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आखिर कौन सी है दुनिया की सबसे खतरनाक पनडुब्बियां?

आज हम आपको दुनिया की सबसे खतरनाक पनडुब्बियों के बारे में जानकारी देंगे! भारतीय नौसेना ने हाल में ही अपनी दूसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात को कमीशन किया है। यह अरिहंत क्लास की दूसरी पनडुब्बी है, जो परमाणु शक्ति से संचालित है। दुनिया के कई देशों के पास परमाणु पनडुब्बियां हैं। अमेरिकी नौसेना की 14 ओहियो क्लास की पनडुब्बियों को दुनिया में सबसे खतरनाक माना जाता है। ओहियो क्लास की पनडुब्बियां अमेरिका के न्यूक्लियर डेटरेंस में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इन पनडुब्बियों में ट्राइडेंट II D5 मिसाइलें तैनात हैं। अमेरिकी नौसेना इन्हें ट्राइडेंट II D5LE से बदल रही है, जो बेहतर सटीकता के साथ एक नई गाइडेंस सिस्टम से लैस हैं। ओहियो क्लास की पनडुब्बियों में 24 लॉन्च ट्यूब होते हैं, जिन्हें न्यू स्टार्ट संधि के तहत 20 कर दिया गया है।

रूस की बोरई क्लास दुनिया की सबसे शक्तिशाली पनडुब्बियों मे शामिल है। वर्तमान में रूस के पास 7 बोरई क्लास की पनडुब्बियां मौजूद हैं। बोरई क्लास पनडुब्बियों में 16 बुलवा मिसाइल, 533mm टारपीडो ट्यूब, 6 एक्सटर्नल स्पेशल पर्पस एक्सटर्नल ट्यूब, श्लागबाम एंटी-टारपीडो डिफेंस सिस्टम और RPK-2 वियुगा एंटी-सबमरीन/शिप मिसाइल तैनात की जा सकती हैं। अमेरिकी नौसेना की वर्जीनिया-क्लास पनडुब्बियां अमेरिकी न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बियों का सबसे नया क्लास है। यह सीवुल्फ क्लास से सस्ती और ज्यादा शक्तिशाली हैं। वर्जीनिया क्लास कीी 22 पनडुब्बियों का पहले ही निर्माण किया जा चुका है। वर्जीनिया क्लास की पनडु्ब्बियां अपनी फ्लॉय बॉय वायर कंट्रोल के कारण उथले पानी में भी अच्छे से मूव कर सकती हैं। वर्जीनिया-क्लास में अपनी जमीन पर हमला करने वाली टॉमहॉक मिसाइलों को दागने के लिए वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं।

रूसी नौसेना के पास एक प्रोजेक्ट 885 “यासेन-क्लास” पनडुब्बियां है। यह पनडुब्बी 119.8 मीटर लंबी है और पानी में डूबे रहने पर 31 नॉट की गति से चल सकती है। इसकी हथियार प्रणाली में यूजीएसटी-एम हैवीवेट गाइडेड टॉरपीडो से लैस दस 533 मिमी टारपीडो ट्यूब और पी-800 ओनिक्स मिसाइलों के लिए आठ वर्टिकल लॉन्च साइलो शामिल हैं। अमेरिकी नौसेना की परमाणु ऊर्जा से संचालित लॉस एंजिल्स क्लास की परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बियां टॉमहॉक लैंड-अटैक क्रूज मिसाइल और MK-48 टॉरपीडो से लैस हैं। इन्हें मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए विकसित किया गया है। इस क्लास की पनडुब्बियां स्पेशल ऑपरेशन करने और माइंस बिछाने में भी सक्षम हैं। लॉस एंजिल्स-क्लास को अमेरिकी पनडुब्बी बेड़े की रीढ़ माना जाता है।

ब्रिटेन की वैनगार्ड क्लास पनडुब्बियां भी कम खतरनाक नहीं हैं। वर्तमान में ब्रिटिश नौसेना में 4 वैनगार्ड-क्लास सेवा में हैं। ये 16 ट्राइडेंट II D5 बैलिस्टिक मिसाइलों को ले जा सकती हैं। वे उन्नत स्टील्थ तकनीक और मजबूत कम्यूनिकेशन सिस्टम से लैस हैं, जो दुश्मन के इलाके में घुसकर हमला कर सकती हैं। फ्रांसीसी नौसेना की ट्रायम्फेंट क्लास पनडुब्बियां काफी शक्तिशाली मानी जाती हैं। ये बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं, जो परमाणु ऊर्जा से चलती हैं। फ्रांस के पास ऐसी चार पनडुब्बियां हैं। ये 16 M45 या M51 मिसाइलों से लैस हैं। ये पनडुब्बियां F17 टॉरपीडो से भी लैस हैं। इनमें एक्सोसेट SM39 एंटी-शिप मिसाइलें में तैनात रहती हैं, जिन्हें पानी के अंदर से भी लॉन्च किया जा सकता है।

अमेरिका की सीवुल्फ-क्लास परमाणु शक्ति संचालित फास्ट अटैक पनडुब्बियां बेहद शक्तिशाली मानी जाती हैं। वर्तमान में वाशिंगटन राज्य के बैंगोर ट्राइडेंट बेस पर तीन सीवुल्फ क्लास पनडुब्बियां तैनात हैं। इन्हें मूल रूप से रूसी परमाणु पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए बनाया गया था। इस क्लास की पनडुब्बियां काफी तेज गति से चल सकती हैं और स्टील्थ क्षमता से लैस हैं। सीवुल्फ-क्लास पनडुब्बियां टारपीडो ट्यूबों के माध्यम से टॉमहॉक मिसाइलें दाग सकती हैं। चीन के पास छह ऑपरेशनल जिन-क्लास बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां हैं। ये पनडुब्बियां 135 मीटर लंबी और 12.5 मीटर चौड़ी हैं और पानी में डूबे रहने पर 20 नॉट से ज्यादा की रफ्तार से चल सकती हैं। जिन क्लास पनडुब्बियां12 JL-2 मिसइलें ले जा सकती हैं।

अरिहंत क्लास पनडुब्बियां पानी के अंदर 24 नॉट (44 किमी/घंटा) और सतह पर लगभग 12-15 नॉट (22-28 किमी/घंटा) की गति तक पहुंच सकती हैं। वर्जीनिया क्लास की पनडु्ब्बियां अपनी फ्लॉय बॉय वायर कंट्रोल के कारण उथले पानी में भी अच्छे से मूव कर सकती हैं। वर्जीनिया-क्लास में अपनी जमीन पर हमला करने वाली टॉमहॉक मिसाइलों को दागने के लिए वर्टिकल लॉन्च ट्यूब हैं।इन्हें मुख्य रूप से पनडुब्बी रोधी युद्ध के लिए विकसित किया गया है। इस क्लास की पनडुब्बियां स्पेशल ऑपरेशन करने और माइंस बिछाने में भी सक्षम हैं। लॉस एंजिल्स-क्लास को अमेरिकी पनडुब्बी बेड़े की रीढ़ माना जाता है।इसमें चार मिसाइल लॉन्च ट्यूब हैं, जिनसे 750 किमी की रेंज वाली K-15 पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल या 3,500 किमी की रेंज वाली K-4 मिसाइल को फायर किया जा सकता है। ये दोनों मिसाइलें परमाणु हमला करने में सक्षम हैं।

क्या साल 2024 रहा है सबसे ज्यादा गर्म?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या साल 2024 सबसे ज्यादा गर्म रहा है या नहीं! साल 2024 मानवता के इतिहास में सबसे गर्म साल बनने की राह पर तेजी से बढ़ रहा है। इस साल के जून, जुलाई और अगस्त धरती पर सबसे गर्म महीने रहे। मौसम की निगरानी से जुड़ी यूरोपीय संघ की संस्था कॉपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस (C3S) की रिपोर्ट में यह डरावनी तस्वीर उभरी है। रिपोर्ट में चेताया गया है कि धरती अनुमान से कहीं अधिक तेजी से गर्म हो रही है। गर्मी की यह तीव्रता और बढ़ेगी। अगर सितंबर से दिसंबर तक तापमान सामान्य से 0.30 डिग्री सेल्सियस कम रहता है तो 2024 को सबसे गर्म साल बनने से रोका जा सकता है, लेकिन इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल जून से अगस्त तक वैश्विक तापमान में औसत बढ़त 1.5 डिग्री के स्तर को पार कर गई। अगस्त 2024 तो वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा गर्म रहा। जमीनी सतह पर हवाओं का औसत तापमान 16.82 डिग्री सेल्सियस रहा। यह सामान्य से 0.71 डिग्री अधिक है। प्री इंडस्ट्रियल एरा यानी औद्योगीकरण युग से पहले से तुलना करें तो तापमान 1.51 डिग्री अधिक गर्म रहा। अहम बात यह है कि बीते 14 महीनों में यह 13वां महीना है, जब वैश्विक औसत तापमान प्री इंडस्ट्रियल एरा की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक गर्म रहा।

बीते 12 महीनों यानी सितंबर 2023 से अगस्त 2024 के बीच वैश्विक औसत तापमान सबसे ज्यादा रहा। ये धरती के सबसे गर्म 12 महीने रहे हैं। इस दौरान औसत तापमान सामान्य से 0.76 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा। वहीं प्री इंडस्ट्रियल एरा (1850-1900) की तुलना में यह 1.64 डिग्री अधिक गर्म रहा। 2024 में जनवरी से अगस्त के बीच वैश्विक तापमान औसत से 0.70 डिग्री ज्यादा गर्म रहा। यह 2023 के मुकाबले 0.23 डिग्री अधिक गर्म है। इससे पहले सबसे गर्म साल का रेकार्ड 2023 के नाम था। यूरोप में औसत तापमान सबसे अधिक रहा। वहां अगस्त 2024 सामान्य से 1.57 डिग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा। यूरोप में यह दूसरा सबसे गर्म अगस्त रहा। इससे पहले 2022 में अगस्त में तापमान सामान्य से 1.73 डिग्री अधिक गर्म रहा था। यूरोप के अलावा पूर्वी अंटार्कटिका, टेक्सस, मेक्सिको, कनाडा, नार्थ-ईस्ट अफ्रीका, ईरान, चीन, जापान और ऑस्ट्रेलिया काफी गर्म रहे। वहीं, पूर्वी रूस, अलास्का, अमेरिका के पूर्वी हिस्सा, साउथ अमेरिका का कुछ हिस्सा सामान्य से कम गर्म रहे।

अगस्त 2024 औसत तौर पर शुष्क महीनों में शामिल रहा। यूरोप में सदर्न यूके, आयरलैंड, आल्प्स, पश्चिमोत्तर रूस आदि में सूखे की स्थिति रही और जंगलों में आग लगी। वहीं, ईस्टर्न नॉर्थ अमेरिका, सेंट्रल रूस, ईस्टर्न चीन, ईस्टर्न ऑस्ट्रेलिया में ज्यादा बारिश हुई। भारतीय उपमहाद्वीप में मॉनसूनी बारिश अच्छी हुई। आर्कटिक सागर में बर्फ सामान्य से 17% कम रही। सबसे कम बर्फबारी वाला वाला चौथा अगस्त रहा। यही नहीं आपको बता दें कि अपनी खास बनावट के लिए जाने जाने वाले ओम पर्वत पर बर्फ से बनी ‘ऊं’ की आकृति हट गई है। एक्सपर्ट के अनुसार इसका हटना वैश्विक और स्थानीय पर्यावण के संकट को दर्शा रहा है। अगस्त के तीसरे हफ्ते में यह बर्फ गायब हुई थी। वैज्ञानिकों के अनुसार, इसे जलवायु परिवर्तन के असर के तौर पर देखा जा सकता है।ओम पर्वत भारत, चीन और नेपाल की सीमा से लगा हुआ है और समुद्र तल से करीब 5900 मीटर ऊंचाई पर है। यह पर्वत कैलाश मानसरोवर यात्रा का महत्वपूर्ण पड़ाव भी है। चीन सीमा से सटे लिपुलेख तक सड़क बनने के बाद यहां पर्यटकों की संख्या भी बढ़ गई।

अल्मोड़ा के जीबी पंत इंस्टीट्यूट में सेंटर फॉर एनवायरमेंटल असेसमेंट एंड क्लाइमेट चेंज सेंटर के जेसी कुनियाल के अनुसार, विश्वभर में मौसमी बदलाव देखने को मिल रहे हैं। जलवायु परिवर्तन का असर ओम पर्वत पर भी दिखाई दिया है। वैश्विक तापमान बढ़ रहा है और ग्लेशियर इससे सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि जंगलों में आग की घटनाएं और इसका दायरा बढ़ रहा है। जंगल की आग से निकला ब्लैक कार्बन ग्लेशियर पर असर डालता है। ग्लेशियर की अच्छी सेहत के लिए उसके नीचे के बुग्यालों में अच्छी घास होनी चाहिए। अल्पाइन क्षेत्र में वनों की सेहत अच्छी होनी चाहिए। इन सबसे तापमान संतुलित रहता है। इन सबको मिलाकर एक साथ देखने की जरूरत है।

UN की 2022 की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र के एक तिहाई ग्लेशियरों पर ग्लोबल वार्मिंग का संकट है। तापमान बढ़ने से 2000 से ग्लेशियर के पिघलने की दर बढ़ गई है। ग्लेशियर्स से 58 बिलियन टन बर्फ हर साल कम हो रही है। यह फ्रांस और स्पेन में होने वाले पानी की कुल खपत के बराबर है। वहीं द इंटरनैशनल सेंटर फॉर इंटीग्रेडेट माउंटेन डिवेलपमेंट ICIMOD के अनुसार तापमान बढ़ने की दर हिंदुकुश हिमालयी क्षेत्र में वैश्विक दर से काफी अधिक है। साल 2023-24 की सर्दियों में समूचे क्षेत्र में रेकॉर्ड कम बर्फबारी हुई। खास तौर पर पश्चिमी हिमालय में कम या बिलकुल बर्फबारी नहीं हुई।

आखिर क्या है जापान के टॉपलेस हेल्थ चेकअप का विवाद?

आज हम आपको जापान के टॉपलेस हेल्थ चेकअप विवाद के बारे में जानकारी देने वाले हैं! जापान में स्वास्थ्य जांच के नाम पर छात्र और छात्राओं को कपड़े उतारने पर मजबूर किया जा रहा है। सरकार के इस फैसले से छात्रों, गार्जियन और शिक्षकों के बीच विवाद बढ़ गया है। दरअसल, जापान में छात्रों को स्वास्थ्य जांच के लिए जाना पड़ता है, जिनमें से कुछ की उम्र 13 साल है। इस दौरान उन्हें अपनी शर्ट और कुछ मामलों में ब्रा को भी उतारने को कहा जाता है। बच्चों के परिवारों का कहना है कि इससे उन पर भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक प्रभाव पड़ रहा है। हाल में ही किए गए एक सर्वेक्षण में पता चला है कि मिडिल स्कूल के 95 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने स्वास्थ्य जांच के लिए कपड़े उतराने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे खुद के लिए मुश्किल कदम और शर्मिंदगी की वजह करार दिया है। छात्राओं के स्वास्थ्य जांच के दौरान कपड़े उतारने चाहिए या नहीं, इसको लेकर कोई राष्ट्रव्यापी नीति नहीं है। इस कारण नियमों में एकरूपता नहीं है। स्थानीय शिक्षा बोर्ड आने वाले डॉक्टरों और कंपाउंडरों के सहयोग से स्वास्थ्य जांच के लिए प्रक्रिया को निर्धारित करते हैं। मंत्रालय के एक नोटिस में स्थानीय शिक्षा बोर्डों को सलाह दी गई है कि अगर इससे परीक्षा की सटीकता से समझौता नहीं होता है तो छात्रों को कपड़े उतारने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।यूनिवर्सिटी अस्पताल में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर केंटारो इवाता ने छात्रों को कपड़े उतारने के लिए बाध्य करने के चिकित्सा औचित्य के बारे में संदेह व्यक्त किया है। इवाता ने स्वीकार किया कि कपड़े उतारने से दिल की धड़कन की आवाज की स्पष्टता में थोड़ा सुधार हो सकता है, लेकिन यह सटीक स्वास्थ्य आकलन के लिए आवश्यक नहीं है। इसमें छात्रों को जिम के कपड़े पहनने या अपने शरीर को ढकने के लिए तौलिये का उपयोग करने जैसे विकल्प सुझाए गए हैं।इस कारण पूरे देश में नियमों में काफी भिन्नता है। कुछ स्कूलों में, जिसमें सीनियर हाई स्कूल की छात्राएं शामिल हैं, उनको भी अपनी शर्ट और ब्रा उतराने के लिए बाध्य किया जा रहा है। जबकि अन्य छात्रों को कपड़े पहने रहने की अनुमति है।

नियमों में भिन्नता ने माता-पिता और बाल अधिकार समूहों की चिंता और गुस्से को बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए, कुछ पश्चिमी जापानी शहरों में, हाई स्कूल के छात्राओं को स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टॉपलेस होना आवश्यक है। प्रथाओं में यह भिन्नता उपयोग की जा रही प्रक्रियाओं की पर्याप्तता और निष्पक्षता के बारे में चिंताएं पैदा करती है।

जापान मेडिकल एसोसिएशन ने टॉपलेस स्वास्थ्य जांच की प्रथा का बचाव करते हुए तर्क दिया है कि व्यापक जांच के लिए कपड़े उतारना आवश्यक है। हालांकि, इस रुख को चिकित्सा विशेषज्ञों द्वारा चुनौती दी गई है जो ऐसी प्रथाओं की आवश्यकता पर सवाल उठाते हैं। द गार्जियन के अनुसार, कोबे यूनिवर्सिटी अस्पताल में संक्रामक रोगों के प्रोफेसर केंटारो इवाता ने छात्रों को कपड़े उतारने के लिए बाध्य करने के चिकित्सा औचित्य के बारे में संदेह व्यक्त किया है। इवाता ने स्वीकार किया कि कपड़े उतारने से दिल की धड़कन की आवाज की स्पष्टता में थोड़ा सुधार हो सकता है, लेकिन यह सटीक स्वास्थ्य आकलन के लिए आवश्यक नहीं है।

बढ़ती आलोचना के जवाब में, जापान के शिक्षा मंत्रालय ने 23 जनवरी, 2024 को एक नोटिस जारी किया, जिसका उद्देश्य स्कूल स्वास्थ्य जांच के दौरान गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करना था। द मेनिची की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मंत्रालय के एक नोटिस में स्थानीय शिक्षा बोर्डों को सलाह दी गई है कि अगर इससे परीक्षा की सटीकता से समझौता नहीं होता है तो छात्रों को कपड़े उतारने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। इसमें छात्रों को जिम के कपड़े पहनने या अपने शरीर को ढकने के लिए तौलिये का उपयोग करने जैसे विकल्प सुझाए गए हैं। बता दें कि मिडिल स्कूल के 95 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने स्वास्थ्य जांच के लिए कपड़े उतराने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे खुद के लिए मुश्किल कदम और शर्मिंदगी की वजह करार दिया है। छात्राओं के स्वास्थ्य जांच के दौरान कपड़े उतारने चाहिए या नहीं, इसको लेकर कोई राष्ट्रव्यापी नीति नहीं है। नियमों में भिन्नता ने माता-पिता और बाल अधिकार समूहों की चिंता और गुस्से को बढ़ा दिया है। उदाहरण के लिए, कुछ पश्चिमी जापानी शहरों में, हाई स्कूल के छात्राओं को स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान टॉपलेस होना आवश्यक है।नोटिस में जांच के दौरान गोपनीयता और सम्मान सुनिश्चित करने के उपायों की भी सिफारिश की गई है, जिसमें लड़कों और लड़कियों के लिए अलग-अलग जांच आयोजित करना और पर्दे का उपयोग करना शामिल है।

आखिर इंसान के भगवान होने की बात क्यों कर रहे हैं मोहन भागवत?

हाल ही में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने इंसान के भगवान होने की बात पर एक बयान दे दिया है! आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने फिर ‘इंसान के भगवान होने के भ्रम’ वाली बात कही। उन्होंने नसीहत दी कि किसी को खुद के ही भगवान होने का ऐलान नहीं करना चाहिए। भागवत ने कहा कि कोई भगवान होगा या नहीं, यह तो लोग तय करते हैं। उन्होंने पुणे में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि हम भगवान बनेंगे या नहीं, ये तो जनता तय करेगी। हमें खुद को भगवान घोषित नहीं करना चाहिए। भागवत ये बातें मणिपुर में 1971 में शंकर दिनकर केन उर्फ भैयाजी के काम को याद करते हुए कह रहे थे। भागवत ने कहा, ‘कुछ लोग सोचते हैं कि शांत रहने के बजाय हमें बिजली की तरह चमकना चाहिए। लेकिन बिजली चमकने के बाद तो और भी अंधेरा छा जाता है। संघ प्रमुख मोहन भागवत ने झारखंड के गुमला में कहा था कि इंसान भगवान बनना चाहता है। तो फिर मनुष्य अलौकिक बनना चाहता है, सुपरमैन बनना चाहता है, लेकिन वहां रुकता नहीं। उसको लगता है कि देव बनना चाहिए तो देवता बनना चाहता है लेकिन देवता कहते हैं कि हमसे तो भगवान बड़ा है, वो भगवान बनना चाहता है।इसलिए कार्यकर्ताओं को दीये की तरह जलना चाहिए और जरूरत पड़ने पर ही चमकना चाहिए।’ शंकर दिनकर केन ने 1971 तक मणिपुर में बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया। वो छात्रों को महाराष्ट्र भी लाए और उनके रहने का इंतजाम किया। मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां के हालात ‘मुश्किल’ और ‘चुनौतीपूर्ण’ हैं। उन्होंने कहा कि इतनी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी आरएसएस स्वयंसेवक पूर्वोत्तर राज्य में डटे हुए हैं, जहां दो समुदायों के बीच संघर्ष में 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा, ‘मणिपुर की स्थिति बहुत कठिन है। वहां सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। स्थानीय लोग अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। जो लोग वहां व्यापार या समाज सेवा के लिए गए हैं, उनके लिए तो स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है।’ आरएसएस प्रमुख ने आगे कहा, ‘लेकिन ऐसी परिस्थितियों में भी संघ के स्वयंसेवक वहां मजबूती से डटे हुए हैं और माहौल शांत करने की कोशिश कर रहे हैं।’

भागवत ने कहा कि संघ के स्वयंसेवक हिंसा के बीच भी राज्य से नहीं भागे और वे जीवन को सामान्य बनाने और दोनों समूहों के बीच गुस्से को कम करने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, ‘एनजीओ सब कुछ नहीं संभाल सकते, लेकिन संघ जो कर सकता है वह करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। वे संघर्ष में शामिल सभी पक्षों के साथ बातचीत कर रहे हैं। नतीजतन, उन्होंने लोगों का विश्वास हासिल किया है।’ ध्यान रहे कि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने झारखंड के गुमला में कहा था कि इंसान भगवान बनना चाहता है। तो फिर मनुष्य अलौकिक बनना चाहता है, सुपरमैन बनना चाहता है, लेकिन वहां रुकता नहीं। उसको लगता है कि देव बनना चाहिए तो देवता बनना चाहता है लेकिन देवता कहते हैं कि हमसे तो भगवान बड़ा है, वो भगवान बनना चाहता है।

भागवत के इस बयान के संदर्भ ढूंढे जाने लगे। एक वर्ग ने कहा कि भागवत ने ये बातें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नसीहत के तौर पर कही हैं। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने तो भागवत के बयान को पीएम मोदी पर दागी गई मिसाइल तक बता दिया। मणिपुर में 1971 में शंकर दिनकर केन उर्फ भैयाजी के काम को याद करते हुए कह रहे थे। भागवत ने कहा, ‘कुछ लोग सोचते हैं कि शांत रहने के बजाय हमें बिजली की तरह चमकना चाहिए। लेकिन बिजली चमकने के बाद तो और भी अंधेरा छा जाता है।उन्होंने अपनी एक्स पोस्ट में कहा, ‘मुझे यकीन है कि स्वयंभू नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री को इस ताजा अग्नि मिसाइल की खबर मिल गई होगी जिसे नागपुर ने झारखंड से लोक कल्याण मार्ग को निशाना बनाकर दागा है।दिनकर केन ने 1971 तक मणिपुर में बच्चों की शिक्षा के लिए काम किया। वो छात्रों को महाराष्ट्र भी लाए और उनके रहने का इंतजाम किया। मणिपुर की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि वहां के हालात ‘मुश्किल’ और ‘चुनौतीपूर्ण’ हैं। उन्होंने कहा कि इतनी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भी आरएसएस स्वयंसेवक पूर्वोत्तर राज्य में डटे हुए हैं, जहां दो समुदायों के बीच संघर्ष में 200 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं और 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं।’ मोहन भागवत ने इस बार पुणे में ‘इंसान-भगवान’ वाली बात छेड़ दी।

आखिर क्या है यूपी के सीएम योगी का नया धर्मांतरण विरोधी कानून?

आज हम आपको यूपी के सीएम योगी का नया धर्मांतरण विरोधी कानून के बारे में बताने जा रहे हैं! बता दे कि हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार यानी योगी सरकार के द्वारा नया धर्मांतरण विरोधी कानून लागू कर दिया गया है! इसके तहत अब नियम और भी सख्त हो चुके हैं और जो पहले 10 साल की सजा हुआ करती थी, उसे ताउम्र सजा में परिवर्तित कर दिया गया है! 

आपको बता दें कि यूपी में मंगलवार को धर्मांतरण कानून में बड़ा बदलाव हुआ। इस बदलाव से गैरकानूनी धर्मांतरण के मामले में सजा और जुर्माना दोनों बढ़ा दिए गए हैं। 2021 में पारित कानून में अधिकतम सजा 10 साल थी लेकिन संशोधन के बाद अब धर्मांतरण के दोषियों को ताउम्र जेल की सजा हो सकती है। इस तरह योगी सरकार का कानून देश में धर्मांतरण-विरोधी सबसे सख्त कानून बन चुका है। अब अगर कोई व्यक्ति विदेशी या गैरकानूनी संस्थाओं से जुड़कर धर्मांतरण कराता है तो उसे 10 लाख रुपये तक का जुर्माना और 14 साल तक की जेल हो सकती है। इसके अलावा, SC/ST समुदाय की नाबालिग लड़कियों या महिलाओं का धर्मांतरण कराने पर 20 साल से लेकर ताउम्र कैद तक की सजा का प्रावधान है। दोषी पाए जाने पर आरोपी को पीड़ित को मुआवजा भी देना होगा। सभी अपराध अब गैर-जमानती होंगे, और पीड़ित से जुड़ा कोई भी व्यक्ति शिकायत दर्ज करा सकता है।

संशोधित कानून में दो प्रावधान सबसे अहम हैं। पहला, अगर दोषी व्यक्ति ‘विदेशी’ या ‘गैरकानूनी’ एजेंसियों से जुड़ा हुआ पाया जाता है तो उसे 10 लाख रुपये का जुर्माना और 14 साल तक की कैद हो सकती है। दूसरा, किसी व्यक्ति को बहला-फुसलाकर या उकसाकर गैरकानूनी धर्मांतरण कराने पर 20 साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। यह प्रावधान खास तौर पर SC/ST समुदाय की नाबालिग लड़कियों या महिलाओं के गैरकानूनी धर्मांतरण के मामलों पर लागू होगा। दोषी व्यक्तियों को अवैध धर्मांतरण का शिकार हुए लोगों को मुआवजा भी देना होगा। 2021 में पारित अधिनियम में गैरकानूनी धर्मांतरण के लिए अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान था।

संशोधित कानून के तहत, ‘पीड़ित से जुड़ा कोई भी व्यक्ति’ गैरकानूनी धर्मांतरण की शिकायत दर्ज करा सकता है। पहले के कानून में धर्मांतरित व्यक्ति या उसके माता-पिता, भाई-बहन या करीबी रिश्तेदार को ही शिकायत दर्ज करानी होती थी। इसके अलावा, संशोधित कानून के तहत सभी अपराधों को ‘गैर-जमानती’ बना दिया गया है। संशोधन में यह भी कहा गया है कि ऐसे मामलों की सुनवाई सत्र न्यायालय से कम रैंक का कोई भी न्यायालय नहीं करेगा। साथ ही, सरकारी वकील को सुने बिना किसी भी जमानत याचिका पर विचार नहीं किया जाएगा।

नवंबर 2020 में जबरन धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए एक अध्यादेश जारी किया गया था। बाद में, उत्तर प्रदेश विधानसभा के दोनों सदनों द्वारा विधेयक पारित किए जाने के बाद, उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 लागू हुआ। मंगलवार को, यूपी विधानसभा ने 2021 के कानून को और सख्त बनाने के लिए उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्म परिवर्तन प्रतिषेध (संशोधन) विधेयक, 2024 पारित किया।

धर्मांतरण विरोधी कानून भारत में एक बहस का विषय हैं। कुछ लोगों का मानना है कि देश की सांस्कृतिक और सामाजिक एकता के लिए ये कानून जरूरी हैं। वहीं, दूसरों का कहना है कि ये कानून अल्पसंख्यकों के शोषण का जरिया हैं और धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का हनन करते हैं। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 में मिले वोटों के आधार पर तो ऐसे गुणा-भाग कई जगह किये जा रहे थे, लेकिन खुद योगी आदित्यनाथ की तरफ से कहा जाना बड़ी बात है. ये तो साफ शब्दों में चेतावनी है, इस सलाहियत के साथ कि चीजों को कोई हल्के में लेने की कोशिश हुई तो लेने के देने पड़ सकते हैं. 

 

और ब्रह्मास्त्र तो वो कानून है जिसमें लव-जिहाद के खिलाफ पहले के मुकाबले ज्यादा ही सख्त सजा के प्रावधान किये गये हैं. शादी के लिए जबरन धर्मांतरण के खिलाफ योगी आदित्यनाथ ने लव-जिहाद के नाम से मुहिम शुरू की थी, जिसकी बदौलत वो मौजूदा मुकाम तक पहु्ंचे हैं – और जब उस जगह पर खतरा मंडरा रहा है तो फिर से उसी मुहिम को और भी सख्त तरीके से आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं . सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धर्मांतरण विरोधी कानून संवैधानिक हैं, बशर्ते कि वे किसी व्यक्ति के धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार में हस्तक्षेप न करते हों। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने तो हाल में ये टिप्पणी की थी कि अगर धर्मांतरण पर लगाम नहीं लगी तो बहुसंख्यक हिंदू अल्पसंख्यक हो जाएगा। खैर, यह है योगी सरकार का नया धर्मांतरण विरोधी कानून और उसके नियम!

 

आखिर क्या है कोलकाता रेप और मर्डर केस का नया अपडेट?

आज हम आपको कोलकाता रेप और मर्डर केस का नया अपडेट बताने जा रहे हैं! जानकारी के लिए बता दें कि हाल ही में पश्चिम बंगाल के कोलकाता में एक ऐसा हत्याकांड देखने को मिला जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया! दिल्ली में एक समय निर्भया कांड बहुत चर्चित हुआ था, इसी तरह कोलकाता में भी एक और निर्भया कांड देखने को मिला, जब एक ट्रेनिंग डॉक्टर को आधी रात में रेप का सामना करना पड़ा और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गई… आज हम आपको उस पूरी घटना के बारे में शुरू से लेकर अंत तक जानकारी देने वाले हैं! 

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कोलकाता के RG कर मेडिकल कॉलेज में 31 साल की महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ 8, 9 अगस्त की रात एक दरिंदगी हुई थी… देश की आजादी का पर्व चल रहा है, 78 वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाया जा रहा है .. लेकिन इससे चंद दिन पहले हुए इस जघन्य अपराध ने पूरे देश को एक बार फिर सोचने के लिए मजबूर कर दिया है…. अफसोस की बात यह है कि इस घटना के अगले दिन जब मां-बाप को बच्ची के बारे में सूचना दी गई, तो उन्हें बताया गया कि उनकी बेटी ने आत्महत्या की है… वह दौड़कर मेडिकल कॉलेज गए, तीन से चार घंटे तक उन्हें उनकी बेटी के पास जाने नहीं दिया गया! 

जब वह उसके पास पहुंचे तो उन्हें अपनी बेटी आधे कपड़ों में और शरीर पर गहरी चोट के निशान के साथ मिली… कोलकाता पुलिस ने इसके बाद चार्ज लिया… जांच शुरू हुई, बलात्कार की पुष्टि हो गई… सुसाइड का झूठा नॉरेटिव उस समय ध्वस्त हो गया… पोस्टमार्टम रिपोर्ट के खुलासे ने हैवानियत की पूरी कहानी सामने रख दी, बात खबरों के माध्यम से पूरे देश के सामने आई, हर बार की तरह खूब हंगामा हुआ और मामला सीबीआई को सौंप दिया गया… 

लेकिन सवाल यह कि आखिर यह सब कैसे हुआ? कब हुआ? आरोपी कैसे उस जगह पहुंच गया जहां ट्रेनिंग डॉक्टर मौजूद थी और क्यों किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी? यह सभी जांच का विषय है…. लेकिन अब तक मिली जानकारी के अनुसार जब पीड़िता के मां-बाप को सूचना मिली तो उन्हें तीन से चार घंटे तक उनकी बेटी से नहीं मिलने दिया गया था… उसकी हत्या से कुछ घंटे पहले रात 11:30 बजे पीड़िता की उनके मां-बाप से बात हुई थी और वह हमेशा की तरह अच्छे से बात कर रही थी, कोई दिक्कत या परेशानी का अंदेशा नहीं था…. इसी बीच मां-बाप ने कहा कि अगले दिन सुबह 11:00 अस्पताल के सहायक अधीक्षक ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी की तबीयत खराब है… उसके करीब आधे घंटे बाद उसी सहायक अधीक्षक ने उन्हें बताया कि उनकी बेटी ने अस्पताल परिसर में आत्महत्या कर ली है… अदालत को बताया गया था कि वो तुरंत अस्पताल पहुंच गए थे और उन्हें उनकी बेटी का शव देखने की अनुमति नहीं दी गई… लेकिन जब मुख्यमंत्री ने मामले में हस्तक्षेप किया, तो उन्हें उनकी बेटी के पास जाने दिया गया… बता दे कि पीड़िता के माता-पिता उस स्थिति के बारे में बताते हैं जब पहली बार बेटी के शव के पास गए थे, उन्होंने कहा कि उसके शरीर पर खून बहने के निशान थे और शरीर के निचले हिस्से पर कोई कपड़ा नहीं था…. उसके साथ इतनी दरिंदगी हुई थी कि यह माना जाए कि ये किसी एक शख्स का काम नहीं था, बल्कि ज्यादा लोग उसमें शामिल थे… पीड़िता की मां ने अस्पताल परिसर में बयान दिया था और कहा कि मैं उनके पैरों पर गिर पड़ी और उनसे विनती करने लगी कि मुझे मेरी बेटी से मिलने दो… एक बार उसे देख लेने दो, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया, कोई नहीं समझता कि मैं किसी दौर से गुजरी थी… उन्होंने हमें दोपहर 2:00 बजे उसे देखने दिया, हालांकि लड़की के माता-पिता को इंतजार करने की बात को राज्य सरकार ने पूरी तरह से खारिज कर दिया है…. बता दे कि राज्य सरकार के वकील ने कहा कि मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में पुलिस चौकी को शुक्रवार सुबह 10:10 पर घटना की सूचना मिली थी… सुबह 10:30 बजे स्थानीय पुलिस वहां पर पहुंच गई, और जैसे ही वहां पहुंची वहां पर 150 से ज्यादा लोग जमा हो चुके थे… इसके बाद कई बड़े अधिकारी अस्पताल पहुंचे… राज्य सरकार ने कहा कि लोगों के जमा होने और प्रदर्शन के कारण पीड़िता के शव को सेमिनार हॉल से बाहर नहीं ले जाया गया और एक डॉक्टर ने ही सेमिनार हॉल में शव की जांच की… बाद में रैपिड एक्शन फोर्स को बुलाना पड़ा और शाम करीब 6:15 से 7:15 के बीच पोस्टमार्टम किया गया… हालांकि, अब मामला सीबीआई के हाथ में है और आरोपी भी गिरफ्तार हो चुका है ,लेकिन जांच अभी बाकी है!

क्या कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हरियाणा में करेंगे गठबंधन?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या कांग्रेस और आम आदमी पार्टी हरियाणा में गठबंधन करेंगे या नहीं! हरियाणा विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी कोई कोर-कसर छोड़ने के मूड में नहीं दिख रही। उनकी पूरी कोशिश यही है कि किसी भी तरह बीजेपी को राज्य में जीत की हैट्रिक बनाने से रोका जा सके। इसके लिए पार्टी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन की राह भी टटोलना शुरू किया। दोनों ही पार्टियों के बीच बातचीत के कई राउंड हुए। राघव चड्ढा से लेकर AAP के दिग्गज नेताओं और हरियाणा कांग्रेस के प्रभारियों की मीटिंग हुई। हालांकि, अब ऐसा लग रहा कि आप-कांग्रेस में गठबंधन की बात कहीं अटक गई है। ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस के भीतर से ही गठबंधन के खिलाफ आवाजें मुखर होने लगीं। पार्टी नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कह दिया कि हम AAP के बिना भी सक्षम हैं, हालांकि, गठबंधन पर आलाकमान फैसला लेगा। उधर कांग्रेस नेताओं के बदले तेवर को देखते हुए आप ने भी नई प्लानिंग शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल ये कि क्या हरियाणा में दोनों पार्टियों का गठबंधन बनने से पहले ही टूट गया है? कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से आ रहे बयानों को देखें तो ऐसा ही लग रहा। चर्चा तो ये है कि कांग्रेस देर रात तक उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। जानकारी के मुताबिक, 71 कैंडिडेट्स के नाम फाइनल हो चुके हैं, बस ऐलान होना बाकी है। जहां तक मेरी निजी राय है, हरियाणा में कांग्रेस को गठबंधन की जरुरत नहीं है। कांग्रेस की लोकप्रियता चरम पर है। आप कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती। आप को हरियाणा में क्यों घुसने दिया जाना चाहिए।उधर कांग्रेस के बदले रुख को समझते हुए अब आम आदमी पार्टी ने भी आगे की प्लानिंग शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, आप हरियाणा में 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। कांग्रेस और बीजेपी के कई नाराज नेता आप नेतृत्व के संपर्क में हैं। ऐसी चर्चा है कि आम आदमी पार्टी उन्हें चुनावी रण में उतार सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, आप और कांग्रेस में गठबंधन बनने से पहले ही बातचीत अटक गई। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी रविवार तक उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। इससे पहले कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर चर्चा का जिक्र किया था। हालांकि, हरियाणा कांग्रेस के कई नेता इस गठबंधन के सपोर्ट में नजर नहीं आ रहे थे। एक दिन पहले ही कांग्रेस नेता कैप्टन अजय सिंह यादव ने कहा कि हरियाणा में आम आदमी पार्टी का कोई आधार नहीं है। मुझे लगता है कि हम उन्हें वहां क्यों जगह दें?

कैप्टन अजय सिंह यादव ने ये भी जोड़ा कि अगर कोई मजबूरी है, तो यह आलाकमान को तय करना है कि वे अन्य राज्यों में भी उनके साथ समझौता करना चाहते हैं या नहीं। मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी और सोनिया गांधी ही तय करेंगे कि हमें गठबंधन करना चाहिए या नहीं। जहां तक मेरी निजी राय है, हरियाणा में कांग्रेस को गठबंधन की जरुरत नहीं है। कांग्रेस की लोकप्रियता चरम पर है। आप कांग्रेस को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकती। आप को हरियाणा में क्यों घुसने दिया जाना चाहिए।

रोहतक से सांसद और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दीपेंद्र हुड्डा ने भी गुरुवार को बताया था कि प्रक्रिया चल रही है और पार्टी प्रणाली एक-एक कदम आगे बढ़ रही है। जनता ने मन बना लिया है कि हरियाणा में कांग्रेस की सरकार बनेगी। मनोहर लाल खट्टर और बीजेपी के वरिष्ठ नेता इस बात को जानते हैं।बता दें कि कांग्रेस नेताओं के बदले तेवर को देखते हुए आप ने भी नई प्लानिंग शुरू कर दी है। ऐसे में सवाल ये कि क्या हरियाणा में दोनों पार्टियों का गठबंधन बनने से पहले ही टूट गया है? कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के नेताओं की ओर से आ रहे बयानों को देखें तो ऐसा ही लग रहा। आप और कांग्रेस में गठबंधन बनने से पहले ही बातचीत अटक गई। ऐसे में आम आदमी पार्टी भी रविवार तक उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर सकती है। इससे पहले कांग्रेस नेतृत्व और राहुल गांधी ने आम आदमी पार्टी के साथ गठबंधन पर चर्चा का जिक्र किया था।बता दें हरियाणा की 90 विधानसभा सीट पर 5 अक्टूबर को मतदान होगा और वोटों की गिनती 8 अक्टूबर को होगी।

फिर बनेगी कंगना और चिराग की जोड़ी! क्या वे संसद से फिर बड़े पर्दे पर एक साथ नजर आएंगे?

2024 के लोकसभा चुनाव में कंगना रनौत और चिराग पासवान ने जीत हासिल की। एक समय पर इनकी जोड़ी पर्दे पर बनती थी। इसके बाद लोकसभा में फिर एक साथ नजर आए. नई प्रैक्टिस में उभरकर सामने आया कंगना और चिराग का समीकरण! क्या ये दोनों एक बार फिर किसी फिल्म में साथ नजर आएंगे? हाल ही में एक इंटरव्यू में चिराग पासवान ने इस बारे में बात की.

उनके शब्दों में, “सात पुरुष में किसी के प्रदर्शन से मेरा कोई संबंध नहीं था। मैं अपने परिवार में अभिनय की कोशिश करने वाला पहला व्यक्ति था। लेकिन यह समझने में देर नहीं हुई कि अभिनय मैं नहीं कर रहा था। दर्शकों के समझने से पहले ही मैं समझ जाता हूँ।”

हालांकि, कंगना राजनीति के साथ-साथ अभिनय भी जारी रखती हैं। सिर्फ अभिनय नहीं. उन्होंने अपनी अगली फिल्म ‘इमरजेंसी’ का निर्देशन और निर्माण भी किया है। ऐसा माना जाता है कि इसकी पटकथा भी उन्होंने ही लिखी है।

कभी पर्दे पर कंगना रनौत और चिराग पासवान की जोड़ी बनती थी. 13 साल बाद राजनीति के मैदान में दोनों की फिर मुलाकात हुई. 2024 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर दोनों अब सांसद हैं. हाल ही में एक इंटरव्यू में चिराग ने कंगना के साथ रिलेशनशिप इक्वेशन पर बात की।

2011 में कंगना और चिराग ने फिल्म ‘मिले ना मिले हम’ में साथ काम किया। लेकिन हाजीपुर से लोक जनशक्ति पार्टी के सांसद अभिनय जारी नहीं रख सके. खुद चिराग ने कहा कि कुछ समय बाद उन्हें एहसास हुआ कि वह एक्टिंग में अच्छे नहीं हैं. उन्होंने कहा, ”सात पुरुष में किसी की परफॉर्मेंस से मेरा कोई लेना-देना नहीं है. मैं अपने परिवार में अभिनय की कोशिश करने वाला पहला व्यक्ति था। लेकिन जल्दी ही एहसास हुआ, मुझे नहीं। इससे पहले कि दर्शक समझें, मैं समझ जाता हूं कि मैं अभिनय नहीं कर सकता. शायद मैं इस दुनिया में यह समझने के लिए आया हूं कि मैं अभिनय नहीं कर सकता।”

रामबिलास पासवान के बेटे चिराग ने एक्टिंग छोड़ राजनीति की ओर अपना रुख किया. हालांकि, चिराग को लगता है कि एक्टिंग में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है. उन्होंने कहा कि उन्हें कंगना रनौत जैसे दोस्त इसलिए मिले क्योंकि वह इस दुनिया में आए। चिराग के शब्दों में, “कार्य करने की कोशिश करने से मुझे केवल एक ही फायदा हुआ है। कंगना और मैं बहुत अच्छे दोस्त बन गए।’ तब से हम दोस्त बने हुए हैं. मैं वास्तव में संसद में कंगना से मिलना चाहता था।’ क्योंकि पिछले कुछ सालों की व्यस्तता में उनसे संवाद कम हो गया था.”

आख़िरकार चिराग की उम्मीद पूरी हो गई. इतने सालों बाद एक-दूसरे को देखने के लिए उत्साहित थे कंगना-चिराग. क्या आपने कंगना को राजनीति में आने की कोई सलाह दी थी? इस सवाल के जवाब में चिराग ने कहा, ”कंगना को किसी सलाह की जरूरत नहीं है. अभिनेत्री और मंडी सांसद के बारे में उन्होंने कहा, “एक बात मेरे लिए स्पष्ट है। यह सच है कि कंगना पर बोलने की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन इसीलिए लोग उन्हें पसंद करते हैं। कंगना को पता है कि कब क्या बोलना है.”

इस बार कानून तोड़ने के आरोप में केंद्रीय मंत्री खुद सजा के घेरे में हैं. बिहार पुलिस ने तेज गति से गाड़ी चलाने के लिए चिराग पासवान की कार पर जुर्माना लगाया। बिहार के एक टोल प्लाजा पर नई ई-डिटेक्शन तकनीक लगाई गई है. पता चला कि चिराग की कार निर्धारित गति से तेज चल रही थी. इसके बाद उन्हें जुर्माने का चालान भेज दिया गया.

सूत्रों के मुताबिक, चिराग की कार राष्ट्रीय राजमार्ग पर हाजीपुर से चंपारण की ओर जा रही थी. सांसद भी थे वहां उन्हें जुर्माना भेजा गया है. हालांकि रामबिलास पासवान के बेटे ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की. यह ई-डिटेक्शन तकनीक यह पता लगाती है कि वाहन निर्धारित गति पर चल रहा है या नहीं। यह तकनीक हाल ही में बिहार के 13 टोल प्लाजा पर लगाई गई है. इस तकनीक के जरिए एक सप्ताह में 16 हजार 755 वाहनों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने का मामला दर्ज किया गया है। राज्य ने 9.49 करोड़ रुपये एकत्र किये हैं.

बिहार के परिवहन विभाग ने 7 से 15 अगस्त तक कानून का उल्लंघन करने पर 16,755 वाहनों पर जुर्माना लगाया. इनमें से 9,676 वाहन दूसरे राज्यों में पंजीकृत हैं। शेष 7,079 वाहन बिहार में पंजीकृत हैं। इस सवाल के जवाब में चिराग ने कहा, ”कंगना को किसी सलाह की जरूरत नहीं है. अभिनेत्री और मंडी सांसद के बारे में उन्होंने कहा, “एक बात मेरे लिए स्पष्ट है। यह सच है कि कंगना पर बोलने की जिम्मेदारी नहीं है, लेकिन इसीलिए लोग उन्हें पसंद करते हैं। कंगना को पता है कि कब क्या बोलना है.”

काम के लिए 48 घंटे जागते हैं राजकुमार, लिखते हैं शिकायतें! शरीर को क्या नुकसान होता है?

सिर्फ राजकुमार राव ही नहीं, ऐसे कई वर्कहोलिक्स हैं जो काम के लिए नींद से समझौता कर लेते हैं। हर दिन कम सोने की आदत के कारण हर दिन की शुरुआत थकान से होती है। ये आदत और क्या पहुंचा रही है शरीर को नुकसान?
राजकुमार राव कभी-कभी लगातार 48 घंटे तक जागते हैं, यह खुलासा उनकी पत्नी अभिनेत्री पत्रलेखा पाल ने हाल ही में एक इंटरव्यू में किया। पत्रलेखा ने कहा, ”राजकुमार को अपने काम के प्रति गहरा प्यार और समर्पण है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक वह काम के बारे में ही सोचते रहते हैं। रात में लंबे समय तक जागता रहता है, कभी-कभी लगातार 48 घंटों तक नहीं सोता। मैं उससे कहता हूं, यह प्रथा शरीर को नुकसान पहुंचा रही है, लेकिन वह वही करता है जो वह सोचता है।”

सिर्फ राजकुमार राव ही नहीं, ऐसे कई वर्कहोलिक्स हैं जो काम के लिए नींद से समझौता कर लेते हैं। हर दिन कम सोने की आदत के कारण हर दिन की शुरुआत थकान से होती है। नतीजतन, शरीर पूरे दिन थका हुआ महसूस करता है। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते, वे वास्तव में इस आदत को अपनाने के लिए अपना जीवन जी रहे हैं। मौत का डर. क्या आप जानते हैं नियमित नींद की कमी आपको कितना नुकसान पहुंचा रही है, कौन से खतरे आपका इंतजार कर रहे हैं –

डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि रात की नींद कम से कम 6 घंटे की होनी चाहिए। डॉक्टर शुभम साहा ने कहा, ”यह एक आदत शरीर में हजारों बीमारियां पैदा करने के लिए काफी है. वयस्कों को काम करने के लिए प्रतिदिन 7-8 घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। इससे कम सोने से शरीर में चर्बी बढ़ सकती है। और मोटापा कई बीमारियों पर हमला कर सकता है।

1. अगर आप ठीक से नहीं सोते हैं तो ब्लड प्रेशर अचानक से बढ़ सकता है। भले ही आपको उच्च रक्तचाप न हो, यह अचानक शुरू हो सकता है। और यदि आपको पहले से ही यह स्थिति है, तो यह रक्तचाप के स्तर को बढ़ा सकता है।

2. अगर आप ठीक से नहीं सोएंगे तो आपका वजन बढ़ सकता है। क्योंकि अगर आप नहीं सोते हैं तो शरीर में भूख बढ़ाने वाले हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। परिणामस्वरूप, अधिक भोजन के सेवन से स्वाभाविक रूप से वजन बढ़ता है। नींद की कमी से पाचन संबंधी समस्याएं भी हो सकती हैं।

3. जब नींद का समय कम हो जाता है तो त्वचा पर इसके लक्षण दिखने लगते हैं। चेहरे पर मुहांसे उग आते हैं. क्योंकि, अगर आप नहीं सोएंगे तो हार्मोनल समस्याएं होंगी। जिसके परिणामस्वरूप त्वचा पर असर पड़ने लगता है।

4. नींद की कमी से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। परिणामस्वरूप, सर्दी और फ्लू होने की संभावना भी बढ़ जाएगी। और वह संक्रमण आसानी से ठीक नहीं होता है।

5. नींद की कमी के कारण रक्त शर्करा का स्तर बढ़ सकता है। नींद की कमी से पाचन क्रिया ख़राब हो जाती है। यह शरीर में इंसुलिन के संतुलन को भी प्रभावित करता है। यह शुगर के स्तर में उतार-चढ़ाव के कारण होता है। इसलिए डायबिटीज के मरीजों के लिए अच्छी नींद बहुत जरूरी है।

अगर बारिश हो भी रही हो तो भी हवा में नमी रहती है. किसी भी चीज़ में कोई राहत नहीं है. काम से लौटने के बाद उसके लिए ठंडे कमरे में बैठने का कोई रास्ता नहीं है। क्योंकि, घर का कूलिंग डिवाइस भी खराब हो गया है. ऐसे में नींद तो दूर आप चैन से बैठ भी नहीं पाते। ठंडी धातु. इसलिए आप बार-बार नहीं नहा सकते. इसलिए क्या करना है?

1) निर्बाध नींद के लिए अनुकूल वातावरण आवश्यक है। कपड़ों से लेकर चादर तक सब कुछ अगर सूती हो तो बेहतर है। अगर बजट थोड़ा ज्यादा है तो आप सिल्क या सैटिन की ड्रेस भी पहन सकती हैं। चादरों के लिए लिनेन का उपयोग किया जा सकता है।

2) जब तक धूप रहे घर की खिड़कियाँ और दरवाज़े बंद रखें। यह टोटका घर को रखता है ठंडा रात के समय कमरे में ज्यादा रोशनी न जलाएं। लाइट जलाने पर भी कमरे की गर्मी बढ़ जाती है।

3) बहुत से लोग गर्मियों में ठंडे पानी से नहाते हैं। इससे अस्थायी राहत मिलती है. लेकिन यह काम नहीं करता. बल्कि आप रात को सोने से पहले गुनगुने पानी से नहा सकते हैं। आपको आराम मिलेगा.

4) सोने से दो घंटे पहले व्यायाम, खेल-कूद या सोने जैसी गतिविधियां नहीं करनी चाहिए। इससे तंत्रिका तनाव बढ़ता है। शरीर का तापमान भी बढ़ सकता है।

5) रात के खाने का भी ध्यान रखना जरूरी है. ऐसे खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए जो पाचन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। आप तैलीय भोजन की जगह प्रोटीन युक्त भोजन खा सकते हैं। अंडे, चिकन मांस से बने सलाद को आहार में शामिल किया जा सकता है।

अगर धोनी रिटायर हो गए तो सीएसके के विकेट के पीछे कौन खड़ा होगा? चेन्नई को तलाश है माही का विकल्प, नजरे तीन

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दलीप ट्रॉफी में ईशान किशन का शतक. उन्होंने लाल गेंद क्रिकेट में वापसी की और शतक बनाया। दलीप चोट के कारण ट्रॉफी के पहले मैच में नहीं खेल सके थे. दूसरे मैच में ईशान ने टीम में जगह मिलते ही शतक जड़ दिया.

दलीप के दूसरे मैच में इंडिया सी का मुकाबला इंडिया बी से हुआ. ईशान ने उस मैच में 111 रन बनाए थे. वह चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे और 126 गेंदें खेलीं. ईशान ने पिछले सीजन में घरेलू क्रिकेट नहीं खेला था. जिसके चलते उन्हें बोर्ड के सालाना कॉन्ट्रैक्ट से बाहर कर दिया गया. हालाँकि वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट टीम में थे, लेकिन उन्हें नहीं खिलाया गया। इसके बाद ईशान ने ये कहकर टीम छोड़ दी कि वो मानसिक रूप से बीमार हैं. वापस आने के बाद उन्होंने घरेलू क्रिकेट नहीं खेला. हालांकि आईपीएल के लिए तैयार हूं. वहां खेला. ऐसा माना जा रहा था कि ईशान को लाल गेंद से क्रिकेट खेलने में कोई दिलचस्पी नहीं है. उन्होंने ही गुरुवार को मुकेश कुमार के खिलाफ शतक जड़ा था.

ईशान ने चयनकर्ताओं को सैकड़ों संदेश भेजे. बांग्लादेश के खिलाफ ऋषभ पंत और ध्रुव जुरेल को 16 सदस्यीय टीम में जगह मिली। इस बार दिलीप के शतक लगाने से ईशान भी मुकाबले में हैं. इंडिया सी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए दिन की समाप्ति तक 5 विकेट खोकर 357 रन बनाए. दो सलामी बल्लेबाजों रुतुराज गायकवाड़ और साई सुदर्शन ने 96 रन की साझेदारी की. रुतुराज ने 46 रन बनाए. सुदर्शन ने 43 रन बनाये. रजत पाटीदार तीसरे नंबर पर उतरे और 40 रन बनाए. पिता इंद्रजीत ने ईशान के साथ बनाई जोड़ी. उन्होंने 78 रन बनाए. लेकिन अभिषेक को रन नहीं मिला. वह 12 रन बनाकर आउट हुए.

इंडिया बी के लिए मुकेश ने तीन विकेट लिए। नवदीप सैनी और राहुल चाहर ने एक-एक विकेट लिया. पांच विकेट गंवाने के बावजूद इंडिया सी बड़ी बढ़त की ओर है.

महेंद्र सिंह धोनी अपने क्रिकेट करियर के अंतिम पड़ाव पर हैं. आप किसी भी दिन क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास लेने का फैसला कर सकते हैं।’ यह मामला चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारियों के लिए अज्ञात नहीं है। इसलिए, आईपीएल फ्रेंचाइजी धोनी के वैकल्पिक विकेटकीपर की तलाश कर रही है। ये तो धोनी ही जानते हैं कि वो कितने दिन खेलेंगे. सीएसके अधिकारी चाहते हैं कि माही एक या दो साल और खेलें। लेकिन उसके बाद टीम के विकेटकीपर की जिम्मेदारी कौन संभालेगा? चेन्नई के अधिकारी विकेट के पीछे विश्वसनीय दस्तानों की तलाश कर रहे हैं। वे आईपीएल की अगली नीलामी में उस विकेटकीपर को चुनना चाहते हैं.

धोनी ने अचानक संन्यास ले लिया ताकि टीम को कोई परेशानी न हो. धोनी ने संन्यास को लेकर नहीं खोला मुंह हालांकि, पिछले आईपीएल से पहले उन्होंने चेन्नई की कप्तानी छोड़कर संकेत दे दिया था. इसलिए चेन्नई के अधिकारी जोखिम नहीं लेना चाहते.

चेन्नई सूत्रों के मुताबिक उनकी नजर तीन विकेटकीपरों पर है. पहली पसंद निश्चित तौर पर ऋषभ पंत ही हैं. धोनी की तरह ही, वह विकेट के पीछे दस्तानों और सामने बल्ले से भी पारंगत हैं। नेतृत्व कर सकते हैं लेकिन दिल्ली कैपिटल्स के कप्तान अपनी मर्जी से उपलब्ध नहीं हैं. क्योंकि दिल्ली के अधिकारियों को नहीं लगता कि पंत जैसे क्रिकेटर को चेन्नई के अधिकारी रिहा करेंगे. किसी कारण से, अगर पंत का नाम नीलामी के लिए आया तो सीएसके ने अपनी पूरी ताकत से कूदने का फैसला किया। सीएसके के बॉस अगले कुछ वर्षों के लिए निश्चिंत हो सकते हैं क्योंकि पंत युवा हैं। ईशान किशन सीएसके सरकार की दूसरी पसंद हैं. ईशान पिछले सीजन तक मुंबई इंडियंस के लिए खेले थे. वह भी धोनी की तरह झारखंड के क्रिकेटर हैं. विकेट कीपर के रूप में कुशल. अच्छा चमगादड़ हाथ. कम उम्र सीएसके अधिकारियों को लगता है कि इशान दीर्घकालिक निवेश के लिए बुरा नहीं होगा। लेकिन मुंबई उनका साथ छोड़ेगी या नहीं, ये तय नहीं है. हालाँकि, यदि अवसर मिले तो चेन्नई के अधिकारी उसे पकड़ना चाहते हैं

लोकेश राहुल विकेटकीपर-बल्लेबाज के रूप में चेन्नई सरकार की पसंद सूची में तीसरे स्थान पर हैं। लखनऊ सुपर जाइंट्स के कप्तान पर चेन्नई के मालिकों की नजर है। कुशल बल्लेबाज विकेटकीपर के रूप में भी विश्वसनीय होता है। एक क्रिकेटर के तौर पर भी अनुभवी. जरूरत पड़ने पर टीम का नेतृत्व कर सकते हैं. सकारात्मकताएँ अनेक हैं। लेकिन राहुल थोड़े बड़े हैं. अगर पंत या इशान नहीं मिले तो चेन्नई के अधिकारी राहुल को पकड़ने की कोशिश करेंगे। लेकिन यहां भी समस्या वही है. क्या लखनऊ के नेता संजीव गोयनका पिछले तीन सीज़न के कप्तान की करेंगे नीलामी? पिछले सीजन में गोयनका ने राहुल को सार्वजनिक तौर पर फटकार लगाई थी. हालांकि बाद में कोलकाता के उद्योगपति ने राहुल की नाराजगी दूर करने की हर कोशिश की.

धोनी के प्रतिस्थापन के रूप में चेन्नई के अधिकारियों द्वारा पसंद किए गए तीन क्रिकेटरों के नाम नीलामी सूची में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता है। सही कहा, सूची में शामिल होने की संभावना कम है। हालाँकि, चेन्नई के अधिकारी इस अवसर को चूकने से हिचक रहे हैं। अगर एक ही व्यक्ति है तो भी वे उसे टीम में लेने के लिए कूद पड़ेंगे।