्रों के प्रवेश को प्रोत्साहित करते हैं।

अभी कर्नाटक केवल निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई एडमिशन की अनुमति देता है, जहां छात्र ₹1 करोड़ से ₹2.5 करोड़ तक की फीस देते हैं। इसके विपरीत राजस्थान, हरियाणा और पंजाब जैसे राज्य सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई सीटों के लिए 75 हजार से 1 लाख अमेरिकी डॉलर (करीब 63 लाख से 1 करोड़ रुपये) के बीच शुल्क लेते हैं। पाटिल का मानना है कि कर्नाटक में कोटा लागू करने से सरकारी की मोटी कमाई होगी जिससे मेडिकल कॉलेजों में सुविधाओं और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा, जो सरकारी फंडिंग के बावजूद वित्तीय चुनौतियों का सामना करते हैं।

पाटिल ने एनआरआई छात्रों के लिए ₹25 लाख एनुअल फी रखने का प्रस्ताव रखा है। उनका अनुमान है कि इससे अकेले पहले वर्ष में ₹127 करोड़ की आय हो सकती है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि केंद्र इस प्रस्ताव को मंजूरी देगा, जिससे राज्य को 2025-26 शैक्षणिक वर्ष तक सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटा लागू करने की अनुमति मिल जाएगी।

जब तैमूर ने दुनिया के डेढ़ करोड़ लोगों को एक साथ मार डाला!

कहानी तैमूर की जिसने एक साथ दुनिया के डेढ़ करोड़ लोगों को मार डाला था! उज्बेकिस्तान के चरवाहा परिवार से आने वाले एक लंगड़े और क्रूर शासक ने जब हिंदुस्तान की ओर रुख किया तो उसका मकसद यहां पर राज करना नहीं था। मंगोल तैमूर ने हिंदुस्तान की अपार दौलत और भव्यता के बारे में काफी कुछ सुन रखा था। सुन्नी मुस्लिम तैमूर ने 1398 में भारत पर भटनेर किले को लूटने के बाद अपनी 92,000 तातार आर्मी के साथ तूफानी तरीके से सिरसा, फतेहाबाद, सुनाम, कैथल और पानीपत जैसे शहरों पर हमला किया। फारसी इतिहासकार शराफ अद्दीन अली यजदी के अनुसार, तैमूर ने इन शहरों को जमकर लूटा, उन्हें जला डाला। जब तैमूर की तातार आर्मी सरसुती (सिरसा) पहुंची तो उसके खौफनाक आक्रमण से वहां के निवासी घर छोड़कर भाग गए। भागते हुए हजारों लोगों को तातार आर्मी ने मार डाला। यही हाल फतेहाबाद में भी किया गया। वहीं, अहरुनी में अहीरों ने तैमूर के सैनिकों का मुकाबला तो किया, मगर हार गए। इनमें से कइयों को मार डाला गया और कइयों को युद्धबंदी बना लिया गया। शहर को जलाकर राख कर दिया गया। जब तैमूर की आर्मी टोहाना पहुंची तो वहां जाटों ने जमकर मोर्चा संभाला, मगर वो इतनी बड़ी जल्लाद आर्मी के सामने ज्यादा देर टिक नहीं पाए। तातार आर्मी ने 2,000 जाटों को मार डाला। उनकी संपत्ति लूट ली। वहीं, उनकी पत्नियों और बच्चों को गुलाम बना लिया गया। आज स्पेशल स्टोरी की पहली किस्त में जानेंगे कैसे हरियाणा ने बाहरी आक्रमणों के खिलाफ लड़ाई लड़ी, जो इतिहास में दर्ज है।

इतिहासकार यजदी के अनुसार, तैमूर हरियाणा में जहां जाता, वो शहर जलाकर नष्ट कर देता। गांवों और खेतों को उजाड़ देता। पुरुषों के सिर काट दिए जाते और महिलाओं-बच्चों को गुलाम बना लिया जाता। इसकी वजह यह थी कि वह खुद को इस्लाम की तलवार कहा करता था। उसका मानना था कि वह अपने पूर्ववर्ती चंगेज खान की तरह पूरी दुनिया में इस्लाम का राज कायम करेगा। तैमूर की सेना ने कैथल में बड़े पैमाने पर नरसंहार और लूटपाट किया। वहां से वह असौंध आया, जो गांव और शहर छोड़कर दिल्ली भाग गए। तातार आर्मी के पानीपत पहुंचने से पहले तुगलकपुर किले और सलवान को अपने कब्जे में कर लिया। यहीं से उसने लोनी किले की ओर कूच किया।

तैमूर ने भारत पर अपने आक्रमण की वजह बताते हुए लिखा है कि हिंदुस्तान पर आक्रमण करने का मेरा मकसद काफिर हिंदुओं के खिलाफ धार्मिक युद्ध करना है, जिससे इस्लाम की सेना को भी हिंदुओं की दौलत और मूल्यवान चीजें मिल जाएं। कश्मीर में कटोर के नामी दुर्ग पर आक्रमण में पुरुषों को कत्ल कर दिया गया। उनके सिरों के मीनार खड़े कर दिए गए। फिर भटनेर के दुर्ग पर घेरा डाला गया।

तैमूर लिखता है कि ‘थोड़े ही समय में दुर्ग के तमाम लोग तलवार के घाट उतार दिए गए। घंटे भर में 10 हजार लोगों के सिर काटे गए। इस्लाम की तलवार ने काफिरों के रक्त में स्नान किया। दूसरा नगर सरसुती था जिस पर आक्रमण हुआ। सभी काफिर हिंदू कत्ल कर दिए गए। उनके स्त्री और बच्चे और संपत्ति हमारी हो गई। तैमूर ने जब जाटों के प्रदेश में प्रवेश किया तो उसने अपनी सेना को आदेश दिया कि ‘जो भी मिल जाए, उसका कत्ल कर दिया जाए। लंगड़ा होने की वजह से उसे तैमूर लंग कहा जाता था।

इतिहासकार जस्टिन मरोजी की किताब ‘टैमरलेन, सोर्ड ऑफ इस्लाम, कॉन्करर ऑफ द वर्ल्ड’ में लिखा है कि तैमूर की सेना तरह-तरह के इलाकों से गुजर रही थी, जिनके मौसम एक जैसे नहीं थे। मगर, उसकी तातार आर्मी को ऐसे मौसम की आदत हो गई थी। समरकंद से दिल्ली के बीच बर्फ से ढकी चट्टानें, गर्मी से झुलसा देने वाले रेगिस्तान और बंजर जमीन का बड़ा इलाका था, जहां सैनिकों के खाने के लिए एक दाना तक नहीं उगाया जा सकता था।

तैमूर की सेना काबुल होते हुए अक्तूबर में सतलुज नदी पर जाकर रुकी, जहां एक कमांडर सारंग खां ने उसका रास्ता रोका। मगर, तैमूर उस पर जीत हासिल कर ली। पंजाब, हरियाणा होते हुए दिल्ली पहुंचने से पहले रास्ते में तैमूर ने करीब एक लाख हिंदू लोगों को बंदी बना लिया। दिल्ली के पास पहुंचकर लोनी में तैमूर ने अपना आर्मी कैंप लगाया और यमुना नदी के पास एक टीले पर खड़े होकर हालात का जायजा लिया। उस वक्त दिल्ली की सल्तनत पर बेहद कमजोर सुल्तान नासिरुद्दीन महमूद का राज था। कहा जाता है कि तैमूर ने पूरी दुनिया में करीब 1.7 करोड़ लोगों का कत्ल करवाया था। उसने तुर्की के खलीफा को पिंजरे में डलवा दिया था, जहां उसकी मौत हो गई थी।

जस्टिन मरोजी के अनुसार, तैमूर और दिल्ली के सैनिकों की पहली झड़प तब हुई जब तैमूर के 700 सैनिकों के अग्रिम दस्ते पर तुगलक के कमांडर मल्लू खां के सैनिकों ने हमला किया। तब तैमूर को यह डर लगा कि अगर मल्लू खां के सैनिक उन पर हमला करते हैं तो उनके साथ चल रहे एक लाख हिंदू बंदी उनके समर्थन में कहीं विद्रोह न कर दें। उसने उसी जगह पर सभी हिंदू बंदियों को मार डालने का आदेश दिया। उसने मौलानाओं से कहा कि वो इन युद्ध बंदियों का खात्मा कर दें। सर डेविड प्राइस की किताब ‘मेमॉएर्स ऑफ द प्रिंसिपल इवेंट्स ऑफ मोहम्डन हिस्ट्री’ में लिखा है कि मानव इतिहास में इस तरह की बर्बरता की कोई दूसरी मिसाल नहीं मिलती है।

तैमूर ने अपनी आत्मकथा’तुजुके तिमूरी’ में लिखा है कि मेरी सबसे बड़ी चिंता थे ताकतवर भारतीय हाथी। समरकंद में उनके बारे में सुन रखा था। ये हाथी बख्तरबंद होते थे, जिनकी पीठ पर हौदों में मशाल फेंकने वाले लोग, तीरंदाज और महावत बैठे रहते थे। यह भी सुना था कि इन हाथियों के दांतों में जहर लगा होता था, जो दुश्मन के पेट में घुसा देते थे। उन्होंने इन हाथियों को मारने के लिए एक नई चाल चली। उसने ऊंटों और घोड़ों पर घास लादकर उनमें आग लगा दी। जब ये घोड़े जंग के मैदान में आते तो हाथी भड़क उठते और अपनी ही सेना पर मौत बनकर टूट पड़ते। इससे तैमूर ने कई जंग आसानी से जीत ली।

यजदी ने अपनी किताब में लिखा है कि दिल्ली में मंगोल तातारों ने ऐसा कत्लेआम मचाया कि हर ओर खून ही खून और कटे हुए सिर नजर आते थे। इन तातार सैनिकों ने पुरानी दिल्ली की एक मस्जिद में शरण ले रखे हिंदुओं को मार डाला। हिंदुओं के काटे हुए सिरों की एक मीनार बना दी। यहां तक कि उनके कटे हुए धड़ को चील और कव्वों के लिए खाने के लिए छोड़ दिए गए। तीन दिनों तक ऐसा कत्लेआम चला कि दिल्ली को इस आक्रमण से उबरने में 100 साल लग गए। एक इतिहासकार गियासुद्दीन अली की किताब ‘डायरी ऑफ तैमूर्स कैंपेन इन इंडिया’ में लिखा है कि तैमूर की तातार आर्मी दिल्ली वालों पर ऐसे टूटी, जैसे भूखे भेड़ियों के झुंड भेड़ों के समूह पर टूटता है। उस वक्त दिल्ली के हर कोने से सड़ी हुई लाशों की बदबू आती थी।

उज्बेकिस्तान में तैमूर की कब्र पर लिखा है कि जब मैं अपनी मौत के बाद खड़ा हो जाऊंगा तो दुनिया कांप उठेगी। इसके साथ ही कब्र पर लिखा था, जो कोई भी मेरी कब्र को खोलेगा, उसे मुझसे भी भयानक दुश्मन मिलेगा। इस वजह से कई शासक आए, लेकिन उन्होंने कब्र को नुकसान नहीं पहुंचाया था। कहते हैं कि 1941 में रूस के शासक जोसेफ स्टालिन ने भी इस कब्र को खुदवाने की कोशिश की थी। कब्र खोदने के एक दिन बाद ही 11 जून 1941 को हिटलर ने सोवियत यूनियन पर हमला कर दिया था। इसके फिर से इस कब्र को दफना दिया गया। इसके कुछ समय बाद ही जर्मनी हार गया था। यह भी कहा जाता है कि ईरानी शासक नादिरशाह ने तैमूर की कब्र पर लगे एक खास पत्थर को ले गया, मगर उसका पतन शुरू हुआ तो उसने डर की वजह से उस पत्थर को फिर से कब्र पर लगा दिया।

आखिर उड़ीसा में क्यों हुई पुलिस अफसर और सेना के अफसर के बीच नोक झोंक?

हाल ही में उड़ीसा में सेना के अफसर और पुलिस अफसर के बीच में नोक झोक देखी गई है ! ओडिशा में एक पुलिस थाने में एक सेना अधिकारी के साथ हुई कथित मारपीट और उनकी मंगेतर के साथ यौन उत्पीड़न के मामले में हंगामा बढ़ता जा रहा है। अब इस मामले में सेना के पूर्व सैनिकों और सेवानिवृत्त पुलिस कर्मियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। यह घटना पूरे देश में चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह सहित सेना के कई पूर्व सैनिकों ने इस घटना को ‘शर्मनाक और भयावह’ बताया है तो दूसरी ओर रिटायर्ड पुलिस अफसरों ने दंपति के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं और दावा किया है कि वे नशे में थे। इन रिटायर्ड पुलिस अफसरों ने हालांकि दोटूक कहा है कि अगर पुलिस वाले दोषी पाए जाएं तो उनके खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर आर्मी अफसर और उनकी फियांसी को कुछ लोगों के साथ कथित मारपीट करते दिखाने वाला हुए वीडियो वायरल हो गया। महिला ने आरोप लगाया है कि भरतपुर थाने में उसके साथ मारपीट की गई और उसका यौन उत्पीड़न किया गया, जबकि उसके मंगेतर को पुलिस ने अवैध रूप से एक कोठरी में बंद कर दिया। यह घटना तब हुई जब दंपति सड़क पर हुए झगड़े की शिकायत दर्ज कराने थाने गए थे। मामले ने तूल पकड़ने के बाद पांच पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया।

सेना के पूर्व प्रमुख जनरल (रिटायर्ड) और पूर्व केंद्रीय मंत्री वीके सिंह ने मामले में शामिल पुलिसकर्मियों को ‘वर्दी वाला गुंडा’ बताते हुए इन्हें बचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की मांग की है। वीके सिंह ने ट्वीट किया, ‘ओडिशा के भरतपुर पुलिस स्टेशन में एक सेना अधिकारी की मंगेतर के साथ जो हुआ वह शर्मनाक और भयावह है। मुख्यमंत्री को पुलिसकर्मियों और वर्दी में अपराधियों को बचाने की कोशिश करने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए।’

इसी तरह, कई अन्य पूर्व सैनिकों ने भी सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि अधिकारी के साथ कथित तौर पर कैसा व्यवहार किया गया, उनका कहना है कि सेना में ‘भारी रोष’ है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से हस्तक्षेप का आग्रह करते हुए मेजर (सेवानिवृत्त) गौरव आर्य ने ट्वीट किया, ‘ओडिशा पुलिस ने एक सेना अधिकारी के साथ दुर्व्यवहार किया और यह अपने आप में एक अपराध है। उन्होंने एक महिला के साथ बुरी तरह दुर्व्यवहार किया, अपमानित किया और प्रताड़ित किया… इसके लिए कोई माफी नहीं है।’ मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हर्ष काकर ने ‘छेड़छाड़ करने वालों, रिश्वत लेने वालों, कुटिल पुलिस और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार करने वालों की रक्षा करने’ के लिए ओडिशा पुलिस की आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, ‘वे सच्चाई का साथ नहीं दे रहे हैं। अगर सेना ने विरोध किया तो देश ठप हो जाएगा। क्या सुरक्षा सुनिश्चित करने वाले संगठनों के साथ ऐसा हो सकता है। घटिया हरकतें।’

इस बीच, सीबीआई के पूर्व निदेशक एम नागेश्वर राव और ओडिशा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी कल्याण संघ ने पूछा है कि क्या शराब पीकर गाड़ी चलाने, इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ मारपीट करने और पुलिस स्टेशन पर अराजकता फैलाने के लिए अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है? हालांकि, उन्होंने यह भी कहा है कि दोषी पुलिस अधिकारियों को कानून के अनुसार दंडित किया जाना चाहिए। वीके सिंह के ट्वीट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए नागेश्वर राव ने कहा कि ‘सेना के अफसर और उसकी मंगेतर के नशे में हुए झगड़े और अभद्र व्यवहार’ के लिए ओडिशा पुलिस की निंदा करना उचित नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दंपति ने मेडिकल जांच और ब्लड टेस्ट के लिए अस्पताल जाने से इनकार कर दिया।

पूर्व सीबीआई प्रमुख ने कहा, ‘भुवनेश्वर में एक सेना अधिकारी और उनकी मंगेतर 10 पैग शराब पीते हैं और देर रात लगभग 2 बजे कार चलाते हैं, लगभग 2.30 बजे इंजीनियरिंग के छात्रों के साथ मारपीट करते हैं, और फिर भरतपुर पुलिस स्टेशन में हंगामा करते हैं, इतना कि स्टाफ को पीसीआर की मदद लेनी पड़ी।’ यह कहते हुए कि पुलिस बल सेना का सम्मान करता है, नागेश्वर राव ने सेना से ‘एक सैनिक के लिए अनुचित आचरण’ और भारतीय सेना के नाम को ‘कलंकित’ करने के लिए अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करने का आग्रह किया। राव ने कहा, ‘आप (वीके सिंह) सेनाध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रहे। ऐसे में आपका सीधे निष्कर्ष पर पहुंचकर सेना अधिकारी और उसकी मंगेतर के नशे में धुत होकर झगड़ा करने और अभद्र व्यवहार करने के लिए ओडिशा पुलिस की निंदा करना उचित नहीं है जबकि ओडिशा के पुलिस अधिकारी दोषी भी नहीं हैं।’ उन्होंने आगे कहा, ‘लेकिन मैं भारतीय सेना को यह कहकर नहीं फटकारूंगा, ‘क्या भारतीय सेना अपने अधिकारियों को इसी तरह का अनुशासन सिखाती है?’ क्योंकि एक व्यक्ति का पथभ्रष्ट होना एक सम्मानित संस्थान का प्रतिनिधित्व नहीं करता है।’

राव के इस पोस्ट पर मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हर्ष काकर कई सवाल पूछ लिए। उन्होंने दावा किया कि आर्मी अफसर और उनकी मंगेतर के अभद्र आचरण को लेकर जो भी दावे किए जा रहे हैं, वो गलत हैं। वहीं, ओडिशा सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी कल्याण संघ ने एक खुले पत्र में भी इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उसने यह भी कहा कि सेना के अधिकारियों को ‘सार्वजनिक स्थलों और सरकारी कार्यालयों में व्यवहार’ की सीख देने के लिए एक कोर्स जोड़ा जाना चाहिए।

हिजबुल्लाह के मुखिया को मारने के लिए इजराइल ने 85 टन बमों का इस्तेमाल किया! भूमिगत बंकरों में छिपना भी अंतिम बचाव नहीं था

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कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने नसरल्लाह और हिजबुल्लाह कैंपों को नष्ट करने के लिए जिहू-31 जेडीएएम और स्पाइस 2000 बमों का इस्तेमाल किया। इजराइल ने दो दिन पहले हिजबुल्लाह नेता नसरल्लाह को मार डाला था. नसरल्लाह 32 साल तक हिजबुल्लाह का प्रमुख था। उनकी वजह से ही इजरायली सेना को 2000 में दक्षिणी लेबनान छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। इतना ही नहीं, इसी नसरल्लाह के नेतृत्व में हिजबुल्लाह ने 2006 में 34 दिनों तक इजराइल के खिलाफ लड़ाई जारी रखी. इजराइल दो हफ्ते से ज्यादा समय से लेबनान पर हमला कर रहा है. पिछले हफ्ते ही, पेजर, वॉकी-टॉकी विस्फोटों की एक श्रृंखला ने वहां कई लोगों की जान ले ली। वहीं, बेंजामिन नेतन्याहू के देश हिजबुल्लाह कैंप को निशाना बनाकर लगातार बमबारी की जा रही है.

इजराइल ने हिजबुल्लाह नेता नसरल्लाह को मारने के लिए लेबनान में “न्यू ऑर्डर” नामक एक ऑपरेशन शुरू किया। इजरायली सेना आईडीएफ के सूत्रों के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों से नसरल्लाह की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। नसरल्लाह हर पल अपना पता बदल रहा था. लेकिन कोई आखिरी बचाव नहीं था. 27 सितंबर को नसरल्लाह ने राजधानी बेरूत के दक्षिण में दहिया में एक बहुमंजिला इमारत के नीचे बने बंकर में शरण ली। आईडीएफ ने बंकर की पहचान कई फीट भूमिगत के रूप में की। इसके बाद उन्होंने उस बहुमंजिला पर एक के बाद एक बमबारी की. कुछ ही मिनटों में ऊंची इमारत पर एक टन के 85 बम गिराए गए।

कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इजरायल ने नसरल्लाह और हिजबुल्लाह कैंपों को नष्ट करने के लिए जिहू-31 जेडीएएम और स्पाइस 2000 बमों का इस्तेमाल किया। अमेरिका ने बनाया पहला बम. अमेरिका फिलिस्तीन में हमास के खिलाफ लड़ने के लिए इजरायल को ये बम सप्लाई करता है। ‘स्पाइस 2000’ बम को इज़राइल रक्षा बलों द्वारा विकसित किया गया था। बम का प्रभाव इतना जबरदस्त था कि कई किलोमीटर के क्षेत्र में अस्थायी भूकंप महसूस किए गए।

लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजराइल का हमला 17 सितंबर को शुरू हुआ. इज़राइल पर पेजर विस्फोट करके हिजबुल्लाह सदस्यों पर हमला करने का आरोप लगाया गया था। लगभग तीन हजार पेजर फट गये। कई लोगों की जान चली गई. लगभग तीन हजार लोग घायल हुए। इसके बाद से दोनों पक्षों के बीच तनातनी जारी रही. एक के बाद एक हमलों से तबाह हुआ लेबनान. निवासियों ने अपने घरों से पलायन करना शुरू कर दिया है। लेबनान पर इजराइल के हमले की नौबत भारत तक आ गई. लेबनान के विभिन्न हिस्सों में हिज़्बुल्लाह द्वारा मारे गए इज़रायली हमले। पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने देश के लोगों के साथ एकजुटता दिखाते हुए अपना चुनाव अभियान रद्द कर दिया। इतना ही नहीं, जम्मू-कश्मीर में जगह-जगह विरोध मार्च निकाले गए हैं. घाटी के निवासियों के एक वर्ग ने शनिवार को विरोध प्रदर्शन किया।

इजराइल लेबनान पर हमला कर रहा है. पिछले सोमवार से जारी गोलाबारी और रॉकेट हमलों में मृतकों की संख्या बेतहाशा बढ़ती जा रही है. शनिवार को राजधानी बेरूत में इजरायली सेना के हमले में सशस्त्र समूह हिजबुल्लाह के प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह की मौत हो गई। वहीं, इजराइल गाजा पर हमला कर रहा है. ऐसे में महबूबा ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि उनकी टीम लेबनान और फिलिस्तीन के लोगों के साथ खड़ी है. पीडीपी प्रमुख ने इजराइली हमले के विरोध में रविवार का कार्यक्रम रद्द करने की भी घोषणा की.

बीजेपी ने महबूबा के फैसले की आलोचना की है. पद्म नेता और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मंत्री कविनंदर गुप्ता ने कहा, ‘महबूबर हिजबुल्ला प्रमुख की मौत से पीड़ित हैं. लेकिन जब बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हमला होता है तो वह चुप क्यों हैं?” पिछले कुछ दिनों से इजरायली सेना लेबनान के सीमावर्ती इलाकों पर हमले कर रही है. लेकिन शुक्रवार की रात उनका निशाना बेरूत था. समय-समय पर हवाई और मिसाइल हमले किये जाते रहे हैं। इजरायली सेना ने शनिवार सुबह दावा किया कि यह हमला हिजबुल्लाह प्रमुख के ‘गुप्त अड्डे’ की पहचान करने के बाद किया गया था। कुछ ही घंटों में इजरायली सेना ने दावा किया कि हमले में नसरल्ला मारा गया है. बाद में सशस्त्र संगठन ने भी इस खबर की सच्चाई स्वीकार कर ली. नसरल्लाह ही नहीं, हिजबुल्लाह के कई शीर्ष स्थानीय नेता भी मारे गए। हिजबुल्लाह का दावा है कि उन्होंने भी इजराइल पर जवाबी हमला किया है. हालांकि, हमले में अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

7 अक्टूबर को गाजा से इजरायली क्षेत्र पर हमास के रॉकेट हमले के बाद हिजबुल्लाह ने आजादी समर्थक फिलिस्तीनी संगठन को बधाई दी। हालाँकि, हिज़्बुल्लाह इसराइल के साथ सीधे युद्ध में शामिल नहीं हुआ था। लेकिन हिजबुल्लाह ने अपनी उपस्थिति का संकेत देने के लिए दक्षिणी लेबनान से इजरायली क्षेत्र में एक “प्रतीकात्मक हमला” शुरू किया। हाल ही में, दोनों पक्ष सीधे संघर्ष में शामिल हो गए हैं। सोमवार से दोनों पक्षों के बीच लड़ाई दूसरे स्तर पर पहुंच गई है.

वसंत की लाल पत्तियों से चमकेगा घर, पूजा के लिए घर को पॉइन्सेटिया से सजाएं

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इस पौधे के लाल ‘ब्रैक्ट्स’ या पत्तियाँ फूलों की तरह दिखती हैं। पर्णसमूह की इस विशेष प्रजाति को पॉइन्सेटिया कहा जाता है। कमरे के टब में थोड़ी सी देखभाल कमरे को लाल रोशनी से भर देगी। फूल नहीं फल भी नहीं है. इस पौधे का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी पत्तियां हैं। इसके चमकीले लाल रंग के सुंदर पान के पत्ते के आकार के पत्ते ही इसकी विश्वव्यापी पहचान का कारण हैं। अगर आप पूजा की आंतरिक साज-सज्जा में बदलाव करना चाहते हैं तो सिर्फ फैंसी शो-पीस से नहीं बल्कि घर को रंग-बिरंगे पत्तों से सजाएं। यह ज्ञात उष्णकटिबंधीय पौधों से बहुत अलग है। इस पौधे के लाल रंग के ‘ब्रैक्ट’ या पत्तों को मध्य अमेरिका के मूल निवासी गलती से फूल समझ लेते हैं। पर्णसमूह की इस विशेष प्रजाति को पॉइन्सेटिया कहा जाता है। कमरे के टब में थोड़ी सी देखभाल कमरे को लाल रोशनी से भर देगी।

पॉइन्सेटिया के फूल छोटे पीले या हरे रंग के होते हैं। लेकिन लाल पत्तों के वजन के नीचे वे छुपे रहते हैं। हालाँकि यह पेड़ अपनी लाल पत्तियों के लिए प्रसिद्ध है, गुलाबी, नारंगी, सफेद और क्रीम पत्तियों वाले पॉइन्सेटिया भी उपलब्ध हैं। जिस कमरे में यह पौधा रखा हो उस कमरे का तापमान 18-23 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना चाहिए। इस पौधे को ज्यादा धूप में न रखें.

मेक्सिको और दक्षिण अमेरिका के इस पेड़ ने अब बंगाली अंदरूनी हिस्सों में अपनी जगह ले ली है। पॉइन्सेटिया के पेड़ अब बगीचों और पार्कों में बहुत लोकप्रिय हैं। अब दुनिया में पॉइन्सेटिया की लगभग 100 किस्में हैं। संकर विधि से भी सफेद रंग की पत्तियां पैदा की जा रही है।

एक झाड़ीदार पेड़, आमतौर पर 2 से 3 मीटर ऊँचा। दोमट मिट्टी इसके लिए आदर्श होती है क्योंकि इस प्रकार की मिट्टी पानी को जल्दी सोख लेती है। टबों में या बगीचे की मिट्टी में पॉइन्सेटिया उगाते समय, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पौधे के आधार पर बहुत अधिक पानी जमा न हो। इस पौधे को सप्ताह में दो बार पानी देना चाहिए।

पौधे को स्वस्थ रखने के लिए गिरी हुई पत्तियों और जड़ों की छंटाई महीने में एक बार करनी चाहिए। इस पौधे को दिन में कुछ समय धूप में रखना चाहिए भले ही इसे तेज धूप में न रखा जाए। इस पौधे को दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम की खिड़की पर रखना सबसे अच्छा होता है। आप इस पेड़ की पौध किसी भी ऑनलाइन नर्सरी से खरीद सकते हैं। हालाँकि, आप जिस प्रकार का पॉइन्सेटिया खरीदते हैं, उसके अनुसार आपको इसका ध्यान रखना होगा। यह अवश्य जान लें कि पौधे को किस प्रकार के उर्वरक और मिट्टी की आवश्यकता होगी।

क्या आप पूजा से पहले घर पर गुलाब का बगीचा लगाना चाहते हैं? यहां तक ​​कि अगर आपके पास बड़े बगीचे की जगह नहीं है, तो भी घर की बालकनी या छत पर रंग-बिरंगे गुलाब तुरंत खिल जाएंगे। बहुत से लोग सोचते हैं कि गुलाब का बगीचा आसान नहीं है। लेकिन अगर आपको सही तरीका पता हो तो पेड़ न सिर्फ लंबे समय तक टिकेगा, बल्कि दिखने में भी खुला रहेगा।

सर्दियों में गुलाब की पैदावार बढ़ जाती है। हालाँकि, सितंबर से अक्टूबर रोपण के लिए आदर्श समय है। गुलाब के पौधे लगाने के लिए 10 से 12 इंच के टब सबसे अच्छे होते हैं। यदि कोई बड़ा पौधा ख़रीद रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि प्रति शाखा 5 से अधिक पत्तियाँ न हों।

रोपण से पहले मिट्टी तैयार की जानी चाहिए। गुलाब के लिए दोमट मिट्टी, गोबर की खाद, रेत, सरसों के बीज की आवश्यकता होती है। जैविक खाद से पौधे अच्छे होंगे। इन सभी को मिलाकर एक टब में एक सप्ताह तक रखना चाहिए। लेकिन टब को धूप में रखना चाहिए। किसी अंधेरी या नमी वाली जगह पर भंडारण न करें।

रोपण के बाद हर 2-3 दिन में पानी देना चाहिए। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पेड़ के नीचे पानी जमा न हो। जब किसी शाखा में फूल आ जाए तो उस शाखा को काट दिया जाए तो वहां फिर से नई शाखाएं उग आती हैं। इसमें फिर से फूल हैं। चाय की पत्तियां गुलाब के पौधों को स्वस्थ रखने में बहुत कारगर होती हैं। चाय बनने के बाद आप गीली पत्तियों को पौधे के आधार पर दे सकते हैं।

कभी-कभी सूखे तनों को काटकर गोबर लगाना अच्छा रहता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पेड़ के आधार पर खरपतवार न उगें। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि पेड़ की पत्तियों पर कीड़े न लगें। यदि आवश्यक हो तो नीम के तेल का छिड़काव करें। इससे कीड़ों का उत्पादन कम होगा.

भारतीय बोर्ड में जय शाह के उत्तराधिकारी पर अभी फैसला नहीं, धूमल आईपीएल समिति में बने रहेंगे, अभिषेक

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भारतीय बोर्ड में अभी तय नहीं जय शाह का उत्तराधिकारी, धूमल आईपीएल कमेटी में बरकरार, अभिषेक
जय शाह दिसंबर से आईसीसी चेयरमैन की कमान संभालेंगे. उनके बाद बोर्ड का सचिव कौन होगा, इस पर फैसला लंबित है. हालांकि बोर्ड की वार्षिक आम बैठक रविवार को समाप्त हो गई, लेकिन शाह ने अभी तक अपने उत्तराधिकारी पर फैसला नहीं किया है। जय शाह दिसंबर से आईसीसी चेयरमैन की कमान संभालेंगे. उनके बाद बोर्ड का सचिव कौन होगा, इस पर फैसला लंबित है. बोर्ड की वार्षिक आम बैठक रविवार को बेंगलुरु में संपन्न हुई, लेकिन शाह ने अभी तक अपने उत्तराधिकारी पर फैसला नहीं किया है। बोर्ड के सदस्यों ने उनसे यह कार्य शीघ्र करने का अनुरोध किया।

शाह नवंबर के आखिरी सप्ताह में बोर्ड के सचिव पद से इस्तीफा देंगे. वह 1 दिसंबर से आईसीसी की कमान संभालेंगे. हालांकि आमसभा में इस पर कोई खास चर्चा नहीं हुई. यह मुद्दा एजेंडे में था ही नहीं. हालांकि, बोर्ड के सदस्यों ने इस मामले पर आपस में चर्चा की.

एक राज्य एजेंसी के एक प्रतिनिधि ने समाचार एजेंसी को बताया, “उनसे (जय शाह) जल्द से जल्द अगला सचिव चुनने का अनुरोध किया गया है।” तब यह हमारे लिए भी स्पष्ट हो जाएगा। आईपीएल नीलामी जैसे बड़े काम सामने हैं. इसलिए हमारे लिए सारा काम एक बार में संभालना संभव नहीं होगा।”

फिलहाल, बेयर्ड के कोषाध्यक्ष आशीष शेलार, संयुक्त सचिव देबजीत सैकिया और गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के सचिव अनिल पटेल बोर्ड के सचिव बनने की दौड़ में हैं। यह अलग बात है कि ऐन वक्त पर कोई छुपा रुस्तम बनकर सामने आ जाए.

इस बात पर चर्चा हुई है कि जय शाह के जाने पर आईसीसी में बोर्ड का प्रतिनिधि कौन होगा। आम सभा के सदस्यों से दो नाम सुझाने का अनुरोध किया जाता है।

इस बीच, अरुण धूमल और अभिषेक डालमिया को आईपीएल गवर्निंग बॉडी के लिए फिर से चुना गया है। धूमल अगले साल तक आईपीएल के चेयरमैन रहेंगे. आंध्र प्रदेश के पूर्व क्रिकेटर वी चामुंडेश्वरनाथ को भारतीय क्रिकेट संघ (आईसीए) के प्रतिनिधि के रूप में चुना गया है।

इस दिन जय शाह को समर्पित 17 मिनट का वीडियो दिखाया गया. भारतीय क्रिकेट में उनके योगदान को दर्शाया गया है। वहां सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने जय शाह की तारीफ की.

भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) आईपीएल में मैचों की संख्या को लेकर अपने पिछले फैसले से पीछे हट सकता है। यह निर्णय लिया गया कि 2025 और 2026 की प्रतियोगिताओं में प्रत्येक में 84 मैच होंगे। उस फैसले को लागू न करने पर विचार किया जा रहा है. कुछ ही दिनों में अंतिम फैसला लिया जा सकता है.

आईपीएल 2023 और 2024 में 74 मैच खेले जा चुके हैं. योजना के मुताबिक, 2025 और 2026 में 84-84 और 2027 में 94-94 मैच होंगे। दो साल पहले जब प्रतियोगिता के प्रसारण अधिकार बेचे गए थे, तो इच्छुक टेलीविजन कंपनियों को मैचों की बढ़ती संख्या के बारे में सूचित किया गया था। लेकिन अब बीसीसीआई उस योजना को लागू नहीं करना चाहता. पिछले दो वर्षों की तरह, 2025 प्रतियोगिता में 74 मैच होने की संभावना है।

बीसीसीआई सूत्रों के मुताबिक मुख्य रूप से क्रिकेटरों को ध्यान में रखते हुए मैचों की संख्या नहीं बढ़ाने का विचार किया गया है. मैचों की संख्या बढ़ेगी तो क्रिकेटरों पर दबाव बढ़ेगा. आराम के मौके कम हो जायेंगे. इससे चोट लगने की संभावना भी बढ़ जाएगी. क्रिकेटरों की अहमियत को देखते हुए बीसीसीआई अधिकारी मैचों की संख्या बढ़ाने की योजना से हटने का फैसला कर सकते हैं.

बीसीसीआई सचिव जय शाह ने कहा, ”आईपीएल 2025 में 84 मैच खेलने का कोई फैसला नहीं हुआ है. मैचों की संख्या बढ़ेगी तो क्रिकेटरों पर भी दबाव बढ़ेगा. शायद अनुबंध 84 मैच कहता है। लेकिन कितने मैच खेले जाएंगे ये तय करने का अधिकार बीसीसीआई के पास है.

आईपीएल 2025 का फाइनल 25 मई को हो सकता है. इसके बाद 11 जून को टेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप का फाइनल होना है. उम्मीद है कि भारत पिछली दो बार की तरह इस बार भी फाइनल के लिए क्वालीफाई कर लेगा. परिणामस्वरूप, आईपीएल जितना अधिक समय तक समाप्त होगा, भारतीय टीम की तैयारी का समय उतना ही कम होगा। विराट कोहली, रोहित शर्मा पिछली दो बार से टेस्ट वर्ल्ड चैंपियनशिप का फाइनल नहीं जीत पाए हैं. बीसीसीआई के अधिकारियों ने भी इस मुद्दे पर विचार किया है. इस बार बोर्ड नेता फाइनल शुरू होने से कम से कम एक हफ्ते पहले टीम को इंग्लैंड भेजना चाहते हैं.

छोटी चाय खाने के बारे में गंभीर हैं? क्या शराब, दूध वाली चाय की जगह ग्रीन टी पीने से कोई फायदा है?

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ग्रीन टी शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करती है। लेकिन ग्रीन टी पीने के भी वही फायदे? घर के बड़ों को चाय पीते देख छोटे-छोटे बच्चे दौड़कर आते हैं। चाय की कशमकश शुरू हो जाती है. लेकिन दूध और चीनी के साथ उबली गर्म चाय बच्चे को नहीं दी जा सकती। कॉफ़ी या शराब वाली चाय पीना सही नहीं है। बहुत से लोग इस चाहत को पूरा करने के लिए ग्रीन टी का सेवन करते हैं। ग्रीन टी के स्वास्थ्य लाभों के बारे में कहने को कोई नई बात नहीं है। वजन घटाने से लेकर पेट की चर्बी कम करने तक-इस चाय के फायदे अनंत हैं। ग्रीन टी शरीर में जमा विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में भी मदद करती है। लेकिन ग्रीन टी पीने के भी वही फायदे?

1) आमतौर पर बच्चों को कैफीनयुक्त पेय न देने की सलाह दी जाती है। कॉफ़ी और चाय में बहुत अधिक मात्रा में कैफीन होता है। हालाँकि, हरी चाय में काली चाय की तुलना में बहुत कम कैफीन होता है। परिणामस्वरूप, इसे बच्चों को कभी-कभार देने से कोई नुकसान नहीं होता है। सर्दी-जुकाम जैसी समस्या होने पर ग्रीन टी में थोड़ा सा नींबू का रस और शहद मिलाकर पी सकते हैं। यह किसी भी बीमारी में शरीर के अंदर होने वाली सूजन को कम करता है।

2) ग्रीन टी दांतों के लिए भी अच्छी होती है. जिन बच्चों को दांतों की समस्या है उन्हें कभी-कभी ग्रीन टी दी जा सकती है। इसमें मौजूद कुछ तत्व मुंह में बैक्टीरिया से लड़ते हैं।

3) ग्रीन टी पाचन में भी सुधार करती है। बेहतर पाचन के लिए इसमें थोड़ा सा अदरक भी मिला सकते हैं. पढ़ाई के दबाव के कारण मैदान पर जाकर दौड़ने का मौका कम मिलता है। तो पाचन संबंधी गड़बड़ी भी देखी जाती है। इनमें से दिन में एक बार ग्रीन टी पीना फायदेमंद हो सकता है।

क्या आप सुबह एक कप उबली हुई चाय के बिना नहीं उठते? शाम की बातचीत या काम के बीच खुद को तरोताजा करने के लिए अक्सर चाय की तलाश की जाती है। लेकिन चाय सिर्फ एक पेय नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल कई कामों में किया जा सकता है।

प्राकृतिक उर्वरक

चाय की पत्तियों का उपयोग उर्वरक के रूप में भी किया जा सकता है। पौधे के आधार पर कुछ चाय की पत्तियां फैलाने से यह उर्वरक में बदल जाएगी। इसमें पोटैशियम, नाइट्रोजन समेत कई तरह के खनिज मौजूद होते हैं। जो पौधों के विकास में सहायक होता है. कई लोग चाय बनाने के बाद पत्तियों को सुखाकर पेड़ के नीचे रख देते हैं।

खाना पकाने में उपयोग करें

चाय की शराब का उपयोग खाना पकाने के शोरबे या शोरबे का रंग गहरा करने के लिए किया जाता है। चाय की शराब का उपयोग मांस पकाने में भी किया जाता है। इसके अलावा पिंडी चने में काला रंग लाने के लिए भी चाय की पत्तियों का उपयोग किया जाता है।

दुर्गंध दूर करता है

थोड़ी सी चाय की पत्तियाँ फ्रिज, जूतों और रसोई से आने वाली अप्रिय गंध को दूर करने में बहुत अच्छा काम करेंगी। चाय की पत्तियों को आप किचन में या फ्रिज में एक कटोरे में रख सकते हैं। लेकिन इसे हर कुछ दिनों में बदलना चाहिए। मानसून के दौरान घर में बदबू बनी रहती है। ऐसे में चाय की पत्तियां भी उपयोगी हो सकती हैं। चाय की पत्तियों को कपड़े में बांधकर एक जगह रखा जा सकता है. गंध दूर करने के लिए आप जूते में ‘टी बैग’ छोड़ सकते हैं।

पारित करना

आप सब्जी काटने वाले बोर्ड को फेंकने से पहले चाय की पत्तियों से रगड़ सकते हैं। इससे न सिर्फ बोर्ड साफ होगा बल्कि सब्जियों की महक भी दूर हो जाएगी.

बिस्किट खाने का मन नहीं करता. लेकिन अगर चाय के साथ बिस्कुट या कुकीज़ नहीं हैं तो यह काम नहीं करता। लेकिन बिस्किट आटे से बनते हैं. इसलिए पोषण विशेषज्ञ बहुत अधिक बिस्कुट न खाने की सलाह देते हैं। चाय के साथ. खासकर जिन लोगों को एसिडिटी की समस्या है उनके लिए यह जोड़ी बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। चाय के साथ बिस्किट खाने से और कौन सी समस्याएं हो सकती हैं?

1) बिस्कुट में भी चीनी होती है. जिससे रक्त शर्करा में अचानक वृद्धि हो सकती है। जो लोग अपने वजन को नियंत्रण में रखने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें भी बिस्किट न खाने की सलाह दी जाती है। बच्चों में बहुत अधिक बिस्कुट खाने की प्रवृत्ति से भी टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा बढ़ जाता है।

2) बिस्कुट में आटा और चीनी होती है. इन दोनों सामग्रियों में काफी मात्रा में कैलोरी होती है। लेकिन कोई पोषण नहीं. इसलिए इन्हें ‘शून्य’ कैलोरी माना जाता है। इसलिए ज्यादा बिस्किट खाने से वजन बढ़ सकता है।

3) लगभग सभी प्रकार के बिस्कुट या कुकीज़ में ट्रांस फैट होता है। जो खून में ‘खराब’ कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाता है। अगर ऐसा लंबे समय तक जारी रहे तो इससे हृदय संबंधी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

एक बैग की कीमत में खरीद सकते हैं 200 iPhone 16s! बताओ बैग की कीमत कितनी है?

बैग आमतौर पर चमड़े या कपड़े से बने होते हैं। लेकिन यह कोई बैग नहीं है! अगर आप पेरिस फैशन वीक के मंच पर जगह पाना चाहते हैं तो आप आम भीड़ के साथ घुल-मिल नहीं सकते। अगर कान्स फिल्म फेस्टिवल फिल्म जगत के बेहतरीन मंचों में से एक है, तो पेरिस फैशन वीक भी फैशन जगत के स्थानों में से एक है। दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से नामी-गिरामी कॉस्मेटिक्स कंपनियां अपनी चुनिंदा वस्तुओं के साथ मंच पर आती हैं। हॉलीवुड, बॉलीवुड सेलिब्रिटीज भी हैं. कपड़े, बैग, जूते, गहने – सूची में क्या नहीं है! पूरी दुनिया के फैंस उन सभी चीजों को देखने के लिए उत्सुक रहते हैं. इस साल 18 कैरेट सोने से बने नैनो बैग ने स्प्रिंग-समर कलेक्शन में अपनी जगह बनाई है। उस बैग की कीमत में आप 200 iPhone 16s आसानी से खरीद सकते हैं।

क्या है बैग की खासियत?

एक रिपोर्ट के मुताबिक, सोने से तैयार किया गया यह बैग रबैन और फ्रांसीसी आभूषण निर्माता अर्थस बर्ट्रेंड का एक संयुक्त उद्यम है। लेकिन यह सिर्फ फैशन की दुनिया में नवीनता जोड़ने के बारे में नहीं है, बैग के साथ एक इतिहास जुड़ा हुआ है। 1968 में फ्रेंच सिंगर फ्रेंकोइस हार्डी को दुनिया की सबसे महंगी ड्रेस पहने देखा गया था। सोने और हीरे से जड़ी पोशाक लक्जरी सामान निर्माता पाको रबैन द्वारा बनाई गई थी। गायक का इस साल जून में निधन हो गया। दोनों कंपनियों ने उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यह नैनो बैग बनाने की योजना बनाई है।

बैग की कीमत कितनी है?

18 कैरेट सोने से बने इस बैग की कीमत 250,000 यूरो है। भारतीय मुद्रा में गणना की जाए तो बैग की कीमत लगभग 2 करोड़ 32 लाख रुपये हो सकती है। बैग को बनाने में करीब 100 घंटे का समय लगा.

कोलकाता के गरियाहाट या हतीबागान के फुटपाथों की तरह, मुंबई का सांताक्रूज़ बाज़ार भी लगभग वैसा ही है। गाई गाई दुकान. एक कपड़ों के लिए, एक बैग के लिए, एक आभूषणों के लिए। जिनके पास रत्नों की आंखें होती हैं, वे उस भीड़ में से रत्न चुन लेते हैं। इसके साथ ही वह एक आदर्श प्रेमिका बन गयीं. पेरिस फैशन वीक के रैंप पर उतरने से पहले सोनम कपूर ने वहां से पसंदीदा आभूषण भी चुने। कला के देश फ्रांस में फैशन फेस्टिवल में मुंबई के फुटपाथों पर बिकने वाले आभूषणों का जलवा रहा। वह भी डायर जैसी लग्जरी और महंगी ब्रांड की क्लोदिंग एक्सेसरी के तौर पर।

पेरिस फैशन वीक के मंच पर इस बार कई बॉलीवुड एक्ट्रेस ने जलवे बिखेरे. सोनम से पहले आलिया भट्ट, ऐश्वर्या राय बच्चन ने अपने आउटफिट और ग्लैमर से प्रशंसकों और फैशन समीक्षकों को प्रभावित किया था। पेरिस स्टेज पर सोनम के ‘ट्राइबल लुक’ ने भी खूब तारीफें बटोरीं. सोनम ने फ्रेंच ब्रांड की ब्लैक ड्रेस के साथ ब्लैक बूट्स, कलरफुल फ्लोरल वर्क वाला ब्लैक स्टोल और ऑक्सीडाइज्ड इयररिंग्स पहनी थी। नाक पर नोलॉक पहना जाता था।

फैशन समीक्षक ‘डाइट सब्या’ ने अपने इंस्टाग्राम पेज पर कहा कि हालांकि झुमके आम्रपाली नामक एक आदिवासी ब्रांड से खरीदे गए थे, सोनम ने नाक की अंगूठी सांताक्रूज के एक फुटपाथ बाजार से खरीदी थी। सोनम ने उनके पोस्ट के नीचे कमेंट भी किया. उन्होंने डाइट सब्यार द्वारा दी गई जानकारी पर कोई आपत्ति नहीं जताई. बल्कि उन्होंने जो लिखा उससे साफ है कि उन्हें पोस्ट पसंद आया.

सोनम की ड्रेस डिजाइनर या स्टाइलिस्ट उनकी मौसी रिया कपूर थीं। वह सोनम के ज्यादातर आउटफिट्स डिजाइन करते हैं। तो ये माना जा सकता है कि सोनम के लिए ज्वेलरी भी उन्होंने ही चुनी है. लेकिन चाहे कोई भी चुने, पेरिस फैशन वीक में सोनम को बाकियों से अलग करने वाली ज्वेलरी फैशन समीक्षकों से सहमत है।

ये बॉलीवुड की पसंदीदा जोड़ियों में से एक हैं. हालांकि, इन दोनों के रिश्ते का अंजाम क्या होगा, इसे लेकर अटकलें खत्म नहीं हो रही हैं। बच्चन परिवार में अशांति की चर्चा सिर्फ बालीपारा में ही सुनाई देती है. पिछले साल के अंत से नेटपारा बच्चन परिवार के अंदरूनी घेरे के बारे में बात कर रहा था। नए साल की शुरुआत में बच्चन दंपत्ति ने दिया बड़ा सरप्राइज. उन्होंने पारिवारिक झूले का जश्न मनाया. इसके अलावा पूर्व मिस यूनिवर्स को बेटी आराध्या बच्चन के वार्षिक स्कूल समारोह में अपने पति और ससुर के साथ देखा गया था। इसके बाद जूनियर बच्चन अपनी बेटी और पत्नी के साथ दुबई की यात्रा पर गए। वापस लौटने पर अभिनेता ने अपने माता-पिता के घर के पास एक फ्लैट खरीदा। लेकिन इस बार सबसे ज्यादा अटकलें भतीजी नव्या नोवेली नंदा को लेकर हैं. मामी ने आलिया भट्ट के साथ ऐश्वर्या की तस्वीरें देखीं। लेकिन अगर आप सिर्फ आलिया की ही तारीफ करते हैं.

पेरिस फैशन वीक में ऐश्वर्या राय बच्चन और आलिया भट्ट ने महफिल लूट ली। बॉलीवुड की दो एक्ट्रेस की तस्वीरें इस वक्त सोशल मीडिया पर वायरल हैं। कभी-कभी उन्हें मार्जरसारी के साथ चलते हुए देखा जाता है। फिर कभी देखा, वे सौंदर्य प्रसाधनों में व्यस्त हैं। ऐश्वर्या और आलिया एक ही ड्रेसिंग रूम में नजर आईं. आलिया ने वो सभी तस्वीरें भी दी हैं. इसी को लेकर काकीमा ने आलिया की तस्वीर पर रिएक्ट किया और कमेंट भी किया. लेकिन नव्या ने मामी ऐश्वर्या पर कोई कमेंट नहीं किया. मां बच्चन घर की बेटी हैं. उस फॉर्मूले के मुताबिक, ऐश्वर्या नव्या की मौसी हैं. वहीं पिता निखिल नंदा की मां कपूर खानदान की बेटी हैं. उसके मुताबिक, रणबीर कपूर और नव्या के पिता चचेरे भाई-बहन हैं। तो आलिया हुई नव्या की कजिन. इस बार नव्या के कमेंट को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. नेटिज़न्स गोरी लड़की से नाराज़ हैं। किसी ने लिखा, ”मामी की थोड़ी तारीफ कर सकूं.” किसी और ने लिखा, ”थोड़ा मामी को देखो.” हालांकि ऐश्वर्या पेरिस फैशन वीक खत्म करके घर लौट चुकी हैं.

आखिर तिरुपति लड्डू प्रसाद विवाद पर क्या बोले राजा भईया?

हाल ही में राजा भईया ने तिरुपति लड्डू प्रसाद विवाद पर एक बयान दिया है! आंध्र प्रदेश में तिरुपति बालाजी मंदिर के प्रसाद को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रसाद में उपयोग होने वाले घी की जांच रिपोर्ट सामने आई है, जिसमें मछली के तेल और जानवरों की चर्बी मिलाने के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है। इस पूरे घटनाक्रम पर जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के राष्ट्रीय अध्यक्ष, कुंडा से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने हिंदू मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त किया जाने की पुरजोर मांग की है। रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर ,श्री तिरुपति बालाजी मंदिर से जुड़ी एक घटना का उल्लेख करते हुए उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, श्री तिरूपति बालाजी के प्रसाद में बीफ चर्बी और मछली का तेल मिलाया जाना असंख्य हिन्दू श्रद्धालुओं की आस्था के साथ जधन्य अपराध है, जो जानबूझकर किया गया है। उन्होंने इस घटना को हिंदू आस्थाओं के साथ खिलवाड़ बताया और इसका एकमात्र स्थाई समाधान मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने को बताया।

अपने पोस्ट में राजा भैया ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदू मंदिरों की शुचिता बनाए रखने के लिए उन्हें तुरंत सरकारी नियंत्रण से बाहर किया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरकार का नियंत्रण मंदिरों की पवित्रता और श्रद्धालुओं की आस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। उनकी इस मांग ने एक बार फिर इस मुद्दे को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है कि क्या हिंदू मंदिरों का सरकारी नियंत्रण धार्मिक स्वतंत्रता और मंदिरों की शुचिता पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने बुधवार को दावा किया कि पिछली सरकार में तिरुपति मंदिर में मिलने वाले प्रसाद में घी की जगह जानवरों की चर्बी और मछली के तेल का इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी साल जून में जगन मोहन रेड्डी की पार्टी आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव हारी और नायूड ने एनडीए की सरकार बनाई। 9 जुलाई को मंदिर बोर्ड ने घी के सैंपल गुजरात स्थित पशुधन लैब (NDDB CALF Ltd. भेजे और 16 जुलाई को लैब रिपोर्ट आई। इसमें एक फर्म के घी में मिलावट पाई गई। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की फूड लैब काल्फ (CALF) ने बताया कि जानवरों की चर्बी और फिश ऑयल से तैयार घी में प्रसादम के लड्डुओं बनाए जा रहे हैं। CALF (पशुधन और फूड में एनालिसिस और लर्निंग सेंटर) गुजरात के आनंद में स्थित NDDB (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड) में विश्लेषणात्मक प्रयोगशाला है।

हालांकि, 22 जुलाई को मंदिर ट्रस्ट ने बैठक की और फिर 23 जुलाई को घी के सैंपल लिए गए और जांच के लिए लैब भेजे गए। इसकी रिपोर्ट 18 सितंबर को सामने आई। सीएम नायडू ने सीधे तत्कालीन जगन सरकार को कठघरे में खड़ा किया। नायडू सरकार ने कहा, पिछली जगन मोहन रेड्डी सरकार ने हिंदुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ किया है। मंदिर की पवित्रता को ठेस पहुंचाई है और लोगों की आस्था से भी बहुत बड़ा खिलवाड़ हुआ। मेरी सरकार आने के बाद इस पर रोक लगाई गई है, जो अभी रिपोर्ट सामने आई है, वो जुलाई की है।

जांच में पता चला है कि इन लड्डुओं में जिस घी का इस्तेमाल हो रहा था, वो मिलावटी था। इसमें फिश ऑयल, एनिमल टैलो और लार्ड की मात्रा पाई गई है. एनिमल टैलो का मतलब पशु में मौजूद फैट से होता है।इसमें लार्ड भी मिला हुआ था. लार्ड का मतलब जानवरों की चर्बी से होता है. इसी घी में फिश ऑयल की मात्रा भी पाई गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, प्रसादम लड्डू में सोयाबीन, सूरजमुखी, जैतून, रेपसीड, अलसी, गेहूं के बीज, मक्का के बीज, कपास के बीज, मछली का तेल, नारियल और पाम कर्नेल वसा, पाम तेल और बीफ टेलो गौमांस की चर्बी, लार्ड शामिल है। बता दें कि राजा भैया से तलाक का केस लड़ रहीं भानवी सिंह और राजा के भाई की तरह खास माने जाने वाले एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपाल के बीच एक्स पर पोस्ट वार छिड़ गया। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से गोपाल भैया सहित राजा के करीबी नेताओं से मुलाकात की तस्वीर जारी होने के बाद राजा भैया की पत्नी ने जमकर निशाना साधा।

भानवी सिंह ने सीएम से मुलाकात नहीं हो पाने की बात रखते हुए साजिश वाली बातों का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने साथ साजिश और सुरक्षा का हवाला देते हुए यह भी कहा कि योगीजी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद कुंवर अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को जवाब देते हुए एक एक्स पर पोस्ट करते हुए मां की पिटाई करने और पर्दे के पीछे से छुपकर राजनीति करने का आरोप लगाया।

आखिर क्या है कुंडा विधायक राजा भैया के परिवार की जंग?

आज हम आपको बताएंगे कि आखिर कुंडा विधायक राजा भैया के परिवार की जंग क्या है! उत्तर प्रदेश की कुंडा सीट से विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया (Raja Bhaiya) का घरेलू विवाद एक बार फिर उभरकर सामने आ गया है। राजा भैया से तलाक का केस लड़ रहीं भानवी सिंह और राजा के भाई की तरह खास माने जाने वाले एमएलसी अक्षय प्रताप सिंह गोपाल के बीच एक्स पर पोस्ट वार छिड़ गया। सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री कार्यालय की तरफ से गोपाल भैया सहित राजा के करीबी नेताओं से मुलाकात की तस्वीर जारी होने के बाद राजा भैया की पत्नी ने जमकर निशाना साधा। भानवी सिंह ने सीएम से मुलाकात नहीं हो पाने की बात रखते हुए साजिश वाली बातों का भी जिक्र किया। उन्होंने अपने साथ साजिश और सुरक्षा का हवाला देते हुए यह भी कहा कि योगीजी से मिलने नहीं दिया जा रहा है। इसके बाद कुंवर अक्षय प्रताप सिंह उर्फ गोपाल जी ने राजा भैया की पत्नी भानवी सिंह को जवाब देते हुए एक एक्स पर पोस्ट करते हुए मां की पिटाई करने और पर्दे के पीछे से छुपकर राजनीति करने का आरोप लगाया। अब भानवी ने फिर से पलटवार करते हुए सारे आरोपों को निराधार करार दिया है। इसके साथ ही भानवी ने गोपाल भैया को परिवार तबाह करने वाला शकुनि करार दिया है। इस मामले की सबसे पहली शुरुआत हुई, जब योगी आदित्यनाथ ऑफिस की तरफ से एक्स पर लिखे पोस्ट में बताया, ‘मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथजी महाराज से आज लखनऊ में जनसत्ता दल के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. के. एन. ओझा, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के माननीय सदस्य अक्षय प्रताप सिंह, जनपद प्रतापगढ़ के बाबागंज विधानसभा क्षेत्र के माननीय विधायक और जनसत्ता दल के प्रदेश अध्यक्ष विनोद सरोज और प्रतापगढ़ जिला पंचायत की अध्यक्ष श्रीमती माधुरी कुलदीप पटेल ने शिष्टाचार भेंट की।’

अब इस तस्वीर को रीपोस्ट करते हुए भानवी कुमारी ने एक्स पर लिखा, ‘लिखा कि माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी आप हमारे आदरणीय हैं। आप राज्य के मुखिया के नाते किसी से भी मिल सकते हैं। लेकिन आप जिस शख़्स से मिल रहे हैं वे हमारे और हमारी बेटी के साथ इकोनॉमिक फ्रॉड के मामले में आरोपी भी हैं। इनके ऊपर आर्थिक अपराध शाखा दिल्ली में केस चल रहा है। लगातार मेरे और मेरी बेटी के ख़िलाफ़ अक्षय प्रताप सिंह षड्यंत्र कर रहे हैं। मैंने आपसे मिलने का कई बार समय माँगा लेकिन मुझे समय नहीं मिल पाया! उन्होंने लिखा कि जब मैं आपसे पहली बार मिली थी उसके बाद से अधिकारियों ने मेरा सहयोग करने के बजाय प्रतिकूल रुख़ अपना लिया। मेरे ख़िलाफ़ षड्यंत्र के तहत हज़रतगंज कोतवाली में एफ़आईआर करवाई गई और एफआईआर में झूठे आरोप लगाकर मेरी बेटी को भी घसीट लिया गया। आईओ की भूमिका के बारे में भी मैंने सार्वजनिक रूप से अधिकारियों को अवगत कराया। लेकिन न्याय नहीं हुआ बल्कि उल्टे एफ़आईआर कर दी गई।

भदरी राजघराने की बहू ने कहा, ‘मुख्यमंत्री जी आप हम सबके पूरे प्रदेश के मुखिया हैं। मैं एक महिला भी हूँ और आपको पता है कि आज भी महिलाओं के लिए संघर्ष कई गुना ज़्यादा है। आपसे मैं संरक्षण और न्याय चाहती हूँ। विनम्र अनुरोध है कि आप मुझे समय देने की कृपा करें। कृपया मेरी सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए क्योंकि मेरे ख़िलाफ़ जिस तरह की साज़िश रची जा रही है उससे मेरी सुरक्षा को भी गंभीर ख़तरा उत्पन्न हो गया है। सादर- भानवी कुमारी सिंह, भदरी।’

भानवी के इस आरोप पर अक्षय गोपाल ने हमला करते हुए लिखा- भानवी कुमारी जी, जिस EOW की आप बात कर रही हैं उसी को लिखे शिकायती पत्र में स्वयं आपकी माता जी आपके चरित्र का बखान कर रही हैं: आपकी मां श्रीमती मंजुल सिंह ने लिखा है (हिन्दी अनुवाद): “भानवी कुमारी सिंह से मैंने रिश्ता तोड़ लिया है, वो मेरी संपत्ति हथियाने के लिए लगातार मुझे प्रताड़ित करती रहती है। जायदाद हथियाने के लिये भानवी ने मेरे साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न करने में कोई भी कोर कसर नहीं छोड़ी है। उसने मेरी बेटी होते हुए भी मेरे साथ ऐसा दुर्व्यवहार किया है, कि मैं आज भी लगातार आतंक और भय के साये में जी रही हूं।”

आप हमेशा महिला अधिकारों की दुहाई देती रहती हैं, चंद रुपयों के लिए अपनी मां को मारने पीटने में आपका हाथ नहीं कांपा? श्रीमती मंजुल सिंह महिला नहीं हैं? माननीय मुख्यमंत्री जी की छवि और कार्यशैली बेद़ाग़ है। एक विरोधी राजनैतिक दल के इशारे पर उनकी छवि धूमिल करने का ये कुत्सित प्रयास बंद करें। राजनीति में आने का चस्का है तो खुलकर मैदान में आयें, पर्दे के पीछे से छल और प्रपंच से कुछ हासिल नहीं होने वाला है।

इस पर पलटवार करते हुए भानवी ने लिखा- अक्षय प्रताप सिंह जी, अच्छा है आदरणीय योगी जी की बेदाग़ छवि के बारे में वह व्यक्ति बात कर रहा है जिसका पूरा राजनीतिक करियर ही दाग़दार रहा है। जिस पत्र को आप मेरी माँ के हवाले से पोस्ट कर रहे हैं उसका स्रोत भी बता दीजिए। यह भी बता दीजिए कि मेरे ख़िलाफ़ और क्या-क्या साज़िश रच रहे हैं। गुमराह मत कीजिए आपका एक अपराध नहीं है। सारा सच जिस दिन सामने आएगा आपकी हर साज़िश अपने आप बेनक़ाब हो जाएगी।

आप लोगों को गुमराह न कर सकें इसलिए इतना बताना ज़रूरी है कि अगर संपत्ति हथियाना होता तो मेरे आदरणीय पिता जी ने मुझे पॉवर ऑफ़ एटॉर्नी दे रखी थी। लेकिन अफ़सोस! मैं भी किस व्यक्ति को बता रही हूँ , जिसने न सिर्फ़ एक परिवार तबाह करने में शकुनि की भूमिका निभाई बल्कि अपने भय और आतंक से जनता को भी नहीं छोड़ा। आप एक महिला के चरित्र की बात कर रहे हैं वह भी समझ सकती हूँ क्योंकि आपने एक नहीं कई महिलाओं का परिवार तबाह किया है। आपको बता दूँ कि मैं इतनी कमजोर नहीं हूँ कि मुझे कोई हथियार बनाए। आप अपनी चिंता कीजिए और राजनीति का लबादा ओढ़कर साज़िश का कारोबार करते रहिए।

मैंने महिला अधिकारों की बात की थी और करती रहूँगी। उन सभी पापियों के ख़िलाफ़ लड़ूँगी जो महिला को केवल भोग्य वस्तु समझते हैं। आप को दर्द होता है तो हो। आप डराकर चिट्ठियाँ लिखवाइये। आईओ को प्रभावित करिए। कुछ नहीं होगा सत्य अटल है। अभी तो कई तस्वीरें सच बयान करेंगी। इंतज़ार करिए। योगी जी मुख्यमंत्री के नाते पूरे प्रदेश के अभिभावक हैं इसलिए मेरा निवेदन उनसे था और उन्हें तथ्य जानना भी ज़रूरी है। आप कम से कम उन्हें सर्टिफिकेट मत दीजिए। इकोनॉमिक फ्रॉड के आरोपी उनका बचाव करें वे यह कभी नहीं चाहेंगे। शेष शुभ- भानवी कुमारी सिंह, भदरी।