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चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और प्रधानमंत्री का क्या है विवाद?

हाल ही में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और प्रधानमंत्री का एक विवाद सामने आया है! बता दे कि 15 जनवरी, 1980 को सुप्रीम कोर्ट के एक जज जस्टिस पीएन भगवती ने इंदिरा गांधी को पत्र लिखा। इस चिट्ठी को लेकर उस वक्त न्यायपालिका से लेकर सियासी गलियारों में जमकर हंगामा मचा था। यहां तक कि उस चिट्ठी के बाद जजों के लिए कोड ऑफ कंडक्ट लागू किए जाने को लेकर बात उठी। जस्टिस भगवती का यह लेटर 1200 शब्दों का था, जिसकी वजह से कहा जाता है कि इंदिरा गांधी सरकार भी विचलित हो गई थी। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के घर जाकर गणेश पूजा करने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। कुछ लोग इसे सही ठहरा रहे हैं तो कुछ इसे गलत। जस्टिस पीएन भगवती ने अपनी चिट्ठी में कुछ इस तरह से लिखा था- क्या मैं चुनावों में आपकी शानदार जीत और भारत के प्रधानमंत्री के रूप में आपकी विजयी वापसी पर हार्दिक बधाई दे सकता हूं? यह एक बेहद उल्लेखनीय उपलब्धि है जिस पर आप, आपके मित्र और शुभचिंतक जायज रूप से गर्व कर सकते हैं। भारत जैसे देश का प्रधानमंत्री बनना बड़े सम्मान की बात है। इस चिट्ठी के आते ही न्यायपालिका और सियासत से जुड़े लोगों ने जमकर हंगामा किया। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, 22 मार्च, 1980 को उस वक्त सुप्रीम कोर्ट के एक वरिष्ठ जज रहे वीडी तुलजापुरकर ने कहा था कि अगर कोई जज किसी राजनीतिक नेता को उसकी राजनीतिक जीत पर गुलदस्ते या बधाई पत्र भेजना शुरू कर दे और उच्च पद ग्रहण करने पर तारीफ के पुल बांधे तो न्यायपालिका में लोगों का विश्वास हिल जाएगा।

जस्टिस प्रफुल्लचंद्र नटवरलाल भगवती की 1,200 शब्दों की एक चिट्ठी से उस वक्त इंदिरा गांधी भी अपनी चुनावी जीत का आनंद नहीं उठा पाई थीं। इस लेटर के सामने आने पर वह बेहद विचलित हो गई थीं। उस वक्त इस पत्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर एडवोकेट नाराज हो गए थे। 2 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई। उस वक्त यह तय हुआ कि इसे जितना अधिक उछाला जाएगा, न्यायपालिका को उतना ही अधिक नुकसान होगा। जस्टिस भगवती के सहयोगी रहे जस्टिस वीडी तुलजापुरकर ने सीधे तौर पर नाम लिए बिना इस बात की जमकर आलोचना की। भारतीय विधि संस्थान के एक समारोह में उन्होंने कहा कि हाल ही में आई एक खबर से उन्हें और उनके सहयोगियों को गंभीर पीड़ा हुई है। यह बहुत परेशान करने वाली बात है, जो न्यायपालिका की छवि को अंदर से नुकसान पहुंचा रही है और इसकी निंदा की जानी चाहिए।

इससे पहले भी इंदिरा गांधी ने अपने कार्यकाल के दौरान 1973 में जस्टिस एएन रे को पदोन्नत कर CJI बना दिया था। उन्होंने जनवरी 1977 में जब एमएच बेग को पदोन्नत किया था। सुप्रीम कोर्ट के एक वकील ने तब कहा था कि राजनीतिकरण का कैंसर नौकरशाही से लेकर न्यायपालिका तक फैल रहा है। अगर हम सावधान नहीं रहे, तो संविधान द्वारा मानी जाने वाली हमारी सरकार प्रणाली मान्यता से परे बदल जाएगी। सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बेटे अभिनव चंद्रचूड़ ने अपनी किताब ‘सुप्रीम व्हिस्पर्स’ में बताया है कि तत्कालीन इंदिरा गांधी सरकार ने जस्टिस रे की नियुक्ति, शीर्ष अदालत के तीन वरिष्ठ जजों जस्टिस जयशंकर मणिलाल शेलत, केएस हेगड़े और एएन ग्रोवर की अनदेखी कर की थी। इस घटना को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमले के रूप में देखा गया था। अगर वरिष्ठता की परंपरा का पालन होता तो जस्टिस एएन रे कभी सीजेआई नहीं बना पाते क्योंकि जस्टिस ग्रोवर के रिटायर होने से एक माह पहले ही जनवरी 1977 में जस्टिस रे सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो जाते। किताब के अनुसार, अपनी नियुक्ति के बारे में जस्टिस अजीत नाथ रे (AN Ray) ने कहा था, अगर मैं पद स्वीकार नहीं करता तो किसी और को ऑफर किया जाता है।

CJI बनने के बाद जस्टिस रे ने केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले की समीक्षा के लिए एक खंडपीठ का गठन कर दिया था। इसे बाद में भंग करना पड़ा था। इतना ही नहीं, इंदिरा गांधी द्वारा लगाए इमरजेंसी के समय संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 22 के तहत मिले नागरिक अधिकारों (व्यक्तिगत स्वतंत्रता व अदालत में अपील का अधिकार) को निलंबित करने का फैसला भी जस्टिस रे की खंडपीठ ने ही किया था।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के दिल्ली स्थित आवास पर आयोजित गणेश पूजा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को शामिल हुए। पीएम के सीजेआई के घर जाकर पूजा करने को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद गहरा गया। विपक्ष ने इस मौके को जहां गलत करार दिया है, वहीं कुछ लोगों ने इसे सही ठहराया। जानते हैं जाने-माने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी के गणेशोत्सव से कैसे अंग्रेजों को बंगाल विभाजन रोकना पड़ा था। यह भी जानेंगे कि सीजेआई के घर पीएम की पूजा का पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से क्या कनेक्शन हैं। मुख्य न्यायाधीश चंद्रचूड़ इसी साल 10 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं। इस बीच उन्होंने कई अहम मामलों की सुनवाई भी की है। इसमें से महाराष्ट्र से जुड़ा एक मामला अभी सीजेआई के ही कोर्ट में है, जहां इसी साल चुनाव होने हैं। महाराष्ट्र में शिव सेना और एनसीपी में टूट के बाद बनी शिंदे सरकार और इसकी वैधता से जुड़ा मामला भी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।

इस विवाद पर वकीलों की एक संस्था ‘कैंपेन फॉर ज्यूडिशियल अकाउंटिबिलिटी एंड रिफॉर्म्स यानी (सीजेएआर)’ ने भी कहा है कि न्यायपालिका पर संविधान की रक्षा करने और बिना किसी भय या पक्षपात के न्याय सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है। इसे कार्यपालिका से पूरी तरह से स्वतंत्र माना जाना चाहिए। शिवसेना के उद्धव ठाकरे गुट के नेता संजय राउत ने कहा कि गणपति उत्सव में लोग एक-दूसरे के घरों में जाते हैं। प्रधानमंत्री अब तक कितने घरों में गए हैं? उन्होने आरोप लगाया, हमारी शंका इतनी है कि संविधान के रखवाले इस तरह से राजनीतिक नेताओं से मिलते हैं। महाराष्ट्र सरकार की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। उसमें एक पार्टी प्रधानमंत्री हैं, क्या चीफ जस्टिस न्याय कर पाएंगे। हमें तारीख पर तारीख मिलती है। उन्हें इस केस से खुद को अलग कर लेना चाहिए।

बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट मुख्य न्यायाधीश होते हुए केजी बालाकृष्णन तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इफ़्तार में शामिल हुए थे। बीजेपी नेता संबित पात्रा ने प्रेस कांफ्रेंस कर विपक्ष पर यह सवाल उठाया कि देश के प्रधानमंत्री अगर सीजेआई से मिलते हैं तो आपको आपत्ति होती है? क्या लोकतंत्र के दो स्तंभ को आपस में दुश्मनी रखनी चाहिए, हाथ नहीं मिलाना चाहिए? पात्रा ने भी दावा किया कि मनमोहन सिंह के इफ्तार में सीजेआई शामिल होते थे। उन्होंने इसी मौके पर राहुल गांधी की विदेश यात्रा पर भी सवाल खड़े किए।

आखिर चीफ जस्टिस ऑफ़ इंडिया ने कर्नाटक के हाई कोर्ट को क्यों लगाई फटकार?

हाल ही में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने कर्नाटक के हाईकोर्ट को फटकार लगा दी है! सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के एक जस्टिस की कथित आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर चलने वाली कार्रवाई को बंद कर दिया। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली बेंच ने कहा कि भारत के किसी भी हिस्से को कोई भी पाकिस्तान की तरह नहीं बता सकता है। जजों को ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी से परहेज करना होगा। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच जजों की बेंच ने कहा है कि आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस वी. श्रीशेषानंद ने अपनी टिप्पणियों के लिए ओपन कोर्ट में 21 सितंबर को माफी मांग ली थी और ऐसे में हम कार्यवाही बंद करते हैं। दरअसल अदालती कार्यवाही के दौरान कर्नाटक हाई कोर्ट के एक जस्टिस ने कथित तौर पर एक महिला वकील के खिलाफ टिप्पणी और फिर एक अन्य मामले में कार्यवाही के दौरान बेंगलूर के एक मुस्लिम बाहुल इलाके को पाकिस्तान कहा था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 20 सितंबर को खुद से संज्ञान लिया था। हाई कोर्ट के जस्टिस ने मकान मालिक-किरायेदार विवाद से जुड़े एक अन्य मामले में बेंगलुरु में मुस्लिम बहुल एक इलाके को ‘पाकिस्तान’ बताया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अदालतों को न्यायिक प्रक्रिया के दौरा किसी भी ऐसी आपत्तिजनक टिप्पणी से बचना चाहिए। उन्हें ऐसी टिप्पणियां नहीं करनी चाहिए। ऐसी टिप्पणियां जिससे महिला के प्रति पूर्वाग्रह दिखे या फिर किसी समाज के किसी वर्ग के खिलाफ ऐसी टिप्पणी नहीं करनी चाहिए को पूर्वाग्रह वाला हो।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस चंद्रचूड़ ने देश भर के जजों से कहा है कि वह सुनवाई के दौरान किसी भी अवांछित टिप्पणी से बचें। ऐसी टिप्पणी जो किसी समुदाय विशेष के खिलाफ पूर्वाग्रह वाला हो या फिर महिलाओं के प्रति पूर्वाग्रह दिखाता है वैसी टिप्पणी जज न करें। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस ने कहा कि आप भारत के किसी भी भूभाग को पाकिस्तान नहीं कह सकते हैं। चीफ जस्टिस ने मौखिक तौर पर यह टिप्पणी करते हुए कार्रवाई बंद कर दी। कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस ने बेंगलूर के एक इलाके विशेष को पाकिस्तान की संज्ञा दी थी।

कर्नाटक हाई कोर्ट में सुनवाई के वीडियो में एक जगह जस्टिस ने बेंगलुरू के मुस्लिम बहुल एक इलाके को पाकिस्तान कहा था और एक अन्य विडियो में जस्टिस ने महिला वकील के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। वह मामला वैवाहिक विवाद से संबंधित था। शीर्ष अदालत ने कहा कि सुनवाई के दौरान लापरवाही से हुई कोई भी टिप्पणी पूर्वाग्रह वाली हो सकती है। अदालती कार्रवाई के दौरान जज को इस बात को लेकर सजग रहना होगा कि वह कोई भी ऐसा कॉमेंट ना करे जो महिलाओं के खिलाफ पूर्वाग्रह वाला हो या फिर समाज के किसी वर्ग के खिलाफ पूर्वाग्रह वाला हो।

चीफ जस्टिस ने कहा कि अदालतों में आपत्तिजनक टिप्पणी न हो और साथ ही कहा कि इस कारण जो विवाद उत्पन्न हुआ है उस कारण लाइव स्ट्रीमिंग को बंद नहीं किया जा सकता है। दिन के सनलाइट का जवाब ज्यादा सनलाइट ही हो सकता है। आपत्तिजनक कॉमेंट वाले विडियो सर्कुलेट होने भर से लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक नहीं लगाया जा सकता है। सनलाइट का जवाब सनलाइट होता है। कोर्ट में क्या होता है सुनवाई के दौरान इसे दबाया नहीं जा सकता है। यह सभी के लिए रिमांडर है कि कोर्ट में लाइव स्ट्रीमिंग नहीं रुकेगी और इस तरह की टिप्पणी होती है इसे आधार बनाकर लाइव स्ट्रीमिंग नहीं रोकी जा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमनी ने टिप्पणियों के बारे में ‘एक्स’ पर आए कुछ संदेशों का उल्लेख किया और कहा कि तमाम मैसेज में कटुता वाली बात है। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आपने क्या जज की टिप्पणी देखी है? कोई भी भारत के किसी भी हिस्से को पाकिस्तान नहीं बुला सकता है। क्योंकि यह सब मौलिक तौर पर देश की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस दौरान कहा कि सोशल मीडिया पर कंट्रोल नहीं किया जा सकता है।

इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि हम आपको बता दें कि किसी भी गलत बात पर परदा डालना कोई समाधान भी नहीं है बल्कि उसका सामना किया जाना चाहिए। इस सब का जवाब कूप मंडूलता नहीं हो सकता है। सोशल मीडिया की पहुंच में अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग भी आ गई है। ज्यादातर हाई कोर्ट में अब लइव स्ट्रीमिंग और वीडियो कॉन्फ्रेंस के लिए नियम तय हैं। अदालती कार्यवाही में जज, वकील और वादियों व पक्षकारों सभी को हमेसा सजग रहना होगा। सुनवाई की पहुंच कोर्ट में मौजूद लोगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि अन्य लोगों तक इसकी पहुंच है।

आखिर एंटीबायोटिक सहित 50 दवाओ पर क्यों लगी रोक?

आज हम आपको बताएंगे की एंटीबायोटिक सहित 50 दवाओ पर रोक क्यों लगी है! भारत के ड्रग रेगुलेटर ने कैल्शियम और विटामिन डी3 सप्लीमेंट्स, एंटी-डायबिटीज पिल्स और हाई ब्लड प्रेशर दवाओं सहित 53 ड्रग्स को क्वालिटी टेस्ट में फेल करार दिया है। इनमें कई नामी कंपनियों की दवाएं भी शामिल हैं। सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्डस कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) ने 50 से ज्यादा दवाइयों को खराब क्वालिटी का पाया है। इनमें कैल्शियम और विटामिन D3 सप्लीमेंट, डायबिटीज की गोलियां और हाई ब्लड प्रेशर की दवाएं शामिल हैं। हर महीने होने वाले रैंडम सैंपलिंग में ये दवाएं खराब पाई गईं। CDSCO ने अपनी नई नॉट ऑफ स्टैंडर्ड क्वालिटी (NSQ) अलर्ट लिस्ट में 53 दवाओं के नाम डाले हैं। स्टेट ड्रग अफसर हर महीने रैंडम सैंपलिंग करते हैं और उसी के आधार पर NSQ अलर्ट जारी किए जाते हैं। जो दवाएं क्वालिटी टेस्ट में फेल मिली हैं उनमें विटामिन C और D3 की गोलियां Shelcal, विटामिन B कॉम्प्लेक्स और विटामिन C सॉफ्टजेल, एंटासिड Pan-D, पैरासिटामोल टैबलेट IP 500 mg, डायबिटीज की दवाई Glimepiride, हाई ब्लड प्रेशर की दवा Telmisartan जैसी कई प्रसिद्ध दवाएं शामिल हैं।

पेट के संक्रमण के इलाज को लेकर इस्तेमाल की जाने वाली दवा Metronidazole भी क्वालिटी टेस्ट में फेल हो गई। इसे PSU Hindustan Antibiotic Limited बनाती है। हाई ब्लड प्रेशर की दवा Telmisartan भी टेस्ट पास नहीं कर पाई Torrent Pharmaceuticals की ओर से डिस्ट्रिब्यूटेड और उत्तराखंड स्थित Pure & Cure Healthcare से निर्मित Shelcal भी टेस्ट में फेल हो गई। इसके अलावा, कोलकाता की एक ड्रग-टेस्टिंग लैब ने Alkem Health Science के एंटीबायोटिक्स Clavam 625 और Pan D को नकली बताया है। इसी लैब ने हैदराबाद स्थित Hetero के Cepodem XP 50 Dry Suspension, जो बच्चों को गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण के लिए दी जाती है, उसे भी घटिया स्तर का पाया है। Karnataka Antibiotics & Pharmaceuticals Ltd के पैरासिटामोल टैबलेट को भी क्वालिटी टेस्ट में फेल बताया गया है।

भारत के ड्रग कंट्रोलर ने क्वालिटी टेस्ट में फेल होने वाली दवाओं की दो लिस्ट जारी की हैं। एक लिस्ट में 48 प्रसिद्ध दवाएं हैं, जबकि दूसरी लिस्ट में 5 और दवाओं के साथ-साथ टेस्ट में फेल होने वाली दवा कंपनियों के जवाब भी हैं। हालांकि, कंपनियों ने अपने जवाब में दवाओं की जिम्मेदारी लेने से इनकार करते हुए कहा है कि वे नकली हैं। दवा निर्माताओं के जवाब वाले कॉलम में लिखा है कि वास्तविक निर्माता, लेबल क्लेम के अनुसार ने बताया है कि प्रोडक्ट का यह बैच उनके यहां से तैयार नहीं किया गया है और यह एक नकली दवा है। प्रोडक्ट के नकली होने की बात कही जा रही है, हालांकि, इसकी जांच की जा रही है।

अगस्त में, CDSCO ने भारतीय बाजार में 156 से अधिक फिक्स्ड-डोज दवा कॉम्बिनेशन पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसमें कहा गया था कि ये लोगों के लिए लिए जोखिम भरे हैं। इन दवाओं में बुखार, दर्द निवारक और एलर्जी की गोलियां शामिल थीं। यही नहीं Entod फार्मा ने दावा किया था कि PresVu Eye Drop एक एडवांस विकल्प प्रदान कर सकता है, जो 15 मिनट के भीतर नजदीकी दृष्टि को बढ़ाता है। इसके साथ ही यह भी कहा गया था कि यह देश का पहला ऐसा आई ड्रॉप डिजाइन किया गया है, जो प्रेसबायोपिया (presbyopia ) से पीड़ित लोगों के लिए पढ़ने के चश्मे पर निर्भरता को कम करने में मदद कर सकता है। जबकि कंपनी को उत्पाद के निर्माण और बिक्री की मंजूरी प्रेसबायोपिया के इलाज के लिए दी गई थी। दावा किया गया था कि इस आई ड्रॉप के प्रयोग से चश्मा भी हट सकता है और दवा डालने के 15 मिनट के अंदर ही असर होने लगेगा। दिखने में फर्क आने लगेगा। इन दावों के बाद लोगों में इस आई ड्रॉप को लेकर काफी उत्सुकता देखने को मिली थी। मीडिया और सोशल मीडिया में दवा को लेकर चर्चाएं हुई क्योंकि चश्मे से परेशान लोगों को प्रेस्वू आई ड्रॉप के रूप में बड़ी उम्मीद नजर आई। वहीं अब भारत के औषधि महानियंत्रक के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि कंपनी को इस तरह के दावे करने का अधिकार नहीं दिया गया था।

प्रेसबायोपिया उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का हिस्सा है और उम्र बढ़ने के साथ पास की नजर कमजोर हो जाती है। नजर कमजोर होने पर चश्मे का प्रयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई बीमारी नहीं है। यह एक सामान्य प्रकार का रोग है, जिसे चश्मे, कॉन्टैक्ट लेंस या सर्जरी से ठीक किया जा सकता है। आंख के आकार के कारण प्रकाश को सही तरीके से केंद्रित न कर पाने की वजह से यह दिक्कत होती है, इसकी वजह से धुंधली छवि बनती है। लेकिन दवा के प्रयोग से कुछ ही देर में असर दिखाने समेत कई तरह के अनधिकृत प्रचार को स्वास्थ्य मंत्रालय ने गंभीरता से लिया है। फॉर्मा कंपनी ने केंद्रीय औषध मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) से दवा के निर्माण और बिक्री की जो मंजूरी हासिल की थी, उसे अगले आदेश तक निलंबित कर दिया है। अथॉरिटी ने अपने आदेश में कहा है कि प्रेस और सोशल मीडिया पर अनधिकृत प्रचार ने रोगियों द्वारा इसके असुरक्षित उपयोग और जनता के लिए सुरक्षा चिंता पर संदेह पैदा किया था। प्रचार से ऐसा लगा कि जैसे यह दवा ओटीसी दवाओं (ओवर द काउंटर) की तरह उपयोग के लिए है, जबकि इसे केवल प्रिस्क्रिप्शन दवा के रूप में अप्रूव किया गया है।

आजकल पोषण की कमी, लापरवाही और ज्यादा मोबाइल के प्रयोग के चलते लोगों की नजरें समय से पहले कमजोर होने लगी हैं, बुजुर्ग ही नहीं बच्चों को भी आजकल चश्मा लगने लगा है क्योंकि नजर कमजोर होने की कंडीशन यानी प्रेसबायोपिया काफी लोगों को अपना शिकार बना रही है। शार्प साईट आई हॉस्पिटल के डायरेक्टर डॉ. समीर सूद का कहना है कि अभी हाल ही में एक आई ड्रॉप बहुत चर्चा में आया था, जिसके लिए दावा है कि सिर्फ इस आई ड्रॉप के माध्यम से बिना चश्मे के बुजुर्ग लोग अपनी नजदीक की नजर ठीक कर सकते हैं। यह ड्रॉप और कुछ नहीं बल्कि पिलोकार्पिन है जो ग्लूकोमा के लिए बहुत सालों से इस्तेमाल की जा रही है। सिर्फ आपको नजदीक के चश्मे उतारने के लिए यह बहुत वाद-विवाद करने योग्य है क्योंकि इसके बहुत साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। डीसीजीआई ने इसको सस्पेंड किया है और ये बिलकुल ठीक दिशा में सही कदम है।

केंद्रीय मंत्री निर्मला के खिलाफ जांच निलंबित करने का दिया आदेश

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कोर्ट ने चुनावी बांड ‘तोलाबाजी’ के लिए केंद्रीय मंत्री निर्मला के खिलाफ जांच निलंबित करने का आदेश दिया
कर्नाटक के ‘जनाधिकार संरक्षण संगठन‘ की ओर से आदर्श अय्यर ने बेंगलुरु की एक अदालत में निर्मला और कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष नलिनकुमार कटिल के खिलाफ चुनावी बांड के जरिए जबरन वसूली की शिकायत दर्ज कराई है. चुनावी बॉन्ड के जरिए उगाही मामले में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को राहत मिली है. कर्नाटक उच्च न्यायालय ने सोमवार को बेंगलुरु की विशेष अदालत द्वारा शनिवार को उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर पर रोक लगा दी और जांच शुरू करने का आदेश दिया।

कर्नाटक के ‘जनाधिकार संरक्षण संगठन’ की ओर से आदर्श अय्यर नाम के एक शख्स ने बेंगलुरु की एक अदालत में निर्मला और कर्नाटक बीजेपी अध्यक्ष नलिनकुमार कटिल के खिलाफ चुनावी बांड के जरिए जबरन वसूली की शिकायत दर्ज कराई है. उसी के मद्देनजर शनिवार को बेंगलुरु की जन प्रतिनिधि अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट की सदस्य निर्मला और सांसद नलिन के खिलाफ आदेश जारी किया.

15 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड योजना को ‘असंवैधानिक’ बताते हुए खारिज कर दिया. मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अगुवाई वाली पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने भारतीय स्टेट बैंक और चुनाव आयोग को बांड ट्रेडिंग से संबंधित सभी जानकारी का खुलासा करने का निर्देश दिया। उस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी बांड प्रणाली पर ‘क्विड प्रो क्वो’ वाली टिप्पणी की थी. यानी इसे किसी चीज़ के बदले किसी को फ़ायदा देने की व्यवस्था के तौर पर दिखाया गया. आवेदक का दावा है कि ‘विशेषाधिकार’ वास्तव में एक ‘धोखा’ है। इसलिए उन्होंने निर्मला सहित कुछ लोगों के खिलाफ जांच की मांग करते हुए विशेष जन प्रतिनिधि अदालत का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले दो स्वयंसेवी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि चुनावी बॉन्ड से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि ज्यादातर मामलों में कॉरपोरेट निकाय लाभ पाने के लिए बॉन्ड के जरिए सत्ताधारी पार्टी को पैसा देते हैं. लेकिन याचिका को खारिज करते हुए, शीर्ष अदालत ने 2 अगस्त को कहा कि अब इस बात की जांच नहीं हो सकती है कि चुनावी बांड के माध्यम से दान दिए जाने और प्राप्त करने के दौरान ‘प्रतिशोध’ या ‘पक्षपातपूर्ण’ था या नहीं।

आवेदक का दावा है कि ‘विशेषाधिकार’ वास्तव में एक ‘धोखा’ है। इसलिए उन्होंने निर्मला सहित कुछ लोगों के खिलाफ जांच की मांग करते हुए विशेष जन प्रतिनिधि अदालत का दरवाजा खटखटाया। इससे पहले दो स्वयंसेवी संगठनों ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देकर कहा था कि चुनावी बॉन्ड से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि ज्यादातर मामलों में कॉरपोरेट निकाय लाभ पाने के लिए बॉन्ड के जरिए सत्ताधारी पार्टी को पैसा देते हैं. लेकिन याचिका को खारिज करते हुए, शीर्ष अदालत ने 2 अगस्त को कहा कि अब इस बात की जांच नहीं हो सकती है कि चुनावी बांड के माध्यम से दान दिए जाने और प्राप्त करने के दौरान ‘प्रतिशोध’ या ‘पक्षपातपूर्ण’ था या नहीं।

यह आरोप लगाया गया है कि चुनावी बांड के माध्यम से जिन तीन प्रकार के वित्तीय लेनदेन का ‘पता चला’ है, वे वास्तव में जबरन वसूली हैं। इन तीन प्रकार के वित्तीय लेनदेन में से पहला है वर्क परमिट, लाइसेंस, वर्क परमिट प्राप्त करने के लिए अनुदान। दूसरा, कई संगठनों ने ईडी, आयकर विभाग या सीबीआई के छापों से ठीक पहले बांड दान किए हैं. कई मामलों में यह आरोप लगाया गया है कि संबंधित एजेंसियों ने अनुदान के आदान-प्रदान में उचित नियंत्रण नहीं किया है। तीसरा, संगठन के अनुकूल नीतियां बनाने के लिए बांड में अनुदान।

संयोग से, भले ही सुप्रीम कोर्ट ने इसे सीधे तौर पर ‘असंवैधानिक’ कहा, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनावी बांड के लिए तर्क दिया और दावा किया कि चुनाव में काले धन के उपयोग को रोकने के लिए प्रणाली (चुनावी बांड) की शुरुआत की गई थी। उन्होंने कहा, “अगर ईमानदारी से विचार किया जाए, तो एक दिन हर किसी को पछतावा होगा।” उन्होंने यह भी कहा, “मैंने कभी नहीं कहा कि कोई निर्णय पूरी तरह से दोषरहित था।” लेकिन विपक्षी दल चुनावी बांड के बारे में झूठ फैला रहे हैं।” वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने लोकसभा चुनाव से पहले कहा, ”चुनावी बांड कोई पारदर्शिता कार्यक्रम नहीं है, बल्कि दुनिया का सबसे बड़ा धोखाधड़ी चक्र है। और नरेंद्र मोदी उनके मास्टरमाइंड (मूलचक्री) हैं।” कांग्रेस ने दावा किया कि एक विशेष अदालत द्वारा निर्मला के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश के बाद आरोपों को बरकरार रखा गया था। लेकिन हाई कोर्ट के आदेश से विपक्ष की ‘गतिविधि’ पर ब्रेक लग गया.

क्वाड्रैट-फेयरवेल के दिन ईस्ट बंगाल की प्रैक्टिस, हीरा की सीनियर टीम में वापसी, दबाव में हैं बिनो

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कार्ल्स कुआड्राट ने सोमवार सुबह इस्तीफा दे दिया. छुट्टी के बाद, ईस्ट बंगाल ने दोपहर को प्रशिक्षण शुरू किया। पूरी टीम ने अंतरिम कोच बिनो जॉर्ज के नेतृत्व में अभ्यास किया। कार्ल्स कुआड्राट ने सोमवार सुबह इस्तीफा दे दिया. छुट्टी के बाद, ईस्ट बंगाल ने दोपहर को प्रशिक्षण शुरू किया। पूरी टीम ने अंतरिम कोच बिनो जॉर्ज के नेतृत्व में अभ्यास किया। कुआद्रत के सहायक भी मदद के लिए वहां मौजूद थे. मैदान के किनारे खड़े होकर इमामी कर्ता बिवास अग्रवाल अभ्यास देखते रहे।

आईएसएल के पहले तीन मैच हारने के बाद कुआद्रत ने पद छोड़ दिया। लेकिन पूर्वी बंगाल के पास इंतजार करने का समय नहीं है। वे अगले शनिवार को जमशेदपुर के खिलाफ खेलेंगे। आईएसएल में दो टीमें आमने-सामने हैं जिनके पास स्वदेशी कोच हैं। नतीजतन, दिमाग की लड़ाई होगी.

कुआड्राट चले गए हैं, लेकिन उनके सहायक डिमास डेलगाडो, फिटनेस कोच कार्लोस जिमेनेज़ बने हुए हैं। उन्होंने बिनो की मदद की. बिनो ने अभ्यास से पहले डिमास के साथ और बाद में क्लेटन सिल्वा और हिजाज़ी माहेर के साथ विस्तार से बात की। भले ही वह इतने लंबे समय से रिजर्व टीम में खेल रहे हों, लेकिन बिनो ने हीरा मंडल को सीनियर टीम के अभ्यास में लौटा दिया है।

उनके कोच बनने से पीवी विष्णु, अमन सीके, सायन बनर्जी जैसे युवा फुटबॉलरों को राहत मिली है। क्योंकि बिनॉय ने उन्हें रिजर्व टीम से चुना है. उस दिन शाऊल क्रेस्पो और दिमित्रियोस डायमंटाकोस अभ्यास में नहीं थे। शूटिंग और स्थिति अभ्यास. बिनो ने पहले दिन कोई दबाव नहीं डाला.

वह प्रैक्टिस के बाद सार्वजनिक तौर पर अपना मुंह नहीं खोलना चाहते थे. हालांकि, उन्होंने संकेत दिया कि नई जिम्मेदारी से वह खुश तो हैं, लेकिन उन पर दबाव भी है. फिलहाल वह अपने दिमाग को तरोताजा रखना चाहते हैं और टीम पर ध्यान केंद्रित करना चाहते हैं। आईएसएल में ईस्ट बंगाल लगातार तीन मैच हार चुका है। शुक्रवार को एफसी गोवा से युवा भारती की हार के बाद मैदान पर ‘कारलेस क्वाड्रेट गो बैक’ के नारे सुनाई दिए। हालांकि उस दिन लाल-पीले कोच ने अपने भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहा. उन्होंने सोमवार को इस्तीफा दे दिया. उन्होंने यह फैसला क्लब के अधिकारियों से बात करने के बाद लिया.

ईस्ट बंगाल ने सोमवार को घोषणा की कि कुआद्रत ने इस्तीफा दे दिया है. एक बयान में उन्होंने कहा, “कार्ल्स कुआड्राट ने ईस्ट बंगाल के कोच का पद छोड़ दिया है। बिनो जॉर्ज अंतरिम कोच का पद संभालेंगे। नए कोच की घोषणा होने तक वह कोच बने रहेंगे।”

बिनो कोलकाता लीग में खेलने वाली ईस्ट बंगाल टीम के कोच हैं। उनकी कोचिंग में ईस्ट बंगाल कोलकाता लीग में अजेय है। वे बिना एक भी मैच हारे लीग जीतने की राह पर हैं। यही कारण है कि क्लब फिलहाल बिनो पर निर्भर है। बयान में कहा गया है, “लाल और पीले रंग के प्रशंसकों से हमारा अनुरोध है कि कृपया अंतरिम कोच बिनो का समर्थन करें। कुआड्राट की कोचिंग में ईस्ट बंगाल ने पिछले साल सुपर कप जीता था।” वह लाल-पीले समर्थकों की नजरों का गहना बन गये। पिछली बार वे डूरंड कप में उपविजेता थे। ईस्ट बंगाल ने क्लब को क्वाड्रैट के तहत इन दो सफलताओं की याद दिला दी। क्लब ने उन्हें धन्यवाद दिया.

ईस्ट बंगाल की कमान संभालने के बाद कुआद्रत ने पिछले सीज़न में सुपर कप और डूरंड में अच्छा प्रदर्शन किया था लेकिन टीम को आईएसएल प्लेऑफ़ में नहीं ले जा सके। उस समय उन्होंने कहा था कि वह टीम में कुछ और अच्छे फुटबॉलर चाहते हैं. ईस्ट बंगाल ने इस सीजन से पहले अपनी मांग के मुताबिक टीम तैयार कर ली है. वे पिछली बार के आईएसएल गोल्डन बूट विजेता दिमित्री डायमंटाकोस को लाए हैं। मैडी तलाल जैसे विदेशियों को साइन किया गया है। उन्होंने मोहन बागान से हेक्टर युस्टे और अनवर अली जैसे डिफेंडरों को साइन किया है। उसके बाद भी ईस्ट बंगाल इस बार खराब खेल रहा है. डुरंड असफल रहा. आईएसएल लगातार तीन मैच हार चुका है. उसके बाद कोच काम पर चला गया। अब देखते हैं कि बिनो के नेतृत्व में ईस्ट बंगाल की किस्मत बदलती है या नहीं।

ईस्ट बंगाल ने सोमवार को घोषणा की कि कुआद्रत ने इस्तीफा दे दिया है. एक बयान में उन्होंने कहा, “कार्ल्स कुआड्राट ने ईस्ट बंगाल के कोच का पद छोड़ दिया है। बिनो जॉर्ज अंतरिम कोच का पद संभालेंगे। नए कोच की घोषणा होने तक वह कोच बने रहेंगे।”

बिनो कोलकाता लीग में खेलने वाली ईस्ट बंगाल टीम के कोच हैं। उनकी कोचिंग में ईस्ट बंगाल कोलकाता लीग में अजेय है। वे बिना एक भी मैच हारे लीग जीतने की राह पर हैं। यही कारण है कि क्लब फिलहाल बिनो पर निर्भर है। बयान में कहा गया, “लाल-पीले समर्थकों से हमारा अनुरोध है कि अंतरिम कोच बिनो का समर्थन करें।”

क्या दो वक्त का चावल खाना वाकई हानिकारक है? या यह कुछ लोगों के लिए अच्छा है?

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क्या चावल खाने से कोई मोटा हो जायेगा? पूरे दिन में कोई कितना चावल खा सकता है, पोषण विशेषज्ञ ने बताया। ‘वीटो’ के रूप में बंगाली की प्रतिष्ठा भी कम नहीं है। लेकिन इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या कहते हैं, जो लोग चावल खाना पसंद करते हैं, वे यह सब नहीं खाते। बल्कि दिन की शुरुआत में या रात को सोने के बाद दो चावल खाने से शरीर भरा हुआ महसूस होता है। कुछ लोग चावल को तीन समय तक खा सकते हैं।

लेकिन स्वास्थ्य के प्रति जागरूक लोग जिन्होंने हाल ही में चावल खाना बंद कर दिया है, वे दलिया, ओट्स, क्विनोआ का विकल्प चुन रहे हैं। लेकिन क्या चावल खाना अच्छा नहीं है? पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि चावल खाने से कोई आपत्ति नहीं है. लेकिन संयमित मात्रा में खाएं.

चावल की गुणवत्ता

भारत, बांग्लादेश के अलावा चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम समेत कई देश हैं जहां चावल खाया जाता है। चावल को पचाना बहुत आसान होता है. इसमें भरपूर मात्रा में कार्बोहाइड्रेट्स होते हैं, जो शरीर को पूरे दिन के काम के लिए ऊर्जा प्रदान करते हैं। चावल के विपरीत, चावल में थोड़ा सा विटामिन बी, मैग्नीशियम और आयरन होता है। पोषण विशेषज्ञ शम्पा चक्रवर्ती कहती हैं, “चावल में कार्बोहाइड्रेट तो होता है लेकिन फाइबर नहीं होता है। ब्राउन राइस में बहुत कम फाइबर होता है। जबकि उबले चावल में कुछ विटामिन बी होता है, अटाप चावल में नहीं। यही कमी है.” तो दिन में दो या तीन बार चावल खाने में क्या दिक्कत है?

अगर किसी को पतला होना है, वजन कंट्रोल करना है तो दिन भर में बार-बार चावल खाना परेशानी का सबब बन सकता है। ऐसे में चावल की जगह ओट्स, दलिया, क्विनोआ खा सकते हैं। लेकिन अगर कोई समस्या न हो तो चावल दिन में कई बार खाया जा सकता है. लेकिन अगर वह समस्या नहीं है तो कोई समस्या नहीं है. पोषण विशेषज्ञ शम्पा ने कहा, एक वयस्क स्वस्थ व्यक्ति एक दिन में 100 ग्राम चावल खा सकता है। इसमें लगभग 350-360 किलो कैलोरी होती है। लेकिन चावल की मात्रा इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति कितना शारीरिक श्रम कर रहा है। जो लोग शारीरिक रूप से कम सक्रिय हैं उन्हें रोजाना 60-70 ग्राम चावल खाना चाहिए। इसे दो बार खाया जाए तो बेहतर है। वहीं 12-14 साल के लड़के-लड़कियां जो दिन भर भागदौड़ करते हैं, वे 120-150 ग्राम चावल खा सकते हैं, क्योंकि वे अधिक कैलोरी का सेवन करते हैं। लेकिन यह राशि लड़के और लड़कियों की लंबाई और वजन के अनुसार अलग-अलग होगी।

चावल के साथ सब्जी-मछली

चावल के साथ सब्जियाँ, दालें, मछली भी खाई जाती हैं। पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि इस आहार में चावल के फाइबर की कमी की भरपाई बाकी भोजन से हो जाती है। साथ ही सब्जियों से शरीर को विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं। प्रोटीन भी मेल खाता है.

डायबिटीज रोगियों के लिए चावल खाना है खतरनाक!

अगर आपको डायबिटीज है तो आपको चावल जरूर खाना चाहिए. क्या वे एक समय चावल खायेंगे? शंपा कहती हैं, ”चावल का मधुमेह से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन चावल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स अधिक होता है। दूसरे शब्दों में, अगर इसे गलत तरीके से खाया जाए तो यह रक्त शर्करा के स्तर को बढ़ा सकता है।” लेकिन यह उचित है. यह इस बात पर भी निर्भर करेगा कि उसके शरीर में कोई अन्य समस्या है या नहीं। ऐसे में आकार का निर्धारण किसी पोषण विशेषज्ञ की सलाह से करना चाहिए।

दिन में कितनी बार खा सकते हैं चावल?

दिन में कई बार चावल खाने से आपको कोई नुकसान नहीं होगा. पोषण विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ व्यक्ति दिन भर में उतना ही चावल खा सकता है, जितना उसे चाहिए।

हेन्शेल द्वारा विभिन्न समय में सामना की जाने वाली सबसे आम समस्याओं में से एक चावल में कीड़ों का फंसना है। विशेषकर बरसात के मौसम में धान के खेत में कीड़ों की बहुतायत बढ़ जाती है। एक-एक करके कीड़ों को मारना बहुत श्रमसाध्य है। कभी-कभी कीड़ों की संख्या इतनी बढ़ जाती है कि उन पर नियंत्रण करना लगभग असंभव हो जाता है। चावल को फेंकने के अलावा कोई रास्ता नहीं है.

अगर चावल में कीड़े लग जाएं तो चावल खराब हो जाता है, अगर चावल में कीड़े लग जाएं तो भी संक्रमण का डर रहता है. कुछ सरल नियमों का पालन करके चावल के इस कीट को खत्म किया जा सकता है। बस आपको बचत करने का सही तरीका पता होना चाहिए। पता लगाएं कि चावल को कीड़ों से बचाने के लिए उसका भंडारण कैसे किया जा सकता है।

1) चावल को हमेशा सीलबंद डिब्बे में रखें. बेहतर होगा कि आप इसे बिना प्लास्टिक का इस्तेमाल किए किसी बड़े स्टील के ड्रम में रख सकें। इससे चावल अच्छे से सुरक्षित रहता है और कीड़े भी नहीं लगते। चावल पकाते समय उसमें कुछ नीम की पत्तियाँ या तेज पत्तियाँ रख लें। नीम और तेज पत्तों की गंध धान के कीड़ों को सहन नहीं होती।

2) चावल को कभी भी लकड़ी के डिब्बे में न रखें। लकड़ी में कीड़ों के पनपने का खतरा होता है। यदि आपको नियमित रूप से चावल में कीड़े मिलते हैं, तो इसे फ्रिज में रख दें। रेफ्रिजरेटर की ठंडक से कीड़े मर जाते हैं।

सलमान के लिए शादी का रिश्ता लेकर विदेश से आई महिला! भाई ने जवाब में क्या कहा?

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महिला विदेश से आई थी. उसका एक ही उद्देश्य था. सलमान को देखा और उन्हें प्रपोज कर दिया। उनका नाम कई अभिनेत्रियों के साथ जुड़ा है। उन्होंने अपना समय कई रिश्तों में बिताया। लेकिन कोई भी रिश्ता टिक नहीं पाया. सलमान खान अभी तक चंदनताला नहीं गए हैं. लेकिन, भाईजान के फैन्स ने उम्मीद नहीं छोड़ी। वे सलमान को दूल्हे के रूप में देखने के लिए उत्सुक हैं। लेकिन क्या सलमान शादी करेंगे? उन्होंने ये जवाब एक महिला को दिया.

महिला विदेश से आई थी. उसका एक ही उद्देश्य था. सलमान को देखा और उन्हें प्रपोज कर दिया। यह घटना एक समारोह में घटी. इसके बाद सलमान ने मीडिया का सामना किया। विभिन्न प्रश्नों के उत्तर दे रहे हैं। उसी वक्त महिला फैन आ गई.

फैन ने सलमान से कहा, ‘जब मैंने आपको पहली बार देखा तो मुझे आपसे प्यार हो गया। इसलिए मैं हॉलीवुड से आपके लिए आया हूं।” सलमान ने मजाक में कहा, ‘आप शाहरुख खान के बारे में बात कर रहे होंगे!’ तभी फैन ने दोबारा कहा, ‘नहीं. मैं बात कर रहा हूं सलमान खान की. सलमान क्या तुम मुझसे शादी करोगे?” भाईजान ने जवाब दिया, ”मेरी शादी की उम्र निकल चुकी है. आपको मुझसे 20 साल पहले मिलना चाहिए था।”

घटना एक साल पहले की है. लेकिन अभी इस घटना का वीडियो नेटपारा पर वायरल है. भाईजान के चाहने वालों की संख्या गिनती नहीं की जा सकती. ऐसे में उनकी शादी से जुड़ी तमाम जानकारियां उनके लिए बेहद दिलचस्प हैं।

बता दें कि सलमान आखिरी बार फिल्म ‘टाइगर 3’ में नजर आए थे। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही थी. फिलहाल वह ‘बिग बॉस 18’ में बिजी हैं। हर बार की तरह इस बार भी सलमान होस्ट की भूमिका में नजर आएंगे. इसके अलावा एक्टर फिल्म ‘सिकंदर’ पर भी काम कर रहे हैं। आज वह बॉलीवुड के चचेरे भाई हैं। जब उनकी फिल्म दिवाली या ईद पर रिलीज होती है तो प्रशंसक कंसार-घंटियां बजाकर सिनेमाघरों को भर देते हैं। फैंस पूरे साल उन्हें बड़े पर्दे पर देखने का इंतजार करते हैं। लेकिन एक समय सलमान खान का करियर डूब रहा था. एक के बाद एक फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही थी. उस वक्त आई बाढ़ में भाईजान कैसे बचे, इसकी भी बी-टाउन में खूब चर्चा होती है।

यह अवधि 2004 से 2006 के बीच की है. इस दौरान ‘गारब: प्राइड एंड ऑनर’, ‘मुझसे शादी करोगी’, ‘फिर मिलेंगे’, ‘दिल ने जिसे अपना कान्हा’, ‘लकी: टाइम फॉर लव’ रिलीज हुईं। सलमान की ये फिल्में उस वक्त बॉक्स ऑफिस पर बिल्कुल भी रिस्पॉन्स नहीं दे पाईं। करीना कपूर के साथ ‘कियू की’ और प्रियंका चोपड़ा के साथ ‘सलामे इश्क’ भी असफल रहीं। यह सलमान के करियर का सबसे कठिन दौर माना जाता है। लाखों रुपये का नुकसान हो रहा था. भाईजान टूट गये. इसके बाद उसके हाथ एक तस्वीर आती है, जो उसकी जिंदगी फिर से बदल देती है.

सलमान ने 2007 में फिल्म ‘पार्टनर’ में काम किया था। फिल्म में गोविंदा, लारा दत्त और कैटरीना कैफ भी थे। इस फिल्म में सलमान एक लव काउंसलर की भूमिका में नजर आये थे. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया. यहां तक ​​कि, इसे समीक्षकों द्वारा भी सराहा गया। ‘पार्टनर’ 28 करोड़ रुपए में बनी थी। लेकिन उस वक्त बॉक्स ऑफिस पर इस फिल्म ने 100.91 करोड़ रुपये का बिजनेस किया था. कहा जाता है कि इस फिल्म ने सलमान के करियर में संजीवनी की तरह काम किया था. सिर्फ तस्वीरें नहीं. फिल्म का गाना भी हिट रहा.

ऐश्वर्या राय बच्चन ने गुपचुप तरीके से की सलमान खान से शादी! एक समय इन दोनों सितारों का रिश्ता बॉलीवुड में चर्चा के केंद्र में था. 1999 में फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ की शूटिंग से सलमान और ऐश्वर्या का प्यार शुरू हुआ। इसके बाद ये खबर फैल गई कि इस स्टार जोड़ी ने गुपचुप तरीके से शादी कर ली है. यहां तक ​​कि ऐश्वर्या के धर्म परिवर्तन की भी चर्चा बी-टाउन में हुई थी.

लोनावला के आलीशान बंगले में हुई सलमान और ऐश्वर्या की शादी की धूम मची हुई है. करीबी परिवार और दोस्त मौजूद थे। लेकिन पूर्व ब्यूटी क्वीन के माता-पिता इस बात से बिल्कुल भी सहमत नहीं थे. इसलिए वे इस शादी से नदारद रहे. शादी ख़त्म नहीं होती. खबर थी कि सलमान और ऐश्वर्या न्यूयॉर्क में हनीमून पर गए थे। लेकिन इन घटनाओं की सच्चाई कभी सामने नहीं आई। सलमान और ऐश्वर्या की शादी की खबरें अफवाह बनकर रह गई हैं।

एक इंटरव्यू में जब ऐश्वर्या से इस बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने दावा किया कि यह सब झूठ है। अगर वह शादी कर लेंगी तो पूरी इंडस्ट्री को पता चल जाएगा।’ एक्ट्रेस ने किया दावा. ऐश्वर्या ने कहा, ”अगर उन्होंने शादी कर ली तो क्या पूरी इंडस्ट्री को खबर नहीं होगी? हमारा उद्योग बहुत छोटा है. मैं उस तरह का इंसान नहीं हूं जो शादी जैसी बड़ी चीज से इनकार कर दूंगा। जब मेरी शादी हुई तो मैं गर्व से अपने दूल्हे का परिचय पूरी दुनिया को दूंगी। उसके बिना शादी करने का समय ही कहाँ है? ये अफवाहें वाकई हास्यास्पद हैं।”

ऐश्वर्या और सलमान ने 2002 में अपना रिश्ता खत्म कर लिया। लेकिन उस अलगाव की खूब चर्चा हुई. अलग होने के बाद दोनों ने एक-दूसरे से मिलना लगभग बंद कर दिया। इसके बाद ऐश्वर्या और सलमान ने फिर कभी साथ काम नहीं किया।

होठों का रंग बता सकता है शरीर कैसा है! जानिए कौन से रंग क्या दर्शाते हैं

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बहुत से लोग सोचते हैं कि होंठों पर काले धब्बे होने का एकमात्र कारण धूम्रपान है। होठों के रंग में बदलाव विभिन्न शारीरिक समस्याओं का संकेत हो सकता है। शुरुआत में बीमारी का पता लगाने के लिए डॉक्टर जीभ देखने को कहते हैं। इसके बाद उन्होंने पलक के हिस्से को खींचकर शरीर में हीमोग्लोबिन या आयरन के स्तर की जांच की। लेकिन आमतौर पर किसी की नजर होठों पर नहीं जाती। बहुत से लोग सोचते हैं कि होंठों पर काले धब्बे होने का एकमात्र कारण धूम्रपान है। बहुत से लोग नहीं जानते होंगे कि होठों के रंग में बदलाव के पीछे कई शारीरिक समस्याओं का संकेत हो सकता है।

1) नीले होंठ:

शरीर में ऑक्सीजन की कमी के कारण होंठ नीले पड़ सकते हैं। जिसे चिकित्सीय भाषा में ‘सायनोसिस’ कहा जाता है। इसके अलावा अचानक दिल का दौरा पड़ने या सांस लेने में तकलीफ होने पर भी होठों का रंग नीला-बैंगनी हो सकता है।

2) पीले होंठ:

सफेद या पीले होंठ आमतौर पर एनीमिया का संकेत होते हैं। शरीर में हीमोग्लोबिन, आयरन की कमी होने पर ऐसी समस्याएं हो सकती हैं।

3) काले होंठ:

ज्यादा धूम्रपान करने से होठों पर काले धब्बे पड़ जाते हैं। इसके अलावा दांतों और मसूड़ों की समस्या होने पर भी होंठ काले हो सकते हैं। होठों पर अचानक चोट लगने या खून जमने की स्थिति में काले धब्बे पड़ जाते हैं।

होठों का सामान्य रंग वापस पाने के लिए क्या करें?

पर्याप्त पानी पियें. शरीर में पानी की कमी नहीं होने देनी चाहिए. होठों को सप्ताह में कम से कम दो बार स्क्रब या एक्सफोलिएट किया जा सकता है। धूप से बचने के लिए एसपीएफ युक्त लिप बाम का भी इस्तेमाल करना चाहिए।
कितने पुरुष अपने होठों की उचित देखभाल करते हैं? जो लोग बहुत अधिक धूम्रपान करते हैं उनके होठों पर काले धब्बे हो जाते हैं। कई लोगों के होंठ और त्वचा फट जाती है। अगर आपको बार-बार अपने होठों को चाटने की आदत है तो आपके होठों की त्वचा बहुत जल्दी रूखी हो जाएगी। फिर ये अच्छा नहीं लगता. होठों की त्वचा बहुत मुलायम होती है. इसलिए इसकी उचित देखभाल की जरूरत होती है। साधारण रखरखाव से आपके होंठ सितारों की तरह सुंदर और चिकने हो जाएंगे।

होठों की देखभाल में ज्यादा मेहनत नहीं, किन नियमों का करें पालन?

1) सबसे पहले होठों को चाटने या होठों को काटने की आदत छोड़ देनी चाहिए। अगर होठों की त्वचा सूखी है तो त्वचा को खींचने से बचें। यह होठों की त्वचा को अधिक खुरदुरा और शुष्क बना देता है।

2) रोज रात को सोने से पहले लिप बाम लगाएं। इससे होंठ नम रहेंगे।

3) होठों का प्राकृतिक रंग बरकरार रखने के लिए एक्सफोलिएशन बहुत जरूरी है। यह मृत त्वचा कोशिकाओं को हटा देता है। इसके लिए आपको नियमित रूप से स्क्रब करना होगा। एक बहुत ही आसान तरीका है शुगर स्क्रब। अपनी उंगली को गीला करके उस पर चीनी लगाएं और धीरे से अपने होठों पर मलें। बहुत ज़ोर से नहीं. इसके बाद पानी से धो लें और लिप बाम लगा लें। आप चीनी और शहद के स्क्रब का भी उपयोग कर सकते हैं।

4) एक बड़ा चम्मच शहद, एक बड़ा चम्मच चीनी और एक बड़ा चम्मच जैतून का तेल का मिश्रण तैयार करें. रात को सोने से पहले इस मिश्रण की थोड़ी मात्रा लें और इसे अपने होठों पर मलें। इसे 10 मिनट के लिए छोड़ दें और धो लें। इस स्क्रब के इस्तेमाल से धूम्रपान के कारण होठों पर पड़े काले धब्बे दूर हो जाएंगे।

5) बाजार में बहुत सारे रसायन बचे हैं. घर पर हर्बल लिप बाम बनाएं। एक बर्तन में नारियल तेल और पेट्रोलियम जेली को एक साथ गर्म करें। गर्म करने पर, दोनों सामग्रियां मिश्रित हो जाएंगी और समान घनत्व की हो जाएंगी। इस मिश्रण को ठंडा होने दें. ठंडा होने पर छोटी कांच की शीशियों में रखें। इसे रोजाना होठों पर लगाने से होंठ मुलायम बने रहेंगे।

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अगर आप ऑफिस में लंबे समय तक वातानुकूलित कमरे में बैठते हैं तो भी आपके होंठ फट जाते हैं। फिर आप इस होममेड बाम की थोड़ी मात्रा अपने होठों पर लगा सकते हैं। इससे होंठ नम रहेंगे।

6) आधा कप चुकंदर लें और उसका रस निकाल लें. इस जूस में एक चम्मच घी मिला लें. इस मिश्रण को फ्रिज में रख दें. जब मिश्रण जम जाए तो इसे फ्रिज से बाहर निकालें और अपने होठों पर लगाएं। यह होठों के काले दाग-धब्बे हटाने में बहुत उपयोगी है।

क्या अब भारत को मिलेगा अमेरिका का प्रीडेटर ड्रोन?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या अब भारत को अमेरिका का प्रीडेटर ड्रोन मिलेगा या नहीं !अमेरिका में 9/11 हमलों के बाद तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने 2003 में अफगानिस्तान और इराक के खिलाफ वॉर ऑन टेरर का ऐलान कर दिया। उस वक्त इन दो देशों में बड़े पैमाने पर प्रीडेटर ड्रोंस से हमले किए गए। इन मानवरहित ड्रोंस को रीपर ड्रोन भी कहा जाता है। अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA और एयरफोर्स ने सबसे पहले इनका इस्तेमाल दुश्मनों के खिलाफ करना शुरू किया। 1995 में इनका इस्तेमाल होना शुरू हुआ था। अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इराक, सीरिया और यमन में आतंकियों के खिलाफ इन ड्रोंस का सबसे ज्यादा इस्तेमाल हुआ। यहां तक कि नाटो सेनाओं ने भी इसका व्यापक रूप से इस्तेमाल किया। अब यही प्रीडेटर ड्रोन के एडवांस वजर्न यानी MQ-9B भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना का भी हिस्सा होंगे, जिसकी डील का रोडमैप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ तैयार किया है। माना जा रहा है कि अक्टूबर तक ये डील पूरी तरह पक्की हो जाएगी। जानते हैं इस ड्रोन के कारनामे और भारत की जरूरतों को पूरा करने में यह कितना सक्षम होगा।

बता दे कि प्रीडेटर ड्रोन के बारे में कहा जाता है कि इसने पाकिस्तान में छिपे बैठे आतंकियों को खोज-खोजकर मारा। पाकिस्तानी मीडिया इसे ड्रोन वॉर भी कहता है। 2004 से लेकर 2018 के बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए ने प्रीडेटर ड्रोन से खैबर पख्तूनख्वा इलाके में रह रहे 5,059 आतंकियों को मार गिराया। इसमें अफगानिस्तान तालिबान के कमांडर बैतुल्लाह मेहसूद, हकीमुल्लाह मेहसूद और अख्तर मंसूर जैसे आतंकी मारे गए थे। यह नीति बराक ओबामा और उनके बाद आए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल तक चलती रही है। इसे लेकर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ भी ऐतराज जता चुके हैं।

MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन एक मानवरहित यूवी या विमान है। ये ड्रोन जमीन पर दो पायलटों के जरिये रिमोट से संचालित किए जाते हैं। MQ-9B के कुल दो वर्जन हैं, इसमें सी-गार्जियन और स्काई गार्जियन है। ये ड्रोन जमीन से लेकर आसमान और समंदर से लॉन्च किए जा सकते हैं। MQ-9B ड्रोन को प्रीडेटर्स के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि ये मारक हथियारों से लैस होते हैं। प्रीडेटर ड्रोन को इटली, इजराइल और तुर्की की सेनाएं इस्तेमाल करती हैं। इसकी सटीक मारक क्षमता की वजह से जन-धन की हानि कम होती है, इसलिए दुनियाभर में इस अमेरिकी ड्रोन की डिमांड ज्यादा रहती है। हालांकि, ये सबको आसानी से नहीं मिल सकता है। इसके लिए अमेरिकी कांग्रेस जब इजाजत देता है, तभी इसे किसी देश को दिया जा सकता है।

अमेरिकी सेनाओं की रक्षक रहे इस प्रीडेटर ड्रोन ने इस्लामिक स्टेट के लीडर अबु बकर अल बगदादी और उसके सैन्य कमांडर मोहम्मद आतिफ को मौत के घाट उतार दिया था। ये सभी ड्रोन से किए गए मिसाइल हमलों में मारे गए थे। जनवरी, 2020 में ईरान में रसूखदार जनरल कासिम सुलेमानी को इसी अमेरिकी ड्रोन ने उड़ा दिया था। इसके अलावा, कई अलकायदा लीडर भी प्रीडेटर ड्रोंस के हमलों में मारे गए थे। MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन बनाने वाली अमेरिकी कंपनी जनरल एटॉमिक्स के अनुसार, यह शिकारी ड्रोन 50,000 फीट की ऊंचाई से सीमाओं की निगहबानी कर सकता है। 950 शाफ्ट हॉर्सपावर (712 किलोवाट) के इंजन से यह ड्रोन तेज गति से चलता है। अमेरिकी फर्म के अनुसार, प्रीडेटर ड्रोन या रीपर को मुख्य रूप से जमीन या समुद्र पर मल्टी मिशन इंटेलिजेंस, निगरानी और टोह लेने के लिए बनाया गया है।

यह प्रीडेटर ड्रोन 40 घंटे तक लगातार आसमान में उड़ सकता है। यह एक बार में 442 किलोमीटर की रफ्तार पकड़ सकता है। यह बाज की तरह अपने शिकार पर हमला कर सकता है। आसमान में इसके 66 फीट लंबे पंख इसे बेहद घातक बनाते हैं। MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन के दो वर्जन हैं। एक स्काई गार्जियन और दूसरा समुद्र की देखरेख करने वाला सी गार्जियन। यह अपने साथ 1,746 किलोग्राम वजन तक के बम और मिसाइलें ले जा सकता है। इसमें लगी मिसाइलों का निशाना इतना अचूक होता है कि यह जंगल में भी छिपे दुश्मनों को ध्वस्त कर सकता है। जमीन पर यह ज्यादा ऊंचाई वाले टार्गेट को नष्ट कर सकता है। समुद्र में बेहद गहराई तक मार कर सकता है। अमेरिका ने अफगानिस्तान में रहते हुए तालिबानी आतंकियों को मारने के लिए ऑपरेशन एनाकोंडा चलाया था। इसका इस्तेमाल 2002 में बंकरों में छिपे तालिबानियों को मारने में किया गया था। उस वक्त अमेरिका के एफ-15 और एफ-16 जैसे जंगी विमान भी इन बंकरों को नष्ट करने में विफल हो गए थे। तब यही प्रीडेटर ड्रोन काम आए थे।

भारत-अमेरिका के बीच 25,887 करोड़ रुपए (3.9 बिलियन डॉलर) की डील हुई। इसके तहत अमेरिका भारत को 31 हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोंस देगा। इसमें भारतीय सेना और वायुसेना को 8-8 स्काई गार्जियन ड्रोंस तो भारतीय नौसेना को 15 सी-गार्जियन ड्रोन मिलेंगे।

आखिर देश में कहां सबसे ज्यादा हुए हैं एनकाउंटर?

आज हम आपको बताएंगे कि देश में कहां सबसे ज्यादा एनकाउंटर हुए हैं! महाराष्ट्र के बदलापुर में स्कूल में 2 बच्चियों से रेप के आरोपी अक्षय शिंदे की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई। ठाणे पुलिस ने बताया कि आरोपी अक्षय शिंदे ने पुलिस का हथियार छीनकर गाड़ी में पुलिस पर फायरिंग की। पुलिस की जवाबी फायरिंग में अक्षय शिंदे को गोली लगी। उसे गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इससे पहले हाल ही में सुल्तानपुर डकैती कांड के एक लाख के इनामी अनुज प्रताप सिंह के एनकाउंटर हुआ था। दोनों ही जगहों पर हुए एनकाउंटर के बाद से देश में इसे लेकर सियासत तेज हो गई है। एनकाउंटर का देश में कैसे सिलसिला शुरू हुआ। कैसे यह चलन में आया, जानते हैं एनकाउंटर की पूरी कहानी। देश में पहला रिकॉर्डेड एनकाउंटर आजादी से बहुत पहले 1922 में रंपा विद्रोह के हीरो रहे अल्लूरी सीताराम राजू का किया गया था। जिन्हें अंग्रेजी राज की पुलिस ने मारा था। इस विद्रोह को मनयम विद्रोह भी कहा जाता है, जो तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ जनजातियों का विद्रोह था। यह विद्रोह मद्रास प्रेसीडेंसी में गोदावरी जिले में हुआ था। आंध्र प्रदेश में रंपा विद्रोह की शुरुआत अगस्त, 1922 में हुई थी, जो राजू की मुठभेड़ में मौत यानी मई, 1924 में खत्म हो गई थी। उस वक्त ब्रिटिश पुलिस को राजू को पकड़ने में करीब 40 लाख रुपए खर्च करने पड़े थे। कई महीने तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद आखिरकार राजू को आंध्र के जंगल में पकड़ लिया गया और उन्हें पेड़ से बांध दिया गया। फिर पुलिस टीम ने दूर से उन पर तड़ातड़ गोलियां बरसाकर हत्या कर दी।

आजादी से पहले हैदराबाद के निजाम ने कई आंदोलनों को दबान और अपने खिलाफ विद्रोह करने वाले लोगों का पुलिस एनकाउंटर करवाया था। 1947 में आजादी के बाद आंध्र प्रदेश में अलग तेलंगाना राज्य के गठन को लेकर कई आंदोलन हुए। कई रिपोर्टों के अनुसार, तेलंगाना आंदोलन में शामिल लोगों का राज्य सरकार ने पुलिस का सहारा लेकर कत्लेआम करवाया। माना जाता है कि पुलिस एनकाउंटर में 3,000 लोगों को मार डाला गया। 60 के दशक के बाद से तेलंगाना के गठन तक एनकाउंटर आम ट्रेंड में रहा। पंजाब में जब आतंकवाद पनप रहा था तो उस दौर में एनकाउंटर शब्द काफी चर्चा में रहा था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में 20 मार्च, 2017 से लकर 5 सितंबर, 2024 के बीच 12,964 एनकाउंटर हुए हैं। इनमें से 207 अपराधियों को मार गिराया गया। मुठभेड़ में पुलिस के भी 17 लोगों को भी जान गंवानी पड़ी थी। औसतन हर 13 दिन में एक अपराधी को एनकाउंटर में मौत की नींद सुलाया गया। इन सात सालों से प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अनुसार, भारत में बीते 6 साल में 813 लोगों के एनकाउंटर हुए यानी उन्हें पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया। अप्रैल, 2016 के बाद से 2022 तक औसतन हर तीन दिन पर एक एनकाउंटर को अंजाम दिया गया। कोरोना काल के दौरान मुठभेड़ के मामले कम देखे गए। 2019-20 में यह 112 था, जो 2020-21 में घटकर 82 रह गया। हालांकि, इसके बाद एनकाउंटर में 69.5 फीसदी यानी 139 केस की बढ़ोतरी हुई। सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनिल कुमार सिंह श्रीनेत के अनुसार, एनकाउंटर किलिंग 20वीं सदी से ज्यादा चलन में आया। खासतौर पर मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और गाजियाबाद शहरों में हुई पुलिसिया मुठभेड़ के बाद से यह ज्यादा सुना और देखा गया। ज्यादातर एनकाउंटर अंडरवर्ल्ड और बेरहम हत्यारों के ही होते थे। बाद में इनमें कुछ और इजाफा हुआ। इसमें कई मुठभेड़ फर्जी एनकाउंटर थे तो कई विवादों में फंस गए थे। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) के अनुसार, फर्जी एनकाउंटर्स के मामले सबसे ज्यादा 2002 से 2013 तक हुए।

2016 से लेकर 2022 तक सबसे ज्यादा एनकाउंटर नक्सल प्रभावित इलाके छत्तीसगढ़ में हुए। इसके बाद उत्तर प्रदेश में 110, असम में 79, झारखंड में 52 मुठभेड़ को अंजाम दिया गया। लद्दाख इकलौता है, जहां इन वर्षों में कोई एनकाउंटर नहीं हुआ। गुजरात, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, केरल ऐसे राज्य हैं, जहां बेहद मामूली संख्या में एनकाउंटर हुए। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, यूपी में गैर सरकारी मिशन, जिसे ऑपरेशन लंगड़ा कहा जाता है, इसमें एनकाउंटर को बड़ी संख्या में अंजाम दिया गया। 8,472 एनकाउंटर्स में से 3,300 अपराधी घायल हुए। यानी मुठभेड़ के दौरान इनके पैरों में गोली मारी गई। बाद में एनकाउंटर को शूटआउट, खल्लास जैसे शब्दों से भी नवाजा जाने लगा।

ऐसा नहीं है कि एनकाउंटर सबसे ज्यादा भारत में ही होते हैं। पाकिस्तान में भी बड़े पैमाने पर एनकाउंटर होते हैं। ह्यूमन राइट वॉच की 2015 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पुलिस एनकाउंटर्स में 2,108 एनकाउंटर हुए, जिसमें 7 महिलाएं और 6 बच्चे भी थे। इन एनकाउंटर्स में से सबसे ज्यादा 696 कराची में हुए। इसके बाद सबसे ज्यादा एनकाउंटर पाकिस्तान के पंजाब प्रांत, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में एनकाउंटर्स को अंजाम दिया गया। पाकिस्तान में 2014 से 2018 के बीच 3,345 एनकाउंटर हुए।

सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट अनिल कुमार सिंह श्रीनेत कहते हैं कि एनकाउंटर या ज्यूडिशियल किलिंग का संविधान में कोई उल्लेख नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 21 के अनुसार, हर व्यक्ति को जीवन जीने का मूल अधिकार है। हालांकि, इंडियन पीनल कोड, 1860 के अनुसार, अभी तक सेक्शन 96-106 में कहा गया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में एनकाउंटर को अपराध की कैटेगरी में नहीं रखा जा सकता है। यह कानून देश के हर नागरिक पर लागू होता है, चाहे वो पुलिस हो या आम आदमी। अगर आत्मरक्षा में किसी की जान चली जाती है तो वह अपराध की श्रेणी में नहीं आएगा। बशर्ते यह साबित हो जाए कि हत्या में किसी तरह का कोई मोटिव नहीं था। पुलिस को भी अगर कोई अपराधी भाग रहा है या गोली चला रहा है तो उसे घायल करने का अधिकार है।