Thursday, March 5, 2026
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राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट के जरिए क्या संदेश देना चाहते हैं पीएम मोदी?

आज हम आपको बताएंगे कि राज्यसभा उम्मीदवारों की लिस्ट के जरिए पीएम मोदी क्या संदेश देना चाहते हैं! भारतीय जनता पार्टी ने 15 राज्यों की 56 सीटों पर होने वाले राज्यसभा चुनाव के लिए अब तक उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है उसे देखकर लगता है कि पार्टी ने इस चुनाव के जरिए लोकसभा चुनाव पर भी फोकस किया है। राज्यसभा लिस्ट के लिए पार्टी की ओर से काफी होमवर्क किया गया है। यूपी, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, ओडिशा समेत दूसरे राज्यों की लिस्ट में सामान्य कार्यकर्ताओं से लेकर पार्टी के बड़े नेताओं को मौका दिया गया है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद जिस पैटर्न पर चुनाव हुए उसमें एक बात ऐसी है कि सिर्फ पार्टी के उन बड़े नेताओं को ही राज्यसभा टिकट नहीं मिलेगा जो लोकसभा चुनाव हार गए हैं। पिछले कुछ राज्यसभा चुनाव के उम्मीदवारों में कई बार तो ऐसे नाम सामने आए जिसको लोग घंटों इंटरनेट पर सर्च करते रहे। इस बार भी जो लिस्ट सामने आई है उससे एक बात क्लियर है कि पार्टी अपने कई नेताओं को इस बार लोकसभा चुनाव के मैदान में उतार सकती है। इनमें कुछ बड़े नेता हैं जिनको लेकर कहा जा रहा था कि उन्हें राज्यसभा का टिकट मिलेगा लेकिन ऐसा हुआ नहीं। इसके साथ ही कांग्रेस को भी कमजोर करने की कोशिश पूरी तरह से की गई है। ऐसा लगता है कि जिला और मंडल स्तर तक राज्यसभा चुनाव के लिए बीजेपी पहुंच रही है। पार्टी के कुछ ऐसे नेताओं पर भी दांव लगाया है जो विधानसभा का चुनाव भी नहीं लड़े हैं। कुछ ऐसे नेता हैं जो विधानसभा का चुनाव भी हार चुके हैं। यूपी से अमरपाल मौर्य, संगीत बलवंत, साधना सिंह को उम्मीदवार बनाया गया है। अमरपाल मौर्य रायबरेली के ऊंचाहार से विधानसभा चुनाव लड़े थे लेकिन वह हार गए। संगीता बलवंत गाजीपुर से विधायक रह चुकी हैं लेकिन पिछला चुनाव हार गईं थीं। साधना सिंह जिला उद्योग व्यापार मंडल चंदौली की अध्यक्ष हैं। बिहार से राज्यसभा सीट के लिए धर्मशीला गुप्ता को चुना गया है। उन्होंने कहा कि वह बिहार के भागलपुर में एक कार्यक्रम में व्यस्त थीं तभी उन्हें फोन पर इसकी जानकारी मिली। शुरू में उन्हें लगा कि कोई मजाक कर रहा है और कॉल काट दिया। गुजरात की डायमंड सिटी के प्रतिष्ठित हीरा कारोबारी गोविंद ढोलकिया राज्यसभा जाएंगे। बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया है। गोविंद ढोलकिया पिछले महीने जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की थी, तब वह सुर्खियों में आए थे। उन्होंने राम मंदिर के लिए 11 करोड़ रुपये की धनराशि दान की थी।

केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और पुरुषोत्तम रूपाला गुजरात, केंद्रीय मंत्री नारायण राणे महाराष्ट्र का भी कार्यकाल पूरा हो रहा है। हालांकि पार्टी की ओर से इन नेताओं की राज्यसभा के लिए उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की गई है। ऐसी चर्चा है कि पार्टी इन्हें लोकसभा चुनाव लड़ा सकती है। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी पार्टी द्वारा उच्च सदन के लिए फिर से नामित नहीं किया गया है। हालांकि पार्टी आगामी लोकसभा चुनाव में शिक्षा मंत्री को उनके गृह राज्य ओडिशा से मैदान में उतार सकती है। पार्टी सूत्रों ने कहा है कि प्रधान, रूपाला और मांडविया के अलावा दो अन्य केंद्रीय मंत्रियों, भूपेंद्र यादव और राजीव चंद्रशेखर को भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव में उम्मीदवार बना सकती है। इनमें से किसी को राज्यसभा के मौजूदा दौर के लिए फिर से नामित नहीं किया गया है। प्रधान और यादव दोनों ही राज्यसभा के दो कार्यकाल पूरे कर रहे हैं जबकि चंद्रशेखर का यह तीसरा कार्यकाल है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पूर्व में सुझाव दिया था कि राज्यसभा सदस्यों को कम से कम एक प्रत्यक्ष चुनाव लड़ने का अनुभव मिलना चाहिए। पार्टी में एक राय उभरकर सामने आई है कि अधिक से अधिक केंद्रीय मंत्रियों को लोकसभा चुनाव लड़ना चाहिए, खासकर उन्हें जो राज्यसभा में कम से कम दो कार्यकाल पूरे कर चुके हों।

बीजेपी ने महाराष्ट्र से अशोक चव्हाण को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस में लगभग चार दशक बिताने वाले चव्हाण एक दिन पहले ही मंगलवार को भाजपा में शामिल हुए थे। उन्होंने सोमवार को कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। इसी प्रकार बीजेपी ने आरपीएन सिंह को भी यूपी से राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। आरपीएन सिंह जनवरी 2022 में यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे। उसके बाद से ही उनके राज्यसभा में जाने की चर्चा चल रही थी। वह कांग्रेस और गांधी परिवार के करीबी माने जाते थे। उनको राहुल ब्रिगेड का हिस्सा माना जाता था। इसके अलावा कांग्रेस छोड़कर एनडीए में आए कुछ और कांग्रेसी नेताओं को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है। इनमें महाराष्ट्र कांग्रेस के बड़े नेता मिलिंद देवड़ा हैं जो हाल ही में शिवसेना में शामिल हुए थे। उन्हें शिवसेना ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। इसी प्रकार प्रफुल्ल पटेल को अजित पवार गुट ने राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह शरद पवार के काफी करीबी रहे हैं। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बीजेपी की ओर से कांग्रेस पर करारी चोट की गई है।

यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश इन राज्यों के अलावा दूसरे राज्यों में जाति समीकरण का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मध्य प्रदेश की लिस्ट देखें तो उमेश नाथ महराज, उज्जैन के वाल्मीकि आश्रम के प्रमुख पुजारी हैं। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी शीर्ष नेतृत्व के करीबी माने जाते हैं। माया नरोलिया, मध्य प्रदेश भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष हैं और ओबीसी समुदाय से आती हैं। बंसीलाल गुर्जर, मंदसौर से आते हैं, वर्तमान में भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं और ओबीसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। बीजेपी महाराष्ट्र में किसान और ब्राह्मण समुदाय को साधने की कोशिश कर रही है। अशोक चव्हाण, उनके नामांकन को कोई आश्चर्य नहीं है क्योंकि ये उस डील का हिस्सा माना जाता है जो उन्होंने भाजपा में शामिल होने के समय की थी। मेधा कुलकर्णी, पुणे से भाजपा की जानी-मानी ब्राह्मण चेहरा हैं। वो 2014-2019 तक कोथरुड विधानसभा सीट से विधायक रहीं और अब भाजपा महिला मोर्चा की उपाध्यक्ष हैं। अजीत गोपचड़े, मराठवाड़ा के नांदेड़ जिले से आते हैं और लिंगायत समुदाय से ताल्लुक रखते हैं।

जब मुस्लिम देश में बना हिंदू मंदिर!

हाल ही में मुस्लिम देश में एक हिंदू मंदिर बन चुका है! अबू धाबी में पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किया गया पहला हिंदू मंदिर अपने आप में अद्भुत है। बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था की तरफ से निर्मित इस मंदिर के बनने में करीब 6 साल का वक्त लगा है। 27 एकड़ क्षेत्र में बने इस मंदिर को बनाने में करीब 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। ये मंदिर कई मायनों में अनोखा है। इसे शिल्प और स्थापत्य शास्त्रों एवं हिंदू ग्रंथों में उल्लेखित निर्माण की प्राचीन शैली के अनुसार भव्य बनाया गया है। इस मंदिर का निर्माण नागर शैली में किया गया है। अयोध्या में बने राम मंदिर का निर्माण भी नागर शैली में ही किया गया है। नागर शैली में बने इस मंदिर की कई खासियत है। 27 एकड़ में बने इस मंदिर के निर्माण में कुल 700 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मंदिर के कुल 7 शिखर हैं। 12 समरान हैं। 2 मंडप। 410 स्तंभ हैं। ये मंदिर 108 फीट लंबा है। BAPS मंदिर 262 फीट लंबा है। मंदिर की चौड़ाई 180 फीट है। मंदिर के निर्माण के लिए 30 हजार से ज्यादा पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है। कुल 27 एकड़ का कैंपस है। 50 हजार क्यूबिक फीट इटालियन मार्बल का इस्तेमाल किया गया है। 1.8 लाख क्यूबिक फीट इंडियन बलुआ पत्थर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर के निर्माण में कुल 1.8 लाख ईंटों का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर में ‘वॉल ऑफ हार्मनी’ बनाया गया है। ये UAE में सबसे बड़ा 3डी प्रिटेंड दीवार है। इसके लिए दाऊदी बोहरा समुदाय ने पैसे दिए।ये दुनिया की बेहतरीन मंदिरों में से एक है। मंदिर में पौराणिक और आधुनिक भाषाओं में सौहार्द का संदेश है। मंदिर के 7 शिखरों पर अक्षर पुरुषोत्तम, राधा-कृष्ण, सीता-राम, पार्वती-शंकर, जगन्नाथ, पद्मावती श्रीनिवास और अयप्पा स्वामी की मूर्ति लगी है।

मंदिर में हजारों भगवान की आकृति के साथ-साथ गाय, हाथी, बैल, ऊंट, बाज, ओमानी आदि की आकृति दीवारों पर अंकित है। संयुक्त अरब अमीरात में अत्यधिक तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं को गर्मी में भी इन टाइल पर चलने में दिक्कत नहीं होगी। मंदिर में अलौह सामग्री का भी प्रयोग किया गया है। वास्तुशिल्प पद्धतियों को वैज्ञानिक तकनीकों के साथ जोड़ा गया है। तापमान, दबाव और गति भूकंपीय गतिविधि को मापने के लिए मंदिर के हर स्तर पर 300 से अधिक उच्च तकनीक वाले सेंसर लगाए गए हैं। सेंसर अनुसंधान के लिए लाइव डेटा प्रदान करेंगे। यदि क्षेत्र में कोई भूकंप आता है तो मंदिर इसका पता लगा लेगा और हम अध्ययन कर सकेंगे। मंदिर के निर्माण में किसी भी धातु का उपयोग नहीं किया गया है और नींव को भरने के लिए कंक्रीट मिश्रण में 55 प्रतिशत सीमेंट की जगह राख का उपयोग किया गया है। मंदिर निर्माण में परंपरागत सौंदर्य वाली पत्थर संरचनाओं और आधुनिक समय के शिल्प को मिलाते हुए तापमान रोधी सूक्ष्म टाइल्स और कांच के भारी पैनलों का इस्तेमाल किया है। यूएई में अत्यधिक तापमान को देखते हुए ये टाइल्स दर्शनार्थियों के पैदल चलने में सुविधाजनक होंगी।

20 हजार टन से अधिक चूना पत्थर के टुकड़ों को राजस्थान में तराशा गया और 700 कंटेनर में अबू धाबी लाया गया। अप्रैल 1997 को प्रमुख स्वामी महाराज ने इस मंदिर के निर्माण की परिकल्पना की। फरवरी 2018 में अबू धाबी के शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान मंदिर निर्माण के लिए जमीन दान की। अप्रैल 2019 में मंदिर का शिलान्यास महंत स्वामी महाराज ने किया। फरवरी 2024 को महंत स्वामी महाराज और पीएम नरेंद्र मोदी ने मंदिर का उद्घाटन किया। बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था एक सामाजिक-आध्यात्मिक हिंदू संस्था है जिसकी जड़ें वेदों में हैं। इसकी स्थापना स्वामी श्रीकृष्णानंद स्वामी 1781-1830 ने 18वीं शताब्दी के अंत में की थी और फिर 1907 में शास्त्रीजी महाराज 1865-1951 ने इसे आगे बढ़ाया। मंदिर के 7 शिखरों पर अक्षर पुरुषोत्तम, राधा-कृष्ण, सीता-राम, पार्वती-शंकर, जगन्नाथ, पद्मावती श्रीनिवास और अयप्पा स्वामी की मूर्ति लगी है।यह सीधी-सादी आध्यात्मिकता के सिद्धांतों पर आधारित है। BAPS आध्यात्मिक, नैतिक और सामाजिक चुनौतियों को दूर करने का काम करता है। इसकी शक्ति इसकी पवित्रता और उद्देश्य में ही निहित है। बीएपीएस समाज, परिवारों और व्यक्तियों की देखभाल करके दुनिया की देखभाल करता है। BAPS लोगों की सेवा करता है। चाहे उनकी जाति, धर्म, रंग या देश कुछ भी हो। BAPS के दुनियाभर में 3,300 से अधिक केंद्र हैं। इस संस्थान के कामों को कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले हैं। संयुक्त राष्ट्र भी इसके काम की सराहना करता है। शराब, व्यसन, व्यभिचार, मांसाहार और शरीर-मन की अशुद्धता से दूर रहना – ये उनकी पांच आजीवन प्रतिज्ञाएं हैं।

आखिर किसे दिया जाता है भारत रत्न का सम्मान? जानिए पूरी प्रक्रिया!

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जननायक कहे जाने वाले श्री कर्पूरी ठाकुर जी, लालकृष्ण आडवाणी, डॉक्टर स्वामीनाथन, चौधरी चरण सिंह एवं पीवी नरसिंहराव को भारत रत्न देने की बात कही थी, जिसके बाद जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी के बीच में सामंजस स्थापित होने लगा है…. लेकिन एक सवाल इसी बीच यह उठता है कि आखिर भारत रत्न किसे दिया जाता है? उसके लिए क्या योग्यताएं होनी चाहिए और भारत रत्न प्राप्त करने वाले व्यक्ति को क्या-क्या सुविधा मिलती है? तो आज हम इसी संदर्भ में संपूर्ण जानकारी देने वाले हैं!

आपको बता दें कि भारत रत्न देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है जो किसी क्षेत्र में असाधारण और सर्वोच्च सेवा को मान्‍यता देने के लिये दिया जाता है…. यह सम्मान राजनीति, कला, साहित्‍य, विज्ञान के क्षेत्र में किसी विचारक, वैज्ञानिक, उद्योगपति, लेखक और समाजसेवी को दिया जाता है… बता दें कि भारत रत्न देने की शुरुआत 2 जनवरी, 1954 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद ने की थी…. उस समय सबसे पहला सम्मान स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन और वैज्ञानिक डॉक्टर चंद्रशेखर वेंकट रमन को 1954 में दिया गया था…. बता दें कि 1954 में ये सम्मान केवल जीवित रहते ही दिया जाता था, लेकिन 1955 के बाद मरणोपरांत भी भारत रत्न दिये जाने का प्रावधान जोड़ा गया… भारत रत्न प्राप्त करने वालों की आधिकारिक घोषणा भारत के राजपत्र में अधिसूचना जारी कर की जाती है. यह सम्मान हर साल 26 जनवरी को दिया जाता है…. आई अब आपको बताते हैं कि भारत रत्न के लिए सम्मानप्राप्ती को चुनने की प्रक्रिया क्या होती है… तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत रत्न सम्मान के लिए चुने जाने की प्रक्रिया पद्म पुरस्कारों से अलग होती है. इसमें भारत के प्रधानमंत्री भारत रत्न के लिए किसी व्यक्ति के नाम की सिफ़ारिश राष्ट्रपति को करते हैं…. भारत रत्न के लिए किसी औपचारिक सिफ़ारिश की ज़रूरत नहीं होती…. कोई भी व्यक्ति जाति, पेशा, पद या लिंग के आधार पर अंतर किए बिना इस पुरस्कार के लिए योग्य माना जा सकता है…. बता दें कि एक साल में सिर्फ़ तीन भारत रत्न ही दिए जाते हैं. साथ ही ये भी ज़रूरी नहीं कि हर साल भारत रत्न सम्मान दिया ही जाए…. अब तक कुल 48 लोगों को भारत रत्न सम्मान दिया गया है. आख़िरी बार ये सम्मान साल 2019 में दिया गया था…. 2019 में समाज सेवा के क्षेत्र में नानाजी देशमुख मरणोपरांत, कला क्षेत्र में डॉक्टर भूपेन हजारिका मरणोपरांत और लोक-कार्य के लिए भारत के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया था….आइए अब आपको बताते हैं कि भारत रत्न प्राप्त करने वाले व्यक्ति को क्या-क्या मिलता है? तो आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत रत्न पाने वालों को भारत सरकार की ओर से एक प्रमाणपत्र और एक मेडल दिया जाता है. इस सम्मान के साथ कोई धनराशि नहीं दी जाती, इसे पाने वालों को सरकारी महकमे सुविधाएं मुहैया कराते हैं. उदाहरण के लिए भारत रत्न पाने वालों को रेलवे की ओर से मुफ़्त यात्रा की सुविधा मिलती है.. भारत रत्न पाने वालों को अहम सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए न्योता मिलता है…. सरकार वॉरंट ऑफ़ प्रेसिडेंस में उन्हें जगह देती है. जिन्हें भारत रत्न मिलता है उन्हें प्रोटोकॉल में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, पूर्व राष्ट्रपति, उपप्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, लोकसभा अध्यक्ष, कैबिनेट मंत्री, मुख्यमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और संसद के दोनों सदनों में विपक्ष के नेता के बाद जगह मिलती है…. वॉरंट ऑफ़ प्रेसिडेंस का इस्तेमाल सरकारी कार्यक्रमों में वरीयता देने के लिए होता है…. राज्य सरकारें भारत रत्न पाने वाली हस्तियों को अपने राज्यों में सुविधाएं उपलब्ध कराती हैं…. इस सम्मान को अपने नाम से पहले या बाद में जोड़ा नहीं जा सकता. हालांकि, इसे पाने वाले अपने बायोडेटा, लेटरहेड या विज़िटिंग कार्ड जैसी जगहों पर ये लिख सकते हैं कि – ‘राष्ट्रपति द्वारा भारत रत्न से सम्मानित’ या ‘भारत रत्न प्राप्तकर्ता’….

आइए अब आपको बताते हैं कि आखिर भारत रत्न कैसा दिखाई दिखता है? तो आपको बता दे कि मेडल में तांबे के बने पीपल के पत्ते पर प्लैटिनम का चमकता सूर्य बना हुआ होता है… पत्ते का किनारा भी प्लैटिनम का होता है. इसके नीचे चांदी से हिंदी में भारत रत्न लिखा होता है….इसके पीछे की तरफ़ अशोक स्तंभ के नीचे हिंदी में सत्यमेव जयते लिखा होता है! तो यह है हमारे देश का सबसे सम्मानीय पुरस्कार, भारत रत्न पुरस्कार… आपको भारत रत्न पुरस्कार और उसे प्राप्त करने की विधि के बारे में जानकारी पाकर कैसा लगा, अपना जवाब हमारे कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा!

आखिर गणतंत्र दिवस पर कैसे किया जाता है मुख्य अतिथियों का चयन? क्या होती है प्रक्रिया?

हाल ही में हमारे देश के द्वारा 75वां गणतंत्र दिवस मनाया गया… इस दौरान कई प्रकार की झांकियां कर्तव्य पथ पर नजर आई, साथ ही साथ इस बार गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उपस्थित रहे… लेकिन एक सवाल कि आखिर इन मुख्य अतिथियों का चयन कौन करता है और इसकी प्रक्रिया क्या होती है? तो आज हम आपको इसी बारे में जानकारी देने वाले हैं!

आपको बता दें कि देश इस बार अपना 75वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। इस राष्ट्रीय पर्व को खास बनाने के लिए इस बार कई बदलाव किए गए। जहां गणतंत्र दिवस की थीम महिलाओं को केंद्र में रखते हुए बनाई गई तो वहीं परेड और झाकियों में भी महिला प्रतिनिधित्व रहा। इस बार के समारोह के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि रहे। इससे पहले 2023 में मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी हमारे मुख्य अतिथि थे। यानी हर साल हर देश के प्रमुख को गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में चुना जाता है… आइए अब आपको बताते हैं कि यह प्रक्रिया कैसे निभाई जाती है? तो आपको बता दें कि यह प्रक्रिया आयोजन से करीब छह महीने पहले शुरू हो जाती है। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान विदेश मंत्रालय शामिल रहता है। किसी भी देश को निमंत्रण देने के लिए सबसे पहले यह है देखा जाता है कि भारत और संबंधित अन्य राष्ट्र के बीच मौजूदा संबंध कितने अच्छे हैं। इसका निर्णय देश के राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और वाणिज्यिक हितों को भी केंद्र में रख कर लिया जाता है। पहले विदेश मंत्रालय संभावित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करता है और फिर इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित मुख्य अतिथि की उपलब्धता देखी जाती है। अगर उनकी उपस्थिति उपलब्ध हैं तो भारत आमंत्रित देश के साथ आधिकारिक संचार करता है। जानकारी के लिए बता दें कि 26 जनवरी 1950 को भारत के पहले गणतंत्र दिवस समारोह से ही इसमें मुख्य अतिथियों को आमंत्रित करने की शुरुआत हुई थी। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड के पहले मुख्य अतिथि थे।  आइए अब आपको बताते हैं कि हमारे देश के मुख्य अतिथि कौन-कौन से देश रहे हैं? तो आपको बता दें कि इतिहास की तरफ देखें तो 1950-1970 के दशक के दौरान भारत ने गुटनिरपेक्ष आंदोलन और पूर्वी ब्लॉक से जुड़े कई देशों को अतिथि बनाया। दो बार 1968 और 1974 में ऐसा हुआ जब भारत ने एक ही गणतंत्र दिवस पर दो देशों देशों के मुख्य अतिथि को आमंत्रित किया गया। 11 जनवरी 1966 को ताशकंद में प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के निधन के कारण कोई निमंत्रण नहीं भेजा गया था। इंदिरा गांधी ने गणतंत्र दिवस से केवल दो दिन पहले यानी 24 जनवरी 1966 को शपथ ली थी। 2021 और 2022 में भी भारत में कोरोना महामारी के कारण कोई मुख्य अतिथि नहीं था। भारत ने सबसे ज्यादा 36 एशिया एशिआई देशों को समारोह में अतिथि बनाया है। इसके बाद यूरोप के 24 देश और अफ्रीका के 12 देश गणतंत्र दिवस में हमारे मेहमान बने हैं। वहीं दक्षिण अमेरिका के पांच देश, उत्तरी अमेरिका के तीन और ओशिनिया क्षेत्र के एकलौते देश का भारत ने आतिथ्य किया है। बता दें कि 2024 के गणतंत्र दिवस समारोह के लिए भारत ने फ्रांस को अतिथि देश बनाया। यहां के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों 75वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि रहे। परेड में फ्रांस की 95 सदस्यीय मार्चिंग टीम और 33 सदस्यीय बैंड दल ने भी शिरकत किया। भारतीय वायु सेना के विमानों के साथ एक मल्टी रोल टैंकर ट्रांसपोर्ट विमान और फ्रांसीसी वायुसेना के दो राफेल लड़ाकू जेट ने भी फ्लाई-पास्ट में हिस्सा लिया। अतिथि देश का चयन रणनीतिक, आर्थिक और राजनीतिक हितों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के बाद ही किया जाता है। यूं कहें कि गणतंत्र दिवस परेड के मुख्य अतिथि का निमंत्रण भारत और आमंत्रित व्यक्ति के देश के बीच मैत्रीपूर्ण सबंधों की मिशाल माना जाता है।

तो यह थी वह प्रक्रिया जिसके माध्यम से हमारा देश हर साल गणतंत्र दिवस पर अन्य देशों को मुख्य अतिथि बनता है…विदेश मंत्रालय शामिल रहता है। किसी भी देश को निमंत्रण देने के लिए सबसे पहले यह है देखा जाता है कि भारत और संबंधित अन्य राष्ट्र के बीच मौजूदा संबंध कितने अच्छे हैं। इसका निर्णय देश के राजनीतिक, आर्थिक, सैन्य और वाणिज्यिक हितों को भी केंद्र में रख कर लिया जाता है। पहले विदेश मंत्रालय संभावित उम्मीदवारों की एक सूची तैयार करता है और फिर इसे मंजूरी के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भेजा जाता है। इसके बाद संबंधित मुख्य अतिथि की उपलब्धता देखी जाती है। आपको यह जानकारी कैसी लगी, अपना जवाब हमारे कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा!

आखिर क्यों बंद किया गया PAYTM? जानिए क्या-क्या हो सकते हैं नुकसान?

हाल ही में रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया के द्वारा पेटीएम पेमेंट बैंक को बंद कर दिया गया है… जिसके बाद कई सवाल उठने लगे कि आखिर व्यापारी वर्ग एवं सामान्य वर्ग का क्या होगा? जिन लोगों ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शंस की हुई है, आखिर उनका क्या होगा? जिनके अकाउंट में पैसे हैं, उनका क्या होगा? और 29 फरवरी बाद क्या पेटीएम पूरी तरह बंद हो जाएगा या नहीं? तो आज हम आपको इन्हीं सब सवालों के जवाब देने वाले हैं!

आपको बता दें कि फिनटेक कंपनी पेटीएम के दिन खराब चल रहे हैं. निवेशकों के हजारों करोड़ डूब गए हैं. मामला ये है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर प्रतिबंध लगाने का ऐलान किया है और आरोप भी गंभीर हैं. RBI के ऐलान के बाद एजेंसियां पेटीएम के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू कर सकती है. लेकिन बड़ा सवाल लोगों के मन में ये बना हुआ है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पेटीएम अचानक से RBI की रडार पर आ गया… तो इसका जवाब देते हुए आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने कहा कि दिशा-निर्देशों की लगातार अनदेखी के कारण पेटीएम के खिलाफ ये कार्रवाई की गई, उससे पहले paytm को सुधारात्मक कार्रवाई के लिए पर्याप्त समय भी दिया गया था। लेकिन लेकिन पेटीएम में कोई सुधार नहीं आया… आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने पेटीएम का नाम लिए बिना कहा कि यदि दिए गए समय के दौरान सभी चीजों का अनुपालन किया गया होता, तो केंद्रीय बैंक किसी विनियमन वाली इकाई के खिलाफ कार्रवाई क्यों करता।  यही नहीं दास ने कहा कि पेटीएम मामले को लेकर व्यवस्था के बारे में चिंता की कोई बात नहीं, हम केवल भुगतान बैंक के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हमारा जोर हमेशा आरबीआई के नियामकीय दायरे में आने वाली इकाइयों के साथ द्विपक्षीय गतिविधियों पर होता है। हमारा ध्यान इकाई को सही कदम उठाने के लिए प्रोत्साहित करने पर होता है। उन्होंने कहा कि जब बैंक और NBFC प्रभावी कदम नहीं उठाते हैं, हम कारोबार से संबंधित पाबंदियां लगाते हैं। यानी यह की पेटीएम के द्वारा आरबीआई के नियमों का पालन नहीं किया गया था, जिसकी वजह से यह सख्त कदम उठाया गया… आइए अब जानते हैं कि पेटीएम बंद होने से क्या-क्या समस्याएं उत्पन्न हो सकती है और उनके हल क्या है? तो आपको बता दें कि पेटीएम के उपभोक्ता 29 फरवरी के बाद भी एप पर मिलने वाली सभी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। यह बंद नहीं होगा। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा, कार्रवाई सिर्फ पेटीएम पेमेंट्स बैंक पर की गई है। पेटीएम एप पर आरबीआई के निर्देशों का कोई प्रभाव नहीं है।  यानी भारतीय रिजर्व बैंक ने पेटीएम पेमेंट्स बैंक लिमिटेड को किसी भी ग्राहक के खाते, प्रीपेड साधन, वॉलेट एवं फास्टैग आदि में 29 फरवरी, 2024 के बाद जमा या टॉप-अप स्वीकार करने से रोक लगायी है… मतलब यह कि आप 29 फ़रवरी के बाद पेटीएम पेमेंट बैंक में ना तो जमा कर सकते हैं, ना ही पैसा निकाल सकते हैं… साथ ही साथ पेटीएम वॉलेट का भी प्रयोग नहीं कर सकते एवं गाड़ियों पर लगने वाले फास्ट टैग का भी प्रयोग नहीं कर सकते… अब सवाल यह कि आखिर पेटीएम में किन-किन चीजों का प्रयोग हो सकता है… तो आपकी जानकारी के लिए बता दे कि आरबीआई के द्वारा पेटीएम पेमेंट बैंक बंद किया जा रहा है, ना कि पेटीएम एप…. पेटीएम एप जिस तरीके से चला था, वह वैसे ही चलता रहेगा… इसमें आप रिचार्ज, किसी भी प्रकार का बिल भुगतान, एवं संबंधित सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं… इसके लिए आप पेटीएम से अपनी यूपीआई आईडी, किसी भी बैंक के अकाउंट से जोड़ सकते हैं और उसका भुगतान कर सकते हैं… आइए अब बताते हैं कि पहले और अब में क्या अंतर होने वाला है…. तो आपको बता दे कि पहले पेटीएम में पेटीएम पेमेंट बैंक से खाता जोड़ा जाता था.. लेकिन अब आप एसबीआई, सीबीआई या किसी अन्य बैंक से अपना खाता, पेटीएम से जोड़ सकते हैं और सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं… पहले paytm वॉलेट चलता था, अब यह वॉलेट नहीं चलेगा… पहले गाड़ियों पर फर्स्ट टैग लग जाया करता था… लेकिन अब गाड़ियों पर पेटीएम का फास्टैग काम नहीं करेगा…. यानी सीधी से बात यह है कि केंद्रीय बैंक के द्वारा पेटीएम पेमेंट बैंक बंद किया गया है, ना कि पेटीएम एप… यह जानकारी आपको कैसी लगी, अपना जवाब हमारे कमेंट बॉक्स में जरूर दीजिएगा!

क्या साइबर ठगी से देश में हो रहा है स्पैम?

वर्तमान में साइबर ठगी से देश में स्पैम हो रहा है! भारत में प्रवर्तन निदेशालय ने एक आइरिश महिला की ओर से दी गई शिकायत पर जांच शुरू कर दी। इस शिकायत के आधार पर बिहार और पश्चिम बंगाल में कई तलाशी अभियान चलाए गए, जिसमें साइबर अपराधियों के एक गिरोह का पता चला। ये अपराधी, जिनमें ज्यादातर स्कूल ड्रॉपआउट लड़के हैं जो फर्राटेदार ब्रिटिश अंग्रेजी बोलते हैं, यूके और आयरलैंड में लोगों को ठग रहे थे। उनके काम करने का तरीका यह है कि वे लोगों के फोन और कंप्यूटर को दूर से नियंत्रित करते हैं और उनके बैंक खातों से करोड़ों रुपये अपने खातों में ट्रांसफर कर लेते हैं।पटना, खड़गपुर और कोलकाता में तलाशी के दौरान, अपराधियों द्वारा संचालित एक 70 सीटों वाले कॉल सेंटर का पता चला। इस कॉल सेंटर ने कम से कम 40 लोगों को ठगा था। जांच तब शुरू हुई जब आयरिश महिला को आयरलैंड में ब्रॉडबैंड सेवा प्रदाता Eircom Telecom की ‘स्टेफ़नी’ नाम से किसी व्यक्ति का फोन आया। आरोपी, जिसकी बाद में नीतेश कुमार के रूप में पहचान हुई पटना के एक गेस्ट हाउस से काम कर रहा था। उसे अपने कमरे से भागने से पहले ही पकड़ लिया गया।

कोलकाता और खड़गपुर में आगे की तलाशी में पांच लैपटॉप, 16 मोबाइल हैंडसेट, 56 क्रेडिट/डेबिट कार्ड और 69 बैंक खाते जब्त किए गए। इसके अतिरिक्त, लगभग 2 करोड़ रुपये की नकदी भी मिली। ईडी ने बाद में आरोपी के बैंक खातों से 2.8 करोड़ रुपये जब्त किए। यह भी पता चला कि गिरोह का सरगना सागर यादव खड़गपुर में दो अवैध कॉल सेंटर चला रहा था। आरोपी पीड़ितों के बैंक खातों को उनके फोन/कंप्यूटर पर दूर से नियंत्रित करते थे और फिर पैसे को यूके और आयरलैंड में अपने विदेशी सहयोगियों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर देते थे। ये सहयोगी तब पैसे निकालते थे और इसे वेस्टर्न यूनियन और मनीग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भारत में ट्रांसफर करते थे। एक बार जब पैसा भारतीय बैंक खातों में पहुंच जाता था तब उन्हें नकद में निकाल लिया जाता था।

यह मामला पहली बार है जब विदेशों में दर्ज मामले में केंद्रीय एजेंसी द्वारा धन शोधन निवारण अधिनियम पीएमएलए के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह अपराध दूसरे देश में किया गया था और बाद में आय को भारत में ट्रांसफर कर दिया गया था। ईडी ने अक्टूबर 2023 में एक ईसीआईआर दर्ज किया, जो पुलिस प्राथमिकी के समकक्ष है, जब इसे सीबीआई के माध्यम से आयरिश अधिकारियों द्वारा भारत भेजा गया था। यही नहीं लोन सेटलमेंट के नाम पर एक महिला से साइबर ठगी के आरोप में रोहिणी साइबर पुलिस ने नोएडा, गाजियाबाद से तीन ठगों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान गाजियाबाद निवासी 23 वर्षीय सुमित कुमार, 24 वर्षीय अंकित कुमार और नोएडा निवासी 23 वर्षीय अंकित कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आरोपियों के पास से वारदात के लिए इस्तेमाल मोबाइल फोन, एक चेक बुक, एक पासबुक जब्त की है।

पुलिस अफसर के मुताबिक, रोहिणी सेक्टर 4 निवासी अनीता ने 62,000 की साइबर ठगी के बारे में शिकायत दी थी। पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसके मोबाइल पर एक दिन मेसेज आया। दावा किया कि वह लोन की ईएमआई का भुगतान करने में विफल रही हैं और इसके लिए कंपनी की तरफ से टीम घर पर विजिट करेगी। पीड़िता नहीं चाहती थी कि कोई उनके घर आए। इसलिए, अमाउंट का भुगतान ऑनलाइन करने का अनुरोध किया। इस पर कथित आरोपी ने एकमुश्त भुगतान करके अपना लोन 62000 चुकाने को कहा। उसने बैंक डिटेल भी शेयर की। पीड़िता ने यह रकम ट्रांसफर कर दी। पीड़िता ने जेस्ट मनी की हेल्पलाइन से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि उन्हें कोई भुगतान नहीं मिला है। जिसके बाद पीड़िता को ठगी का अहसास हुआ। मामले में रोहिणी साइबर सेल ने मामला दर्ज किया। जांच शुरू की। पुलिस ने उन खातों के मनी ट्रेल की डिटेल खंगाली जिसमें पैसा भेजा गया था। पता चला कि यह पैसा गाजियाबाद निवासी सुमित कुमार नाम के अकाउंट में ट्रांसफर हुआ था। टीम ने केस की तफ्तीश करते हुए गाजियाबाद से सुमित और उसके दो साथियों को गिरफ्तार कर लिया।

पूछताछ में पता चला कि अंकित शर्मा एक कॉल सेंटर में काम करता था और उसके पास ग्राहकों के बारे में जानकारी थी। वह उनसे वॉट्सऐप पर चैट करता था और उन्हें उनकी बकाया लोन के एकमुश्त निपटान का विकल्प देता था। इसके बाद उन्हें समझाने के बाद दिए गए बैंक खाते में पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहता था। उसका सहयोगी सुमित कुमार भी पीड़ितों से अपने बैंक खाते में पैसे लेता था। मामले में अब तक चार अन्य पीड़ितों की भी पहचान हो चुकी है। पुलिस पता लगा रही है कि और कितनों को आरोपियों ने इसी तरह ठगा है।

आखिर कैसा रहा दिल्ली का कथालोक उत्सव?

हाल ही में दिल्ली में एक कथालोक उत्सव हुआ था! हम सब का बचपन दादी-नानी की कहानियां सुनकर बीता है। लेकिन कहानी सुनाने की विधा सिर्फ बचपन तक ही सीमित नहीं है। यह कला की एक अलग विधा है, जो किस्सागोई के नाम से दुनियाभर में जानी जाती है। किस्सागोई का एक ऐसा ही फलक गत शनिवार- रविवार को दिल्ली में नजर आया, जहां किस्सागोई पर आधारित दो दिन का उत्सव ‘कथालोक’ का आयोजन हुआ। उत्सव में नामचीन कथाकारों, साहित्य प्रेमियों और दास्तानगोई कहानी सुनाने की विधा की नई प्रतिभाओं के संगम का मंच बना। इस उत्सव का आयोजन आजादी का अमृत महोत्सव, केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग और समन्वय से ‘समय यान’ की ओर से किया गया। इस मौके पर अभिनेता और कलाकार आदित्य ओम ने कहानियों की परिवर्तनकारी भूमिका पर व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। उत्सव में अपने खास फन के लिए जानी जाने वाली फौजिया दास्तानगो की उर्दू प्रस्तुति ‘दास्तान-ए-राम’, दानिश हुसैन की प्रस्तुति ‘तिलिस्मी दास्तानें’ और मनु सिकंदर ढींगरा की ओर से प्रस्तुत पंजाब की कालजयी प्रेम कथा ‘किस्सा हीर वारिस शाह’ की पेशकश हुई।

आयोजन के दौरान एक ओपन माइक सत्र का भी आयोजन किया गया, जिसमें दर्शकों को अपनी कहानियां सुनाने का मौका दिया गया। इस दौरान एक प्रतियोगिता का आयोजन 75 कॉलेज स्टूडेंट्स ने हिस्सा लिया। जिसमें तीन पुरस्कार भी दिए गए। उत्सव के दौरान एक ओपन सेशन का का आयोजन भी हुआ, जिसमें दर्शकों को अपनी कहानियां सुनाने का मौका मिला। इसमें बतौर विशिष्ट अतिथि बीजेपी प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भाग लिया, जहां उन्होंने उन्होंने भारतीय राजनीति के कुछ दिलचस्प किस्से सुनाए। वहीं रेडियो विधा से जुड़े जमशेद सिद्दीकी ने वैदिककल से लेकर आज तक की भारतीय संगीत यात्रा को एक कहानी रूप में पिरोकर पेश किया। जिसे संतूर वादक और संगीतकार पं अभय सोपोरी और उनकी टीम ने संगीत में ढाला। यही नहीं आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के खजुराहो में 50वां डांस फेस्टिवल की शुरुआत 20 फरवरी से हो रही है। यह 26 फरवरी तक चलेगा। इस बार खजुराहो में समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ-साथ रोमांच भी भरपुर मिलेगा। संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत के उत्सव की शुरुआत खजुराहो नृत्य महोत्सव के रूप में होने जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बुंदेलो की धरती पर देशभर से पधारने वाले प्रतिष्ठित लोक नर्तक अपनी घुंघरुओं की झंकार और कदमताल से छटा बिखेरेंगे। इसमें अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के कलाकार अपनी नृत्यों की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। इस वर्ष भी देश के ख्यातिलब्ध प्रतिष्ठित कलाकार शिरकत कर रहे हैं।1975 में शुरू हुआ खजुराहो नृत्य महोत्सव इस वर्ष अपना स्वर्ण जंयती वर्ष मना रहा है। इस उपलब्धि को खास और यादगार बनाने के लिए कथक कुंभ का आयोजन किया जा रहा है।

मंत्री ने कहा कि 20 फरवरी को 1500-2000 कलाकार सामूहिक रूप से कथक कुंभ में भाग लेंगे। वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, पर्यटन विभाग के प्रमुख सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि खजुराहो डांस फेस्टिवल को शुरू करने का उद्देश्य शास्त्रीय नृत्यों का संरक्षण ही नहीं, शास्त्रीय नृत्य कला के जरिए परमोत्कर्ष की अनुभूति कला रसिकों को करवाने और इससे जुड़े सभी कलाकारों को प्रोत्साहित करना है। विश्व रिकॉर्ड के अलावा महोत्सव में पहली बार लयशाला का आयोजन होगा। इसमें भारतीय नृत्य शैलियों के अपनी विधा के श्रेष्ठ गुरूओं के साथ शिष्यों का संगम और कार्यशालाएं होंगी। शुक्ला ने कहा कि यह देश का अत्यंत ख्यातिलब्ध समारोह है।यही नहीं आपको बता दें कि मध्य प्रदेश के खजुराहो में 50वां डांस फेस्टिवल की शुरुआत 20 फरवरी से हो रही है। यह 26 फरवरी तक चलेगा। इस बार खजुराहो में समृद्ध संस्कृति और विरासत के साथ-साथ रोमांच भी भरपुर मिलेगा। संस्कृति और पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने बताया कि देश की समृद्ध संस्कृति और विरासत के उत्सव की शुरुआत खजुराहो नृत्य महोत्सव के रूप में होने जा रहा है। इसमें अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों के कलाकार अपनी नृत्यों की प्रस्तुतियां दे चुके हैं। इस वर्ष भी देश के ख्यातिलब्ध प्रतिष्ठित कलाकार शिरकत कर रहे हैं।

खजुराहो नृत्य समारोह में अब तक भारत की सभी प्रमुख शास्त्रीय नृत्य शैलियों जैसे भरतनाट्यम, ओडीसी, कथक, मोहिनीअटेम, कुचिपुड़ी, कथकली, यक्षगान, मणिपुरी आदि के युवा और वरिष्ठ कलाकार अपनी कला की आभा बिखेर चुके हैं।

क्या पहले से अलग है इस बार का किसान आंदोलन?

इस बार का किसान आंदोलन पहले से बहुत अलग है! 2 साल बाद एक बार फिर किसान सड़कों पर उतरे हैं। किसानों के दिल्ली चलो विरोध मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को अंबाला में शंभू बॉर्डर पर लगाए गए बैरिकेड को तोड़ने की कोशिश की, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए हरियाणा पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े। शंभू बॉर्डर के पास उस समय स्थिति बिगड़ गई जब किसानों ने सीमेंट से बने अवरोधक हटाने के लिए ट्रैक्टर इस्तेमाल किए। ये अवरोधक प्रदर्शनकारी किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए घग्गर नदी पुल पर हरियाणा पुलिस द्वारा बैरिकेड के हिस्से के रूप में रखे गए थे। हरियाणा पुलिस ने कहा कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले का इस्तेमाल किया जा रहा है क्योंकि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों पर पथराव कर रहे हैं। सरकार के साथ सोमवार रात बैठक में जब कोई बात नहीं बनी तब किसान यूनियन ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान किया। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन 2020-21 के साल भर चले आंदोलन से इस बार कैसे अलग है। 250 से अधिक किसान संगठनों ने पंजाब से विरोध का आह्वान किया है। इनमें से करीब 100 यूनियन का समर्थन हासिल करने वाला किसान मजदूर मोर्चा KMM और अन्य 150 संगठनों का मंच संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक शामिल है। ये किसान कई मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।

दिसंबर 2023 के अंत में इन दो संगठनों ने दिल्ली चलो का आह्वान किया था। किसानों का नेतृत्व इस बार दूसरे किसान नेता कर रहे हैं। संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक मूल संयुक्त किसान मोर्चा SKM से जुलाई 2022 में टूटकर बना एक गुट है। इसके समन्वयक जगजीत सिंह डल्लेवाल हैं, जो पंजाब स्थित भारतीय किसान यूनियन BKU सिधुपुर के अध्यक्ष हैं। सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसल मूल्य निर्धारण, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ, 2021 दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की जान चली गई उनको मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी, किसानों और मजदूरों को पेंशन!2013 जमीन अधिग्रहण अधिनियम का लागू होना किसानों की लिखित सहमति और 4 गुना मुआवजा, लखीमपुर खीरी कांड के अपराधियों को सजा, WTO से भारत की वापसी, बिजली संशोधन विधेयक 2020 रद्द हो, मिर्च और हल्दी जैसे मसालों के लिए राष्ट्रीय आयोग! नकली बीज, कीटनाशक, उर्वरक बनाने वाली कंपनियों पर सख्त दंड और जुर्माना, योजना के तहत साल में 200 दिन का रोजगार 100 के बजाय, 700 रुपये दैनिक मजदूरी, और योजना को कृषि से जोड़ा जाए। जल, वनों और भूमि पर आदिवासियों के अधिकार सुनिश्चित करें!

बता दे कि सरकार की ओर से क्या कहा जा रहा है कि 6 फरवरी को कृषि मंत्रालय को ईमेल भेजकर किसानों ने अपनी मांगें रखी थीं। 8 फरवरी को सरकार ने 10 किसान नेताओं से चंडीगढ़ में मुलाकात की थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। संयुक्त किसान मोर्चा SKM से जुलाई 2022 में टूटकर बना एक गुट है। इसके समन्वयक जगजीत सिंह डल्लेवाल हैं, जो पंजाब स्थित भारतीय किसान यूनियन BKU सिधुपुर के अध्यक्ष हैं। सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून, स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट के हिसाब से फसल मूल्य निर्धारण, किसानों और मजदूरों का पूरा कर्ज माफ, 2021 दिल्ली में विरोध प्रदर्शन के दौरान जिन किसानों की जान चली गई उनको मुआवजा और एक सदस्य को नौकरी, किसानों और मजदूरों को पेंशन!पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस बैठक में मध्यस्थता की थी। दूसरी बैठक सोमवार में मुख्यमंत्री मान शामिल नहीं थे। इस बैठक में 26 किसान नेताओं ने 3 मंत्रियों से मुलाकात की पर कोई समझौता नहीं हुआ। सरकार के साथ सोमवार रात बैठक में जब कोई बात नहीं बनी तब किसान यूनियन ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान किया। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन 2020-21 के साल भर चले आंदोलन से इस बार कैसे अलग है। 250 से अधिक किसान संगठनों ने पंजाब से विरोध का आह्वान किया है। इनमें से करीब 100 यूनियन का समर्थन हासिल करने वाला किसान मजदूर मोर्चा KMM और अन्य 150 संगठनों का मंच संयुक्त किसान मोर्चा गैर-राजनीतिक शामिल है। ये किसान कई मांगों को लेकर विरोध कर रहे हैं।आम आदमी पार्टी और कांग्रेस ने किसानों को समर्थन दिया है। सोमवार बातचीत बेनतीजा रही और बैठक में कोई हल नहीं निकला। इस मीटिंग के बाद किसान नेताओं ने दिल्ली कूच जारी रखने का ऐलान कर दिया। वहीं किसानों को रोकने के लिए हरियाणा ने पंजाब से लगती सीमाओं को सील कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। किसान शंभू बॉर्डर तक पहुंचे हैं जहां उन्हें रोकने की कोशिश हरियाणा पुलिस की ओर से जारी है।

क्या विपक्ष के INDIA गठबंधन को लग चुके हैं बड़े-बड़े झटके?

हाल ही में विपक्ष के INDIA गठबंधन को बड़े-बड़े झटके लग चुके हैं! लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. को लगातार झटके लग रहे। बिखरे हुए विपक्ष को एकजुट करने की सबसे पहले पहल करने वाले नीतीश कुमार के अलग होने के झटके से गठबंधन उबरा भी नहीं था कि आरएलडी के जयंत चौधरी भी विपक्ष के लिए बेगाने हो गए। ये झटके तो पुराने हो गए। पिछले 24 घंटे में ही ऐसे 3 सियासी घटनाक्रम हो चुके हैं जो इशारा करते हैं कि विपक्ष की हालत कितनी खराब है। विपक्ष की सबसे बड़ी नेता और कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लोकसभा के बजाय राज्यसभा से संसद में जाने का फैसला किया है। राजस्थान से पर्चा भरने के अगले दिन गुरुवार को उन्होंने अपने संसदीय क्षेत्र यूपी के रायबरेली की जनता के नाम एक बड़ा ही भावुक खत लिखा। उनके इस फैसले से रायबरेली में कांग्रेस के कार्यकर्ता निश्चित तौर पर निराश होंगे। इसीलिए सोनिया ने खत में उन्हें ये समझाने की कोशिश की कि स्वास्थ्य कारणों से वह लोकसभा चुनाव लड़ने में असमर्थ हैं। हालांकि, उन्होंने जिस तरह ये कहा कि रायबरेली के बिना उनका परिवार अधूरा है, उससे ये अटकलें जरूर लगने लगी हैं कि अब उनकी जगह पर उनकी बेटी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से चुनाव लड़ सकती हैं। सोनिया गांधी का रायबरेली से हटना सियासी लिहाज से देश के सबसे बड़े सूबे में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है। पूरे राज्य में लोकसभा की एक यही तो सीट थी जो कांग्रेस के खाते में थी। 2019 के चुनाव में यूपी में गांधी परिवार को एक और मजबूत गढ़ अमेठी कांग्रेस के हाथ से छिन चुका है। वहां राहुल गांधी को बीजेपी की स्मृति इरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। यही वजह है कि सोनिया गांधी के राज्यसभा जाने पर बीजेपी कह रही है कि उनको भी रायबरेली में ‘2019 के अमेठी’ दोहराए जाने का डर था यानी हार का डर था। हालांकि, अगर प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली से लोकसभा का चुनाव लड़ती हैं तो वहां निराश कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नया जोश आ सकता है।

गुरुवार को ही एक अन्य घटनाक्रम विपक्षी गठबंधन और खासकर कांग्रेस की चिंता बढ़ाने वाला रहा। नैशनल कॉन्फ्रेंस के प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने ये कहकर चौंका दिया कि उनकी पार्टी लोकसभा का चुनाव अकेले लड़ेगी और उन्हें बीजेपी की अगुआई वाले एनडीए से भी कोई परहेज नहीं है। हालांकि, उनके इस बयान के बाद उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने सफाई दी कि नैशनल कॉन्फ्रेंस विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. का हिस्सा बनी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ सीटों के तालमेल को लेकर बातचीत अभी चल रही है। नैशनल कॉन्फ्रेंस जम्मू-कश्मीर और लद्दाख की 6 लोकसभा सीटों में से 3 सीटों पर लड़ना चाहती है। वह चाहती है कि कांग्रेस सिर्फ जम्मू रीजन की सीटों पर लड़े लेकिन ग्रैंड ओल्ड पार्टी जम्मू के साथ-साथ कश्मीर में भी एक सीट या फिर लद्दाख से भी चुनाव लड़ना चाहती है। वैसे भी विपक्षी गठबंधन अबतक कागजों में ही दिख रहा है। पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की टीएमसी ने कांग्रेस समेत बाकी पार्टियों को एक भी सीट नहीं देने का ऐलान कर रखा है। इसी तरह आम आदमी पार्टी ने पंजाब की सभी 13 सीटों पर लड़ने का एकतरफा ऐलान कर रखा है। इतना ही नहीं, पार्टी ने दिल्ली की 7 सीटों में से सिर्फ एक सीट कांग्रेस के लिए छोड़ने का ऐलान किया है जो उसे मंजूर नहीं है।

महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर राहुल नार्वेकर ने उप मुख्यमंत्री अजीत पवार की अगुआई वाली एनसीपी को ही ‘असली एनसीपी’ करार दिया है। उन्होंने शरद पवार गुट की तरफ से अजीत गुट के विधायकों को अयोग्य ठहराने की याचिकाओं को खारिज करते हुए ये फैसला सुनाया। स्पीकर ने अपने फैसले में कहा कि अजीत पवार की पार्टी ही असली एनसीपी है लिहाजा उसके विधायकों को अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। इससे पहले चुनाव आयोग फैसला कर ही चुका है कि एनसीपी पर अजीत पवार का ही नियंत्रण रहेगा। आयोग ने पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अजीत पवार के दावे को सही पाया है। एनसीपी के संस्थापक शरद पवार को अपनी नई पार्टी के लिए नया नाम ‘एनसीपी शरद चंद्र पवार’ रखा है। एनसीपी की तरह ही महाराष्ट्र में शिवसेना भी दो फाड़ हो चुकी है। स्पीकर ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुआई वाले धड़े को ही असली शिवसेना माना है। उद्धव ठाकरे की अगुआई वाले धड़े का नाम अब शिवसेना उद्धव बाल ठाकरे है।

बीजेपी के लिए माधव भंडारी के बेटे ने क्या कहा?

हाल ही में माधव भंडारी के बेटे ने बीजेपी के लिए एक बयान दिया है! राज्यसभा की 56 सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया जारी है। शुक्रवार को नामांकन दाखिल करने का आखिरी दिन था। महाराष्ट्र की छह सीटों के लिए सात नामांकन दाखिल किए गए। बीजेपी की ओर से अशोक चव्हाण, अजित गोपछड़े, मेधा कुलकर्णी को उम्मीदवार बनाया गया है। वहीं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से प्रफुल्ल पटेल, एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना से मिलिंद देवड़ा मैदान में उतरे हैं। वहीं कांग्रेस ने चंद्रकांत हंडोरे को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी की ओर से कई नामों पर चर्चा हुई। इनमें विनोद तावड़े, पंकजा मुंडे, माधव भंडारी, हर्षवर्द्धन पाटिल और अन्य शामिल हैं। इस बार भी माधव भंडारी के नाम पर चर्चा हुई लेकिन उम्मीदवारी की घोषणा नहीं की गई। इस मुद्दे को लेकर माधव भंडारी के बेटे चिन्मय भंडारी ने एक्स प्लेटफॉर्म पर ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने पार्टी में अपने पिता के योगदान को पेश किया और कहा कि उनके नाम पर 12 बार चर्चा हुई लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। चिन्मय भंडारी ने पोस्ट में साफ किया है कि यह व्यक्तिगत है। माधव भंडारी 1975 में जनसंघ जनता पार्टी में शामिल हुए। इसके बाद 1980 में बीजेपी का गठन हुआ। अब उनकी उम्र लगभग 50 साल बताई जा रही है। इन 50 सालों के दौरान माधव भंडारी ने महाराष्ट्र के अलग-अलग संगठनों को खड़ा करने का काम किया। हजारों लोगों, सैकड़ों गांवों की मदद की।

चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने सत्ता के दुरुपयोग के खिलाफ मोर्चा संभाला। आम लोगों के मुद्दों को उठाया। 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्होंने चुनौतियों का सामना करने और उन्हें सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। चिन्मय भंडारी ने कहा है कि उन्होंने राज्य के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और कई किताबें लिखीं। हालांकि इस पूरे समय में वह लाइमलाइट से दूर रहे।

सिंधुदुर्ग में एक घर के लिए बिजली कनेक्शन के मामले में चिन्मय भंडारी का कहना है कि उन्होंने अपने पद और प्रभाव का इस्तेमाल व्यक्तिगत लाभ के लिए नहीं किया है। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैं आपको इसका एक उदाहरण बताता हूं। चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। उन्होंने उस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं किया, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर काम किया। बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उन्होंने अपने जीवन साथी को खो दिया। इसके बाद भी उन्होंने पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैंने कुछ लोगों को, जिन्हें पार्टी ने मंत्री और सांसद बनाया, यह कहते हुए देखा है कि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है। वह 90 के दशक के अंत में सिंधुदुर्ग जिला परिषद के उपाध्यक्ष थे, तो हमारा घर शहर के बाहर था। वहां से बिजली ग्रिड एक किलोमीटर दूर था। इसलिए उन्होंने 18 महीने तक इंतजार करना चुना। हम उस अवधि में बिना बिजली के रहे। चिन्मय ने कहा कि यह हाल तब का है जब वह सड़कें बना रहे थे और कई अन्य गांवों में बिजली पहुंचा रहे थे। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मेरे जीवन में 12 बार विधानसभा या राज्यसभा चुनाव के दौरान पिता का नाम चर्चा में आया लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी नेतृत्व इस पर सवाल नहीं पूछना चाहता।

चिन्मय ने बताया कि माधव भंडारी ने इस पूरे घटनाक्रम पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। 2014 में बीजेपी के सत्ता में आने के बाद उन्होंने चुनौतियों का सामना करने और उन्हें सुलझाने में अहम भूमिका निभाई। चिन्मय भंडारी ने कहा है कि उन्होंने राज्य के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया और कई किताबें लिखीं। हालांकि इस पूरे समय में वह लाइमलाइट से दूर रहे।महीने तक इंतजार करना चुना। हम उस अवधि में बिना बिजली के रहे। चिन्मय ने कहा कि यह हाल तब का है जब वह सड़कें बना रहे थे और कई अन्य गांवों में बिजली पहुंचा रहे थे। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मेरे जीवन में 12 बार विधानसभा या राज्यसभा चुनाव के दौरान पिता का नाम चर्चा में आया लेकिन उन्हें नामांकन नहीं मिला। उन्होंने यह भी साफ किया कि पार्टी नेतृत्व इस पर सवाल नहीं पूछना चाहता।उन्होंने उस पार्टी को नुकसान पहुंचाने के लिए कुछ भी नहीं किया, जिसके लिए उन्होंने जीवन भर काम किया। बताया कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं था और उन्होंने अपने जीवन साथी को खो दिया। इसके बाद भी उन्होंने पार्टी के लिए काम करना बंद नहीं किया। चिन्मय भंडारी ने कहा कि मैंने कुछ लोगों को, जिन्हें पार्टी ने मंत्री और सांसद बनाया, यह कहते हुए देखा है कि उनके साथ गलत व्यवहार किया गया है।