Friday, March 6, 2026
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अमित शाह ने राहुल गांधी पर कसा तंज.

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बीजेपी नेता लगातार राहुल गांधी पर तंज कस रहे हैं कि क्या वह इस बार अपनी पुरानी सीट अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. जब से राहुल ने केरल की वेनाड सीट से दोबारा नामांकन दाखिल किया है, बीजेपी नेता लगातार इस मुद्दे पर उन पर हमला कर रहे हैं. अमेठी की मौजूदा बीजेपी सांसद स्मृति ईरानी आए दिन राहुल पर तंज कस रही हैं. इस बार केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राहुल के सुर में सुर मिलाते हुए उनका मजाक उड़ाया. राहुल के अमेठी संसदीय क्षेत्र में न जाने को लेकर उनका मजाक उड़ाने के साथ ही अमित शाह ने कहा कि राहुल को अमेठी संसदीय क्षेत्र से लोकसभा चुनाव लड़ना चाहिए.

न तो पार्टी और न ही खुद राहुल ने अभी तक अमेठी के लिए कांग्रेस उम्मीदवार पर कोई फैसला लिया है. राहुल ने कल कहा था कि अमेठी में उनके चुनाव लड़ने पर पार्टी जो भी फैसला करेगी, वह उसे स्वीकार होंगे। कांग्रेस के एक सूत्र के मुताबिक, अमेठी में उम्मीदवारों के चयन में अभी वक्त है. ऐन वक्त पर कांग्रेस राहुल को दोबारा केंद्र में खड़ा कर चौंका सकती है. ऐसे में राहुल पीछे नहीं हटे, इससे यह संदेश दिया जा सकता है कि कांग्रेस के अंदरूनी लोग बीजेपी के दुष्प्रचार को खारिज कर चुनाव में फायदा उठाने की उम्मीद कर रहे हैं. राहुल को लेकर बीजेपी खेमे के लगातार चल रहे इस दुष्प्रचार के बीच गुरुवार को एक बार फिर अमेठी चर्चा में आ गई. इस दिन अमेठी के प्रभावशाली कांग्रेस नेता और कांग्रेस के प्रदेश सह-समन्वयक विकास अग्रहरि भाजपा में शामिल हो गए, इसकी घोषणा भाजपा नेताओं ने दोपहर में की। बताया जा रहा है कि विकास अग्रहरि ने सांसद स्मृति ईरानी की मौजूदगी में बीजेपी का दामन थामा है. कार्यक्रम में पहुंचे बीजेपी के कई प्रवक्ताओं ने इसे कांग्रेस नेता के ‘हृदय परिवर्तन’ के तौर पर प्रचारित करने के अलावा इसे कांग्रेस के लिए बड़ा झटका बताया. लेकिन कुछ देर बाद बिकास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर बताया कि वह बीजेपी में शामिल ही नहीं हुए हैं. वह कांग्रेस में हैं और रहेंगे. विकास ने बताया कि इस दिन वह किसी काम से सांसद स्मृति ईरानी से मिलने गये थे. वहां उनकी गर्दन काट दी गई और बीजेपी ने वो तस्वीर दिखाकर झूठ फैलाना शुरू कर दिया. कांग्रेस नेता की ये टिप्पणियां वायरल होने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी पर ‘झूठ का सौदागर’ कहकर हमला बोला.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने त्रिपुरा में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते हुए वाम-कांग्रेस गठबंधन पर निशाना साधा। सोमवार को जनजाति बहुल कुमारघाट में बीजेपी की बैठक में उन्होंने उग्रवाद और वामपंथ में अशांति का मुद्दा उठाया और कहा, ”कम्युनिस्टों ने यहां युवाओं को बंदूकें थमा दीं. लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें लैपटॉप सौंपे।”

पूर्व भाजपा अध्यक्ष शाह ने यह भी दावा किया कि त्रिपुरा में जनजाति क्षेत्रों का विकास भाजपा सरकार और केंद्र का मुख्य लक्ष्य है। उन्होंने कहा, ”सीपीएम ने दशकों तक इस राज्य पर शासन किया है. उन्होंने महाराजा वीर विक्रमकिशो माणिक्य के योगदान को कमतर करने की कोशिश की है।’ लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सम्मान में अगरतला हवाई अड्डे का नाम महाराजा वीर विक्रम के नाम पर रखा। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस बार के लोकसभा चुनाव में त्रिपुरा समेत पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र से कांग्रेस का सफाया हो जाएगा. 19 अप्रैल को उत्तर-पूर्वी त्रिपुरा के दो लोकसभा क्षेत्रों में से एक पर पहले चरण का मतदान होगा। वहीं 26 अप्रैल को दूसरे राउंड में. चुनावी पंडितों के एक वर्ग का मानना ​​है कि वाम-कांग्रेस गठबंधन और भाजपा के बीच कड़ी टक्कर हो सकती है। इस बार बीजेपी ने त्रिपुरा के राजघराने के बेटे प्रद्योत किशोर देववर्मन की पार्टी टिपरा माथा के साथ गठबंधन किया है. प्रद्योत की बहन कीर्ति सिंह देबवर्मा पूर्वी त्रिपुरा सीट से ‘पद्म’ चुनाव चिह्न पर उम्मीदवार रही हैं। पश्चिम त्रिपुरा निर्वाचन क्षेत्र में पूर्व मुख्यमंत्री बिप्लब देब।

वहीं, जनजाति बहुल पूर्वी त्रिपुरा सीट पर गठबंधन की ओर से सीपीएम चुनाव लड़ रही है. पूर्व विधायक राजेंद्र रियांग उम्मीदवार बने हैं. वहीं, पश्चिम त्रिपुरा केंद्र में गठबंधन की ओर से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष आशीष साहा चुनाव लड़ रहे हैं. 2019 में बीजेपी ने त्रिपुरा में दो सीटें जीतीं. करीब 49 फीसदी वोट मिले. दोनों में दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को 25 फीसदी से ज्यादा वोट मिले. तीसरे स्थान पर 17 फीसदी के साथ लेफ्ट का कब्जा है.

उदयन गुहा को भेटागुड़ी में विरोध का सामना करना पड़ा.

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बीजेपी नेता गिरफ्तार! गांव में प्रवेश करते ही उदयन के आसपास महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन किया, मंत्री शुक्रवार को इलाके से चले गए, उदयन मतदान के दिन दिनहाटर वेटागुड़ी के उत्तरपारा इलाके में गए थे. मंत्री के वहां जाते ही ग्रामीण महिलाओं का एक समूह उन्हें घेर कर विरोध करने लगा. राज्य के मंत्री उदयन गुहा को विरोध का सामना करना पड़ा. यह आरोप लगाते हुए कि भाजपा नेता को उनके ‘उकसाने’ पर गिरफ्तार किया गया, ग्रामीणों ने उत्तर बंगाल विकास मंत्री के आसपास विरोध प्रदर्शन किया। उदयन के दावे पर पलटवार करते हुए पुलिस ने बीजेपी नेता को ‘अनैतिक’ काम करने और उन्हें उकसाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.

शुक्रवार को मतदान के दिन उदयन बेतागुरी के दिनहाटर के उत्तरपाड़ा इलाके में गए थे. मंत्री के वहां जाते ही ग्रामीण महिलाओं का एक समूह उन्हें घेर कर विरोध करने लगा. उनके मुताबिक, तृणमूल नेता गांव के शांत माहौल को बिगाड़ने आये हैं. पुलिस ने हालात पर काबू पाने की कोशिश की. उनका ग्रामीणों से झगड़ा हो गया। बाद में पुलिस की मौजूदगी में उदयन गांव से चला गया.

हालांकि, मंत्री ने कहा कि विरोध प्रदर्शन भाजपा द्वारा आयोजित किया गया था। और उनके आदेश पर किसी को गिरफ्तार नहीं किया गया. पुलिस ने भाजपा के एक पंचायत सदस्य को अनैतिक कार्य करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इस घटना पर कूचबिहार के बीजेपी उम्मीदवार और केंद्रीय गृह राज्य मंत्री निशित प्रमाणिक उदयन पर कटाक्ष करने से नहीं चूके. उन्होंने कहा, ”पूरा बंगाल धीरे-धीरे संदेशखाली बनता जा रहा है. इस तरह के विरोध प्रदर्शन और भी होंगे.” मतदान से एक दिन पहले गर्मी में आए दिन तृणमूल कार्यकर्ताओं की पिटाई का आरोप है. राज्य मंत्री उदयन गुहा ने अस्पताल में घायल कार्यकर्ताओं से मुलाकात की. आरोप है कि मजदूरों के सिर पर किसी धारदार हथियार से वार किया गया. मतदान की पूर्व संध्या पर, कूचबिहार का गर्म दिन। बीजेपी पर भी तृणमूल कार्यकर्ताओं की पिटाई के अलावा धारदार हथियार से घायल करने का आरोप लगा है. इस घटना में दो तृणमूल कार्यकर्ता घायल हो गये. उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया. उत्तर बंगाल विकास मंत्री उदयन गुहा ने अस्पताल में उनसे मुलाकात की। हालांकि, बीजेपी ने तृणमूल कार्यकर्ताओं पर हमले के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. उनका जवाबी दावा यह है कि पार्टी में गुटीय संघर्ष के कारण तृणमूल कार्यकर्ताओं ने उनकी पिटाई की है।

तृणमूल ने आरोप लगाया कि पार्टी के दो कार्यकर्ताओं अजीमुद्दीन मिया और दिलीप बर्मन को चुनाव संबंधी काम के लिए बूथ अध्यक्ष के घर भेजा गया था। वहां जाते समय उन पर हमला किया गया. आरोप बीजेपी समर्थित उपद्रवियों पर लग रहे हैं. इस संदर्भ में पंचायत समिति तृणमूल अध्यक्ष मोतिउर रहमान ने कहा, ”दोनों घायल तृणमूल के सक्रिय कार्यकर्ता हैं. शुक्रवार को यहां वोट करें. इससे पहले हमने उनके बूथ अध्यक्ष के घर गाला, मुहर और एजेंट फॉर्म भेजा था। वहां जाते वक्त बीजेपी से जुड़े कुछ बदमाशों ने अचानक उन पर हमला कर दिया. उसने एक शख्स के सिर पर तलवार से वार किया. उनके सिर पर 16 से 18 टांके लगे हैं. दाे ने दूसरे व्यक्ति के माथे का बड़ा हिस्सा काट दिया. हाथ में भी चोट लगी है.

उदयन ने अस्पताल में घायलों से मुलाकात की। वहां से बाहर आकर उन्होंने कहा, ”शाम तक हमारे दो कार्यकर्ता सड़क से पैदल बाजार की ओर जा रहे थे. उसी वक्त बीजेपी के गुंडों ने हमला कर दिया. किसी धारदार हथियार से सिर पर वार किया. एक व्यक्ति के सिर में 12 टांके आये. अब डॉक्टर उन्हें सीटी स्कैन के लिए भेज रहे हैं. बीजेपी योजनाबद्ध तरीके से इस इलाके में गुंडागर्दी कर रही है.” उन्होंने कहा, “हमारे घायल कार्यकर्ता मतदान नहीं कर पाएंगे या चुनाव में काम नहीं कर पाएंगे, उनके परिवार व्यस्त रहेंगे, बीजेपी को लगता है कि इससे फायदा होगा।” इसके बावजूद आम लोगों को मतदान केंद्रों तक ले जाकर मतदान कराना हमारी जिम्मेदारी है। लोग बीजेपी को संदेश देंगे.”

इस संबंध में दिनहाटा शहर के मंडल अध्यक्ष और भाजपा के जिला सचिव अजय रॉय ने कहा, ”इलाके के तृणमूल कार्यकर्ता कल रात से हमारे कार्यकर्ताओं पर अत्याचार कर रहे हैं. अब पैसों के बंटवारे को लेकर आपस में असमंजस की स्थिति है और वे आपस में लड़ने लगे हैं. सांप्रदायिक झड़पों में उनके कार्यकर्ता घायल हुए हैं. इस घटना का बीजेपी से कोई लेना-देना नहीं है. इस घटना के संबंध में गुरुवार को कूचबिहार के पुलिस अधीक्षक दुतिमान भट्टाचार्य से संपर्क करने का प्रयास किया गया. लेकिन उसने फोन नहीं उठाया.

कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या में किन लोगों पर चलाया गया है मुकदमा?

आज हम आपको बताएंगे कि कार सेवा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या में आखिर किन लोगों पर मुकदमा चलाया गया है! नानकमत्ता गुरुद्वारा के कार सेवा डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह हत्याकांड में पुलिस ने पांच लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया है। इस हत्याकांड में पुलिस ने सरबजीत सिंह निवासी ग्राम मिवां भिंड जिला तरनतारन पंजाब और बाइक पर पीछे बैठे अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टा निवासी सिरोही बिलासपुर उत्तर प्रदेश को मुख्य आरोपी बनाया है। वहीं संदेह के आधार पर तीन और लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है, जिसमें एक पूर्व आईएएस भी बताया जा रहा है। हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। गुरुवार को नानकमत्ता कार सेवा डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। जांच के दौरान पुलिस को आरोपियों के कमरे से एक आईडी कार्ड मिला था, जो तरनतारन पंजाब निवासी का था। इसके बाद पुलिस की टीमें उत्तर प्रदेश और पंजाब के लिए रवाना हो गई थी। बाबा तरसेम सिंह के हत्यारे 19 मार्च से गुरुद्वारा सराय में ठहरे हुए थे। इन लोगों ने चंपावत स्थित रीठा साहिब जाने की बात कह कर कमरा बुक कराया था। गुरुद्वारा सराय में कातिल 19 मार्च से ठहरे हुए थे। हत्यारों ने सराय का कमरा नंबर 23 को बुक कराया था। दो दिन के बाद वे दोनों कहां चले गए, किसके यहां रुके, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं। वे दोनों गुरुवार सुबह ही कमरे पर पहुंचे थे। अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि हत्यारे पंजाब के रहने वाले हैं तो वह नानकमत्ता कैसे पहुंचे। कार, बाइक या ट्रेन से वे दोनों नानकमत्ता आए थे। पंजाब से नानकमत्ता की दूरी 418 किलोमीटर के लगभग है तो ऐसे में पंजाब से बाइक पर आना मुश्किल है। बिना नंबर की बाइक उन दोनों को किसने उपलब्ध कराई यह भी जांच का विषय है।

इन दोनों के इस कमरे में ठहरने और गुरुवार को बाबा तरसेम सिंह की हत्या के मामले में संदेह है कि इन दोनों ने इतने दिनों तक यहां रेकी करी और गुरुवार सुबह बाबा तरसेम सिंह जब डेरे में कमरे के बाहर बाहर अकेले बैठे दिखे तो गोलियां चलाकर उनकी हत्या कर दी। पुलिस के अनुसार जल्द ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर मामले का खुलासा कर दिया जाएगा। पुलिस ने गुरुवार को ही इस मामले में एसआईटी गठित कर दी थी। पुलिस को दी गई तहरीर के अनुसार दोनों हत्यारोपी सराय में बिना किसी निजी वाहन के आए थे। इस दौरान उनके पास कोई हथियार भी नहीं देखा गया था।

घटना के दौरान प्रयुक्त की गई मोटरसाइकिल और हथियार किसी स्थानीय व्यक्ति ने ही उनको उपलब्ध कराई हैं। तहरीर में यह भी कहा गया है कि वारदात को अंजाम देने वाला दूसरा व्यक्ति जो मोटरसाइकिल में पीछे बैठा हुआ था, उसका नाम अमरजीत सिंह उर्फ बिट्टू उर्फ पुत्र सुरेंद्र सिंह ग्राम सिरोही थाना बिलासपुर जिला रामपुर है। बाबा तरसेम सिंह डेरा कर सेवा गुरुद्वारा साहिब की संपत्ति को खुर्द होने से रोकते थे, इसीलिए कुछ और लोग भी इस हत्याकांड में शामिल हो सकते हैं। कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर एक पोस्ट की गई थी, जिसके बाद से बाबा तरसेम सिंह की हत्या का संदेह जताया जा रहा था।

पुलिस ने हत्याकांड में दो मुख्य आरोपियों के साथ ही गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी श्री नानकमत्ता साहिब के प्रधान और पूर्व आईएएस हरबंस सिंह चुघ, तराई महासभा के उपाध्यक्ष प्रीतम सिंह संधू निवासी खेमपुर गदरपुर और गुरुद्वारा श्री हरगोविंद सिंह रतनपुर नवाबगंज के मुख्य जत्थेदार अनूप सिंह को भी आरोपी बनाया गया है। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर किया गया है। बता दें कि बाबा तरसेम सिंह की गुरुवार की सुबह 6:30 बजे के लगभग डेरे के बाहर उस समय हत्या कर दी गई थी जब वे अकेले बैठे हुए थे। डेरा प्रमुख बाबा तरसेम सिंह की हत्या के बाद नानकमत्ता कार सेवा डेरा परिसर में अर्ध सैनिक बल तैनात कर दिया गया है।

शुक्रवार को फेसबुक में सरबजीत पुत्र स्वरूप सिंह निवासी तरनतारन पंजाब ने एक पोस्ट डाली। इस पोस्ट में लिखा है ‘वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह। नानकमत्ता में प्रधान सेवक तरसेम सिंह से बदला ले लिया गया। मैंने ऐसा इसलिए किया क्योंकि तरसेम सिंह ने उत्तराखंड के सीएम पुष्कर सिंह धामी के स्वागत के लिए गुरुघर में लड़कियों को नचाया था। यह सिखों की भावना को आहत करने वाली बात थी। कई सिख संगठनों ने विरोध किया, लेकिन वह साधु सरकारी साहब के दम पर गुंडागर्दी करता था।

यहां सवाल यह भी उठ रहा है कि गुरुद्वारा सराय में आईडी देकर कोई भी 2 दिन तक रह सकता है। इतने दिनों तक इन दोनों को कैसे रूकने दिया गया। अगर कोई हत्याकांड को अंजाम देने के लिए आया था तो वह अपना पहचान पत्र क्यों देगा। हत्यारों के पास बंदूक पूनिया थी, लेकिन उन्हें किसी ने भी नहीं रोका। तरनतारन से उधम सिंह नगर तक अगर वह बंदूक पूनिया लेकर आए तो पुलिस की पकड़ में क्यों नहीं आए।

जमीन के विवाद को लेकर भी हत्या करने की चर्चा है जबकि हत्यारों में से एक का आईडी कार्ड पंजाब का होने के कारण हत्या को आतंकवाद से जोड़कर भी देखा जा रहा है। सवाल यह भी उठ रहा है कि कड़ी सुरक्षा के बीच हत्यारे बंदूक पूनिया लेकर डेरा तक कैसे पहुंचे और उनके पास बाइक कहां से आई। बाबा के डेरे में अकेले बैठे होने की खबर हत्यारों को किसने दी।

मई में शुरू होने वाली चार धाम यात्रा के लिए कैसे करवाया जाए रजिस्ट्रेशन?

आज हम आपको बताएंगे कि मई में शुरू होने वाली चार धाम यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कैसे करवाया जाए! उत्तराखंड में महत्वपूर्ण चार धाम यात्रा शुरू होने वाली है। केदारनाथ धाम, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री यात्रा की शुरुआत 10 मई से होगी। 10 मई को केदारनाथ धाम के साथ-साथ गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा शुरू हो जाएगी। 12 मई को बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही चार धाम यात्रा पूरी तरह से शुरू हो जाएगी। इसी के साथ चारों धाम तक तीर्थयात्री पहुंच सकेंगे। इसको लेकर उत्तराखंड सरकार ने तैयारी शुरू कर दी है। चार धाम यात्रा के लिए बर्फ को हटाया जा रहा है। धामों तक पहुंच पथ का निर्माण किया जा रहा है। साथ ही, यात्रा को लेकर उत्तराखंड के सरकार की वेबसाइट को एक्टिवेट किया गया है। यहां से तीर्थयात्री ग्रीन पास ले सकते हैं। इसके अलावा ऑफलाइन पास की भी व्यवस्था की गई है। बिना पास के चार धाम यात्रा करना संभव नहीं हो सकेगा। चार धाम यात्रा के दौरान तीर्थयात्री अलग- अलग देवी- देवताओं की अराधना करते हैं। केदारनाथ धाम 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है। यहां भगवान शिव की पूजा की जाती है। वहीं, बद्रीनाथ धाम में भगवान बदरी यानी विष्णु की पूजा होती है। गंगोत्री धाम गंगा माता के उद्गम और यमुनोत्री माता यमुना के उद्गम के तौर पर पूजा जाता है। सनातन धर्म में चार धाम का अलग ही महत्व है। हिमालय की चोटियों के बीच स्थित चारों धाम को सनातन मान्यता के अनुसार मोक्ष स्थल माना जाता है। चार धाम यात्रा को मोक्ष प्राप्ति के लिए एक बड़े कदम के रूप में माना जाता है। चार धाम की यात्रा से मन को शांति मिलती है। यही वजह है कि हर साल लाखों तीर्थयात्री चार धाम की यात्रा के लिए पहुंचते हैं। चार धाम उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय क्षेत्र में स्थित है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, चार धाम की यात्रा पश्चिम से पूर्व की ओर की जाती है। यमुनोत्री से यात्रा की शुरुआत कर गंगोत्री, केदारनाथ और फिर बद्रीनाथ तक की यात्रा कर सकते हैं।

चार धाम की यात्रा आप सड़क मार्ग या हेलिकॉप्टर से कर सकते हैं। यह यात्रा दिल्ली, हरिद्वार, ऋषिकेश या देहरादून से शुरू की जा सकती है। चार धाम की यात्रा के लिए बायोमेट्रिक रजिस्ट्रेशन अनिवार्य कर दिया गया है। चार धाम यात्रियों के लिए आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, या पासपोर्ट जैसे आवश्यक दस्तावेज को पास में रखना जरूरी है। चार धाम यात्रियों की सुविधा के लिए डीलक्स और बजट आवास की सुविधा मिलती है। हेलिकॉप्टर की बुकिंग आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों तरीकों से कर सकते हैं। इसके अलावा चलने में असमर्थ लोगों के लिए पालकी, घोड़ा और पिट्‌ठू की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। तीर्थयात्रियेां को जैकेट, दस्तानेद्व स्वेटर, ऊनी मोजे और रेनकोट रखना जरूरी है। ग्रिप वाले आरामदायक जूते पहनने की सलाह तीर्थयात्रा के दौरान दी जाती है।

चार धाम की यात्रा सड़क मार्ग के जरिए दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से शुरू की जा सकती है। ट्रेन से आप हरिद्वार तक पहुंच सकते हैं। हरिद्वार स्टेशन दिल्ली समेत देश के विभिन्न राज्यों से सीधा जुड़ा हुआ है। उत्तराखंड राज्य परिवहन निगम और निजी ट्रांसपोर्टर की बसें आपका इन तीर्थस्थलों तक पहुंचा सकती है। देहरादून, हरिद्वार और ऋषिकेश से टैक्सी के जरिए भी आप इन तीर्थस्थलों तक पहुंच सकते हैं। हरिद्वार स्टेशन पर उतरने के बाद चार धाम यात्रा को पूरा करने के लिए ऋषीकेश हाते हुए बरकोट, जानकी चट्टी से यमुनोत्री पहुंच सकते हैं। वहां से उत्तरकाशी, हरसिल होते हुए गंगोत्री तक जा सकते हैं। इसके बाद घनसाली, अगस्तमुनि, गुप्तकाशी होते केदारनाथ पहुंचा जा सकता है। केदारनाथ धाम की यात्रा के बाद चमोली गोपेश्वर से गोविंद घाट होते बद्रीनाथ पहुंच सकते हैं। बद्रीनाथ में चार धाम की यात्रा पूरी कर आप जोशीमठ से ऋषिकेश होते हरिद्वार पहुंच सकते हैं।

देहरादून के सहस्त्रधारा हेलीपैड से चार धाम के लिए हेलिकॉप्टर सेवा उपलब्ध है। हेलिकॉप्टर के जरिए देहरादून से खरसाली तक पहुंचा जा सकता है। यह यमुनोत्री मंदिर से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं, गंगोत्री मंदिर जाने के लिए निकटतम हेलीपैड हरसिल में है। यह गंगोत्री धाम से 25 किलोमीटर दूर है। बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम मंदिर के पास ही हेलिपैड का निर्माण किया गया है। चार धाम यात्रा के लिए सेरसी, फाटा और गुप्तकाशी से भी हेलिकॉप्टर सेवाएं मिलती हैं। इसके लिए आप ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यम से बुकिंग कर सकते हैं।

चार धाम की यात्रा के लिए बारिश के सीजन से पहले और बाद का समय काफी बेहतर है। इस वर्ष आप मई-जून और सितंबर-अक्टूबर में बेहतर माहौल में यात्रा कर सकते हैं। वैसे बारिश के समय में मौसम विभाग की ओर से खतरे का अलर्ट बार- बार जारी किया जाता है। उस समय यात्रा करने वालों को मौसम विभाग के अलर्ट का विशेष रूप से ख्याल रखने की जरूरत होती है।

क्या अब मायावती दे सकती है अच्छे-अच्छे नेताओं को टक्कर?

यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या मायावती अच्छे-अच्छे नेताओं को टक्कर दे सकती है या नहीं! उत्तर प्रदेश में लोकसभा चुनाव का माहौल गरमा रहा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी पूरे जोर-शोर के साथ चुनावी मैदान में उतर चुकी है। वहीं विपक्ष की ओर से चुनावी प्रचार अभियान का ठीक से आगाज नहीं हो सका है। उम्मीदवारों के स्तर पर ही अभी तक विपक्षी दल क्षेत्र में चुनाव प्रचार अभियान को आगे बढ़ाते दिख रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेता पीएम नरेंद्र मोदी पिछले दिनों मेरठ से प्रचार अभियान का आगाज कर चुके हैं। वहीं, शनिवार को प्रधानमंत्री गाजियाबाद में रोड शो के जरिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश को साधने की कोशिश करते दिखेंगे। भाजपा के मुकाबले में समाजवादी पार्टी यूपी में मुख्य विपक्षी दल के तौर पर खड़ी दिखती है। लेकिन, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उस स्तर पर प्रचार अभियान को नहीं ले जा सके हैं, जिस स्तर पर भाजपा का अभियान चल रहा है। बहुजन समाज पार्टी इस बार चुनावी मैदान में अलग ही तेवर और कलेवर के साथ उतरी है। पार्टी ने सवर्ण, दलित और अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने के लिए बड़े पैमाने पर इन वर्गों में टिकट का वितरण किया है। अब पार्टी के युवा चेहरे और पार्टी सुप्रीमो मायावती के घोषित उत्तराधिकारी आकाश आनंद लोकसभा चुनाव प्रचार अभियान का आगाज कर रहे हैं। शनिवार को आकाश आनंद नगीना लोकसभा सीट से अपने प्रचार अभियान की शुरुआत करेंगे। नगीना लोकसभा सीट बहुजन समाज पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी के गिरीश चंद्र ने नगीना सीट पर बसपा का पताका लहराया था। मोदी- योगी लहर के बावजूद इस सीट पर सपा- बसपा गठबंधन को जीत मिली थी। हालांकि, इस बार बसपा ने नगीना सीट पर उम्मीदवार बदला है। सुरेंद्र पाल को चुनावी मैदान में उतर गया है। वहीं, भाजपा ने ओम कुमार को उम्मीदवार घोषित किया है। इन सब के बीच भीम आर्मी प्रमुख एवं आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद रावण भी नगीना सीट से उम्मीदवार हैं। चंद्रशेखर खुद को काशीराम की राजनीति का असली वारिस बताते रहे हैं। वे दलितों के मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाकर प्रदेश में बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी की कोशिश करते दिखे हैं। हालांकि, उन्हें अभी तक उस स्तर पर सफलता नहीं मिली है। ऐसे में बसपा ने नगीना सीट से अपने युवा चेहरे आकाश आनंद को चुनावी प्रचार मैदान में उतार कर एक तरह से चंद्रशेखर को सीधे तौर पर चुनौती दे दी है। पूरी लड़ाई दलित वोट बैंक को अपने पाले में रखने की मानी जा रही है।

मायावती के भतीजे आकाश आनंद को बसपा में अन्य राज्यों का प्रभारी बनाया गया है। यूपी और उत्तराखंड की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी मायावती ने अपने हाथों में रखी है। हालांकि, मायावती यूपी के बेस को भी मजबूत करना चाहती हैं। मोदी-योगी की फ्री राशन स्कीम ने दलित वोट बैंक को अपने पाले में लाने में बड़ी भूमिका निभाई है। ऐसे में मायावती आकाश आनंद के जरिए युवा दलित- अल्पसंख्यक वोट बैंक को साधने की कोशिश करती दिख रही हैं। युवाओं के जरिए दलित समाज के बीच कांशीराम की आबादी के अनुसार शासन में भागीदारी के नारे को एक बार फिट करने की कोशिश हो रही है। विदेश से पढ़ाई करके आए आकाश आनंद को दलितों का यूथ आइकन के रूप में पेश करने की कोशिश यूपी के चुनावी मैदान में हो रहा है।

मायावती बढ़ती उम्र को लेकर यूपी चुनाव 2022 के दौरान भी अधिक सक्रिय नहीं दिख पाई थीं। पार्टी के प्रमुख नेता के चुनावी मैदान से नदारद रहने के कारण यूपी में बसपा का वोट शेयर गिरा है। बसपा के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद के जरिए पार्टी एक बार फिर अपने कोर वोट बैंक पर पकड़ बनाने की कोशिश में है। शनिवार को आकाश बिजनौर की नगीना सीट में जनसभा के जरिए आकाश आनंद लोकसभा चुनाव 2024 में पार्टी के अभियान का आगाज करेंगे। यह उनकी यूपी में पहली रैली होगी। इस कारण सबकी निगाह आकाश आनंद पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि आकाश इस बार ताबड़तोड़ रैलियां करेंगे।

लोकसभा चुनाव 2024 से आकाश आनंद यूपी में भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे, इस प्रकार की संभावना पार्टी के नेता भी जता रहे हैं। नगीना के बाद 7 अप्रैल को खुर्जा और बुलंदशहर में आकाश की दो रैलियां होंगी। 8 अप्रैल को बरेली, 11 अप्रैल को मथुरा और आगरा की सभाओं में आकाश आनंद दिखेंगे। इसके बाद आकाश आनंद 12 अप्रैल को दक्षिण भारत के दौरे पर रहेंगे। 13 अप्रैल को अलीगढ़ और हाथरस, 17 अप्रैल को सहारनपुर में सभा करेंगे। वह मई तक करीब 25 रैलियां करेंगे।

लोकसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग के करीब आठ दिन पहले बसपा प्रमुख मायावती भी चुनावी मैदान में उतरेंगी। मायावती का चुनावी प्रचार अभियान अमूमन इसी प्रकार से चलता है। वह आखिरी समय में चुनावी मैदान में उतर कर बाजी पलटने में माहिर रही हैं। हालांकि, पिछले कुछ समय में चुनावी राजनीति में हुए बदलावों ने उनकी रणनीति को कमजोर किया है। दावा किया जा रहा है कि मायावती 11 अप्रैल से अपनी सभाओं की शुरुआत करेंगी। इसके बाद वह यूपी और अन्य प्रदेशों में भी जनसभा करती दिखेंगी। उनके 22 अप्रैल को गौतमबुद्ध नगर के चुनावी मैदान में भी उतरने का कार्यक्रम है। हालांकि, पहले उनके नगीना सीट से ही चुनावी प्रचार में उतरने का दावा था, लेकिन पार्टी की ओर से अब केवल आकाश आनंद का कार्यक्रम होने की बात सामने आई है।

जब बाप और बेटे को पेड़ से बांधकर पिटवाया गया!

एक ऐसी घटना जिसमें  बाप और बेटे को पेड़ से बांधकर पिटवाया गया! 25 जनवरी साल 2005 को देश भर में गणतंत्र दिवस आयोजन की तैयारियां चल रही थीं। उसी दिन प्रयागराज के धूमनगंज थाना क्षेत्र के नेहरू पार्क मोड़ जीटीरोड पर सरेराह दिन दहाड़े विधायक राजू पाल की गाड़ी को घेरकर गोलियां बरसाई जाती हैं। हमले में बसपा विधायक राजू पाल समेत कुल 3 लोगों की मौत हो जाती है। इस हमले में रुखसाना बेगम को कंधे पर दो गोलियां लगीं। उनके अलावा ओमप्रकाश पाल और सैफ को भी गोली लगती है। रुखसाना बेगम काफी गम्भीर रूप से घायल थीं। लेकिन वह जिंदगी-मौत के बीच जंग जीत जाती हैं। इसके बाद वह अपने पति सादिक के जिगरी दोस्त और विधायक राजू पाल हत्याकांड की चश्मदीद गवाह बन जाती हैं। लेकिन इसकी उन्‍हें बड़ी कीमत चुकानी पड़ी जो आज भी जारी है। राजूपाल की पत्नी पूजा पाल के साथ करीब दर्जन भर लोगों ने अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के खिलाफ गवाही देने की हिम्मत दिखाई। यह हिमाकत बाहुबली माफिया अतीक अहमद को नागवार गुजरी। फिर शुरू होता है इन गवाहों को तोड़ने का अतीक अहमद और उनके गुर्गों का बेखौफ सिलसिला। वैसे तो राजूपाल हत्याकांड में अतीक, अशरफ और उनके गुर्गों के खिलाफ पुलिस और सीबीसीआईडी की जांच के दौरान एक दर्जन से ज्यादा गवाह शामिल थे, लेकिन सीबीआई कोर्ट में 15 गवाहों ने गवाही दी। इनमें चश्मदीद घायल गवाह रुखसाना बेगम की गवाही बेहद खास थी। 25 जनवरी 2005 को राजू पाल SRN के पोस्टमॉर्टम हाउस से लौट रहे थे। चौफटका पुल पर रुखसाना बेगम और उनके पति सादिक अपनी स्कूटर को पैदल ही ले जा रहे थे। उन्‍हें देख राजू पाल रुक गये। सादिक ने बताया कि शायद पेट्रोल खत्म होने से स्कूटर बन्द हो गया है। राजू पाल ने सादिक से कहा कि स्कूटर ठीक करवाकर आप नीवां आ जाएं, हम भाभी को घर ले जा रहे हैं। इतना कहकर राजू पाल ने रुखसाना को अपनी गाड़ी में आगे बैठाया और स्वयं ड्राइविंग सीट पर बैठ गए।

सादिक ने भी पेट्रोल भरवाया और पीछे-पीछे चल पड़ा। कुछ ही मिनट में राजू पाल की गाड़ी नेहरू पार्क मोड़ पर पहुंचकर जीटीरोड से अंदर मुड़ने वाली थी तभी हमलावरों ने सामने गाड़ी लगाकर रास्‍ता रोक लिया गया। सामने और अगल-बगल से अंधाधुंध फायरिंग शुरू हो गई।

चश्मदीद गवाह रुखसाना बेगम बताती हैं कि सबसे पहले सामने दो गोली उसके कंधे में घुस गईं। लेकिन राजूपाल को ड्राइविंग सीट पर देख सभी ने राजू पाल को निशाना बना गोलियां दागनी शुरू कर दीं। हमलावर इतने निडर थे कि पूरी गाड़ी को घेर कुछ देर तक फायरिंग करते रहे। इतना ही नहीं गम्भीर रूप से घायल राजू पाल को जब टेम्पो में डालकर लोग हॉस्पिटल ले जाने लगे तो पीछे से गाड़ी लगाकर फायरिंग की गई। वह कहती हैं, यहीं से मेरे पति सादिक और परिवार के अन्य सदस्यों पर अतीक अहमद की निगाहें टेड़ी हो गईं। महीने भर बाद जब मेरी स्थिति में सुधार हुआ तो गवाही न देने या गवाही बदलने का दबाव शुरू हुआ। मेरे पति सादिक ने निर्णय किया कि राजू पाल उनका जिगरी दोस्त था। उसके हत्यारों को सजा दिलाएंगे इसके लिए चाहे कुछ भी हो जाए। पति के इस निर्णय में मैं भी साथ थी। हमें भी मात्र 9 दिन की विवाहिता पूजा पाल के सिंदूर उजड़ने का बहुत दुख था। हमने हर हाल में हत्यारों को सजा दिलवाने की ठान ली।

हमने पुलिस और सीबीसीआईडी में बयान दिया। इसी बीच अतीक़ अहमद व उनके लोगो ने हमें और सादिक को तोड़ने के लिए पहले पैसे, जमीन, कारोबार का लालच दिया। लेकिन हम लोग उसके झांसे में नहीं आए तो उसने ऐसे जुल्मो-सितम ढाए जिनको बयान करने में अब भी रोएं कांप जाते हैं। मेरे पति, बेटे और परिवार के दूसरे सदस्यों पर फर्जी मुकदमे लगवाए। पुलिस से दबाव बनवाया। जेल भेजकर बहुत यातनाएं दिलवाईं। रिश्तेदारों तक को परेशान किया गया। जो भी हमसे जुड़ता उसको धमकी मिलती, परेशान किया जाता। वह कहती हैं कि यह सब हमने वर्षों झेला लेकिन कभी अंदर से नहीं टूटे। बस यही उम्मीद थी जब सही समय आयेगा, मौका मिलेगा तो हम राजू पाल के हत्यारों के खिलाफ गवाही देकर रहेंगे। सीबीआई जांच के दौरान योगी सरकार ने हमारी सुरक्षा सुनिश्चित की। आखिरकार 19 बरस बाद ही सही योगी सरकार में हमें न्याय मिला। विधायक राजूपाल के हत्यारों को सजा मिली।

तत्कालीन विधायक राजू पाल हत्याकांड की वादी पूजा पाल ने भी उस पल को याद करते हुए कहा, मेरी शादी को केवल 9 दिन बीते थे। ऐसे में मेरे पति की दिन-दहाड़े घेरकर हत्या कर दी गई। इतना ही नहीं मैं रोती-बिलखती रही पर पुलिस ने मुझे मेरे पति का अंतिम दर्शन भी नहीं करने दिया। पुलिस ने मुझे राजू पाल की डेडबॉडी भी नहीं थी। बाद में जब मैं आगे बढ़ी तो मुझे और मेरे गवाहों को तोड़ने के लिए पहले लालच दिया। नहीं मनाने पर हर तरीके की यातनाएं, जुल्मो-सितम किया गया। सुप्रीम कोर्ट से राजूपाल हत्याकांड की सीबीआई जांच के आदेश कराने के बाद कुछ राहत मिली। योगी सरकार ने गवाहों को सुरक्षा दी। अतीक़ अहमद के आतंक से राहत मिली। सीबीआई कोर्ट ने न्याय किया, हत्यारों को सजा मिली। इसके लिए सीबीआई ,कोर्ट और सहयोगियों,सभी गवाहों सहयोगी के साथ योगी सरकार को धन्यवाद देती हूं।

अब OTT पर वापस आ चुके हैं कॉमेडी किंग कपिल शर्मा!

वर्तमान में OTT पर कॉमेडी किंग कपिल शर्मा वापस आ चुके हैं! OTT कंटेंट, बोले तो खून खराबे, सेक्स, गालियों से भरा मस्त क्राइम थ्रिलर। कुछ साल पहले तक OTT पर डार्क विषय वाले ऐसे ही हिंसा, गाली-गलौज, सेक्स सीन से भरपूर क्राइम, ऐक्शन, थ्रिलर का बोलबाला था। दरअसल, मेकर्स की सोच ही यही थी कि OTT पर यंगस्टर्स वो कंटेंट देखते हैं, जो परिवार के साथ बड़े या छोटे पर्दे पर नहीं देख सकते, लिहाजा वो ‘सेक्रेड गेम्स’ और ‘मिर्जापुर’ के मोह में ही फंसे हुए थे, पर कोरोना काल में थिएटर्स बंद होने और टीवी शोज की शूटिंग पर ब्रेक लगने से लोगों के पास OTT ही विकल्प रह गया, तो यंगस्टर्स ही नहीं, पूरे परिवार ने OTT का रुख किया। वो स्मार्ट फोन से स्मार्ट टीवी पर पहुंच गया। दिक्कत बस ये थी कि लोग यहां देखें क्या? ऐसे शोज यहां ना के बराबर थे, जिसे पूरा परिवार साथ में एंजॉय कर सके, साथ में हंस सके, लेकिन जल्द ही OTT वालों ने जनता का यह बदलता रुख भांप लिया और यहां फैमिली के साथ देखे जाने वाले हल्के-फुल्के कॉमेडी शोज को भी जगह मिलने लगी। अब आलम यह है कि बीते साल जहां वीर दास ने अपनी कॉमिकल लैंडिंग कॉमेडी ऐक्ट से अंतरराष्ट्रीय एमी अवॉर्ड जीतकर कॉमेडी की दुनिया में भारत का नाम रोशन कर दिया तो टीवी के कॉमेडी किंग कपिल शर्मा भी इस नए साल में अपनी पलटन लेकर OTT पर आगमन कर रहे हैं। देखते ही देखते अब OTT पर कॉमेडी शोज का अच्छा-खासा लाइन अप मौजूद है। इनमें वेब सीरीज से लेकर स्टैंड अप कॉमेडी सब शामिल है। जैसे, आप नेटफ्लिक्स पर वीर दास की एमी अवॉर्ड विजेता ‘वीर दास लैंडिंग’ सहित ‘लेडीज अप’, ‘वीर दास फॉर इंडिया’ जैसे एक्ट के अलावा कॉमेडियन अमित टंडन का ‘फैमिली टंडनसीज’, कनन गिल का ‘योर सिंसिएरिली कनन गिल’, कपिल शर्मा का ‘आई एम नॉट डन येट’ जैसे कई स्टैंड अप एक्ट इंजॉय कर सकते हैं। वहीं, फिक्शन में साल 2023 में यह प्लैटफॉर्म ‘कटहल’ जैसी हल्की फुल्की ओरिजिनल फिल्म के अलावा ‘ड्रीम गर्ल 2’, ‘ओएमजी 2’, ‘सुखी’ जैसी थिएटर से OTT पहुंची कॉमेडी फिल्में भी लेकर आया। इसी तरह, अमेजन प्राइम विडियो पर मेकर्स जेडी मजीठिया और आतिश कपाड़िया राज बब्बर, रत्ना पाठक शाह, आयशा जुल्खा जैसे चर्चित नामों से सजी सीरीज ‘हैप्पी फैमिली कंडीशंस अप्लाई’ लेकर आए, तो चर्चित कॉमेडी सीरीज ‘परमानेंट रूममेट्स’ का तीसरा सीजन और ‘हॉस्टल डेज 4’ भी आया।

वहीं, अवॉर्ड विनिंग कॉमेडी सीरीज ‘पंचायत’ के दो सीजन पहले से ही यहां हंसाने-गुदगुदाने का सदाबहार डोज बने हुए हैं। नए साल 2024 में इसका तीसरा सीजन भी आएगा। जबकि, स्टैंड अप कॉमेडी में इस प्लैटफॉर्म पर जाकिर खान के हिट एक्ट ‘हक से सिंगल’, ‘तथास्तु’, ‘कक्षा ग्यारहवीं’, रोहन जोशी का ‘वेक एंड बेक’, विश्वा कल्याण रथ का ‘मूड खराब’ जैसी लंबी चौड़ी फेहरिस्त है, जिसमें 2023 में जाकिर का ‘मन पसंद’, अनुभव सिंह बस्सी का ‘बस कर बस्सी’, ‘जैनब जॉनसन : हिजाब ऑफ’ जैसे एक्ट जुड़े। ‘कॉमिकस्तान’ और ‘चाचा विधायक हमारे’ के दो सीजन भी यहां हैं। डिज्नी प्लस हॉटस्टार बीते साल कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘तुमसे ना हो पाएगा’ के अलावा फरहाद सामजी के निर्देशन में कुणाल खेमू, नुपुर सेनन, सौरभ शुक्ला, चंकी पांडे, राजपाल यादव, जैमी लीवर, सतीश कौशिक, जॉनी लीवर जैसे कॉमेडी के धुरंधरों से सजी कॉमेडी सीरीज ‘पॉप कौन’ लेकर आया। अमेजन मीनी टीवी मुफ्त में ‘द एडवेंचर ऑफ लियो’, ‘हाफ लव हाफ अरेंज्ड’, ‘ये मेरी फैमिली’, ‘कॉन्सटेबल गिरपड़े’ जैसे हंसने-गुदगुदाने वाले शोज से फैमिली ऑडियंस को लुभाने में लगा है, तो सोनी लिव पर ‘गुल्लक’ की गुदगुदी सदाबहार है। जियो सिनेमा भी बीते साल हल्की फुल्की फैमिली फिल्म ‘ट्रायल पीरियड’ लेकर आया। वहीं, जी फाइव ने 2024 में ‘ह्यूमरसली योर्स 3’ और ‘आम आदमी फैमिली 4’ से अपने कॉमेडी स्लेट मजबूत की।

कॉमेडी की दुनिया में नए साल में एक बड़ा उलटफेर यह देखने को मिलेगा कि अब तक छोटे पर्दे पर हंसाते रहे कपिल शर्मा, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा, राजीव जैसे कमीडियंस की टोली अब OTT पर नजर आएगी। दरअसल, 2024 में कपिल का द कपिल शर्मा शो नेटफ्लिक्स का नया आकर्षण होगा। सबसे खास बात यह है कि इसके लिए कपिल शर्मा ने अपने ‘मशहूर’ साथी सुनील ग्रोवर के साथ पुरानी सारी ‘गुत्थी’ सुलझा ली है। अब सुनील भी कपिल के शो में रंग भरते दिखेंगे। इनकी टीम को अपनी हंसी से गुलजार करने वाली अर्चना पूरन सिंह भी इस टोली के साथ होंगी। अब ऐसे में, टीवी पर लंबे समय तक कपिल के शो के प्रशंसक रहे दर्शकों को अब OTT का रुख करना होगा।

OTT जहां फैमिली ऑडियंस को लुभाने के लिए कॉमेडी और हल्के-फुल्के शोज की सूची बढ़ा रहा है, तो पारिवारिक दर्शकों के पसंदीदा टीवी पर कॉमेडी शोज कम हो चले हैं। ऐंड टीवी पर कई साल से चल रहे ‘भाबीजी! घर पर हैं’ और उसके स्पिन ऑफ ‘हप्पू की उलटन पलटन’, सोनी सब पर ‘तारक मेहता का उल्टा चश्मा’ और स्टार भारत पर फिर से शुरू हुए ‘मे आई कम इन मैडम’ के अलावा टीवी पर कॉमेडी का सूखा ही नजर आ रहा है। जबकि एक वक्त था, जब हर चैनल वीकेंड पर कॉमेडी शो को तरजीह देता था। जैसे, सोनी टीवी पर कॉमेडी सर्कस तो स्टार भारत के ‘द ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज’ ने कई कमीडियंस को मंच दिया है। कलर्स के बाद कपिल शर्मा अपना शो लेकर सोनी पर गए तो कलर्स ने कृष्णा अभिषेक, भारती सिंह को लेकर ‘कॉमेडी नाइट्स बचाओ’, ‘कॉमेडी नाइट्स लाइव’ शुरू किया था, लेकिन अभी टीवी पर कॉमेडी शो ना के बराबर रह गए हैं। इस बात पर सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन के बिजनेस हेड नीरज व्यास भी सहमति जताते हैं। बकौल नीरज व्यास, ‘मैं मानता हूं कि टीवी पर कॉमेडी अभी कम है, लेकिन नए साल में हम नया कॉमेडी शो ला रहे हैं। ये एक नया आइडिया है, नया टैलंट है। मेरा मानना है कि कॉमेडी में नया टैलंट लाना बहुत जरूरी है और हमारे देश में नए टैलंट हैं। उनको लेकर आना हमारा काम है और वो हम कर रहे हैं।’

क्या सुपरहिट होने वाली है मूवी अमर सिंह चमकीला?

मूवी अमर सिंह चमकीला अब सुपरहिट होने वाली है! पंजाब में देसी गायकों को काफी पसंद किया जाता है। बॉलीवुड के मशहूर फिल्‍ममेकर इम्‍त‍ियाज अली इस बार ऐसे ही एक देसी और विवादित सिंगर अमर सिंह चमकीला की कहानी लेकर आए हैं। अमर सिंह चमकीला ने अस्सी के दशक में अपने गानों से न सिर्फ पंजाब, बल्कि विदेश में भी नाम कमाया था। लेकिन अफसोस कि उसकी शोहरत ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रह सकी और कुछ लोगों ने उसे हमेशा हमेशा के लिए सुला दिया। फिल्म की कहानी के मुताबिक, अनुसूचित जाति से आने वाले धनी राम उर्फ अमर सिंह दिलजीत दोसांझ को बचपन से ही गाने का शौक था। अपने इस शौक की खातिर वह स्‍थानीय गायकों की जी हुजूरी किया करते थे। एक दिन अचानक ऐसे ही उन्‍हें अपने उस्ताद के एक शो में लेट पहुंचने की वजह से स्टेज पर आने का मौका मिलता है। साथ ही स्टेज नेम ‘चमकीला’ भी मिलता है। उसके बाद चमकीला पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह न सिर्फ अपने अश्लील बोल वाले गानों की बदौलत पंजाब के घर-घर तक पहुंच जाता है, बल्कि उसकी एलबम भी ब्लैक में बिकने लगती हैं।गायिकी के इसी सफर में अमर सिंह को अपनी स्टेज पार्टनर अमरजीत कौर परिणीति चोपड़ा मिलती है। स्टेज शोज में दोनों की जोड़ी इतनी जमती है कि चमकीला उससे शादी कर लेता है। हालांकि साल 1984 के दौरान जब ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद पंजाब में माहौल बिगड़ने लगता है, तो चमकीला को भी धार्मिक समूहों की ओर से अश्लील गाने बंद करने के लिए धमकियां मिलने लगती हैं। घबराया चमकीला न सिर्फ माफी मांगता है, बल्कि धार्मिक भजन भी गाने शुरू कर देता है। बाकी कलाकार भी अपने रोल में जमे हैं। ‘अमर सिंह चमकीला’ एक बेहद शानदार फिल्‍म है। यदि आप इस वीकेंड घर बैठे हैं और एक अच्छा सिनेमा देखना चाहते हैं, तो इस फिल्म को OTT प्‍लेटफॉर्म नेटफ्ल‍िक्‍स पर देखना कतई मिस ना करें।लेकिन लोग उससे दोबारा अश्लील गाने सुनने की मांग करते हैं।

इम्‍त‍ियाज की फिल्‍म सिर्फ इतनी नहीं है। यह बायोपिक इसके आगे की कहानी भी कहती है। लेकिन उसके लिए आपको फिल्म देखनी होगी। ‘जब वी मेट’, ‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’ और ‘हाइवे’ जैसी शानदार फिल्मों के डायरेक्टर इम्तियाज अली की पिछली कुछ फिल्‍में बॉक्‍स ऑफिस पर कमाल नहीं दिखा पाईं। उनकी ‘जब हैरी मेट सेजल’ और ‘लव आज कल 2’ जैसी फिल्में नहीं चल पाईं। लेकिन अबकी बार उन्होंने अपनी OTT रिलीज ‘अमर सिंह चमकीला’ से जोरदार वापसी की है। यह फिल्म एक खूबसूरत सफर की तरह है, जो आपको शुरुआत से ही बांध लेती है और आखिर तक साथ नहीं छोड़ती है।

बायोपिक होने के बावजूद यह फिल्म आपको संगीतमय अंदाज में कहानी सुनाती है। पंजाबी गानों के सब टाइटल स्क्रीन पर आने से आपको उन्हें समझने में आसानी होती है। उसके बाद चमकीला पीछे मुड़कर नहीं देखता। वह न सिर्फ अपने अश्लील बोल वाले गानों की बदौलत पंजाब के घर-घर तक पहुंच जाता है, बल्कि उसकी एलबम भी ब्लैक में बिकने लगती हैं।गायिकी के इसी सफर में अमर सिंह को अपनी स्टेज पार्टनर अमरजीत कौर परिणीति चोपड़ा मिलती है। स्टेज शोज में दोनों की जोड़ी इतनी जमती है कि चमकीला उससे शादी कर लेता है।चमकीला को भी धार्मिक समूहों की ओर से अश्लील गाने बंद करने के लिए धमकियां मिलने लगती हैं। घबराया चमकीला न सिर्फ माफी मांगता है, बल्कि धार्मिक भजन भी गाने शुरू कर देता है। लेकिन लोग उससे दोबारा अश्लील गाने सुनने की मांग करते हैं।वहीं एआर रहमान का संगीत भी बेहतरीन बन पड़ा है। फिल्म के गाने रिलीज से पहले ही चर्चा में हैं। फिल्म की सिनेमेटोग्राफी व इसके सेट भी कमाल के हैं। यह आपको सत्तर-अस्सी के दशक के पंजाब की याद दिलाता है।

इम्तियाज ने फिल्म में अमर सिंह चमकीला के पुराने फोटोज का भी खूबसूरती के साथ इस्तेमाल किया है। बात अगर कलाकारों की एक्टिंग की करें, तो दिलजीत दोसांझ ‘चमकीला‘ के लीड रोल में छा गए हैं। खास बात यह है कि दिलजीत खुद भी एक बहुत अच्छे गायक हैं। ऐसे में, वह एक पुराने दौर के पंजाबी गायक की बायोपिक में पर्दे पर शानदार लगते हैं। जबकि परिणीति चोपड़ा ने भी उनका पूरा साथ दिया है। परिणीति काफी अरसे बाद पर्दे पर फुल फॉर्म में नजर आती हैं। बाकी कलाकार भी अपने रोल में जमे हैं। ‘अमर सिंह चमकीला’ एक बेहद शानदार फिल्‍म है। यदि आप इस वीकेंड घर बैठे हैं और एक अच्छा सिनेमा देखना चाहते हैं, तो इस फिल्म को OTT प्‍लेटफॉर्म नेटफ्ल‍िक्‍स पर देखना कतई मिस ना करें।

आखिर कैसे बाहर आयी श्राबनी बासकी की सोहराय दीवार कला?

आज हम आपको बताएंगे कि श्राबनी बासकी की सोहराय दीवार कला बाहर कैसे आई! भारत गांवों का देश है। भारत की आत्मा गांवों में बसती है। यहां हर गांव में कम से कम एक अनूठी कला का निवास है। लेकिन वह गांव से निकल नहीं पाती। उस कला के जानकार को कोई सहारा नहीं मिलता है। धीरे-धीरे यह कला विलुप्त हो जाती है, क्योंकि उस परिवार की नई पीढ़ी इसे अपनाने को तैयार ही नहीं होता है। लेकिन, कभी-कभी ऐसे गुमनाम कलाकार भी मुख्य धारा से जुड़ने में कामयाब हो जाते हैं, किसी की मदद की बदौलत। कुछ ऐसा ही किस्सा है पश्चिम बंगाल में पुरुलिया के जंगलों में रहने वाली संथाल परिवार की श्राबनी बासकी का। वह हुंडई मोटर इंडिया फाउंडेशन के आर्ट फॉर होप कार्यक्रम की बदौलत अपनी गृहस्थी की गाड़ी बड़े आराम से खींच रही हैं। यही नहीं, इनके जैसे कई कलाकारों को भी इस कार्यक्रम के बदौलत नई पहचान मिली है। आप यदि झारखंड और उससे लगते पश्चिम बंगाल और ओडिशा के आदिवासी गांवों में जाएं तो उनके मकानों पर आपको एक अलग तरह की चित्रकारी दिखेगी। इसे आदिवासी मिट्टी और गोबर को घोल कर बनाते हैं। उसमें पत्तों और प्राकृतिक रंगों का मिश्रण कर विविध रंग दिया जाता है। जैसे हम आप दिवाली त्योहार से पहले अपने घर-आंगन में रंग-रोगन करते हैं, उसी तरह आदिवासी सोहराय पर्व से पहले अपने घर के दीवारों को मिट्टी और गोबर से लीप कर चित्रकारी करते हैं। इससे आदिवासियों के मकान खिल उठते हैं।

पश्चिम बंगाल में पुरुलिया जिले के एक आदिवासी गांव में रहने वाली श्राबनी बासकी इसकी कला में पारंगत हैं। लेकिन, उनकी पूछ सोहराय पर्व के आसपास या फिर शादी-ब्याह के अवसर पर ही होती थी। उन्होंने साल 2018 में हरिकथा ट्रेडिशन की शुरुआत की। इससे उनहोंने गंजाम जिले के बुनकरों को जोड़ा। उन्हें कार्यशालाओं के जरिये प्रशिक्षण दिया गया। आज वह गंजाम के कल्चरल हेरिटेज को न सिर्फ संजो रहे हैं बल्कि इसे अगली पीढ़ी तक बढ़ा भी रहे हैं।इस कला से उनकी मौसमी आमदनी तो हो जाती थी, लेकिन नियमित आमदनी का स्रोत यह नहीं बन पाया। लेकिन उसे हुंडई मोटर इंडिया फाउंडेशन के आर्ट फॉर होप कार्यक्रम का सहयोग मिला। उनके साथ ही बदानी मुर्मू और रत्नाबोली बोस भी जुड़ीं। उन्होंने दरिचा फाउंडेशन बनाया। अब वह दीवारों पर भित्ती चित्र तो उकेरती ही हैं, इस कला के पोस्टर्स भी तैयार करती हैं।

हुंडई फाउंडेशन के आर्ट फॉर होप कार्यक्रम में इस बार ओडिशा के गंजाम जिले में रहने वाले लीसा मोहंती का भी चयन हुआ है। वह बचपन में एक चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में सिनेमा में भी काम कर चुके हैं। साल 2008 मंे उन्होंने निर्गुण सेंटर फॉर एक्सीलेंस बनाया। वह नृत्य और संगीत के जरिये भारतीय संस्कृति को बढ़ावा देने का काम करते हैं। लेकिन इससे उनकी गृहस्थी आसानी से नहीं चल पा रही थी। उन्होंने साल 2018 में हरिकथा ट्रेडिशन की शुरुआत की। इससे उनहोंने गंजाम जिले के बुनकरों को जोड़ा। उन्हें कार्यशालाओं के जरिये प्रशिक्षण दिया गया। आज वह गंजाम के कल्चरल हेरिटेज को न सिर्फ संजो रहे हैं बल्कि इसे अगली पीढ़ी तक बढ़ा भी रहे हैं।

गांव-कस्बों की ढेर सारी ऐसी कला है, जिसे नई पीढ़ी नहीं सीखना चाहती। नई पीढ़ी को ऐसी पारंपरिक कला में इसलिए रुचि नहीं है क्योंकि इससे उनकी आमदनी इतनी नहीं होती कि उनकी गृहस्थी चल सके। इसलिए वे कुछ दूसरा काम करने लगते हैं। कलाकारों को भी इस कार्यक्रम के बदौलत नई पहचान मिली है। आप यदि झारखंड और उससे लगते पश्चिम बंगाल और ओडिशा के आदिवासी गांवों में जाएं तो उनके मकानों पर आपको एक अलग तरह की चित्रकारी दिखेगी। इसे आदिवासी मिट्टी और गोबर को घोल कर बनाते हैं। उसमें पत्तों और प्राकृतिक रंगों का मिश्रण कर विविध रंग दिया जाता है। जैसे हम आप दिवाली त्योहार से पहले अपने घर-आंगन में रंग-रोगन करते हैं, उसी तरह आदिवासी सोहराय पर्व से पहले अपने घर के दीवारों को मिट्टी और गोबर से लीप कर चित्रकारी करते हैं।ऐसे ही कला और कलाकारों को संरक्षण देने के लिए हुंडई मोटर इंडिया फाउंडेशन ने आर्ट फॉर होप कार्यक्रम की शुरुआत की है। इस कार्यक्रम के जरिये चयनित कलाकारों को एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है। उन्हें मुख्य धारा से जुड़ने में मदद की जाती है। उन्हें देश में ही नहीं बल्कि विदेशी प्लेटफार्म से भी कनेक्ट करने में मदद की जाती है। और भी जो सहायता की जरूरत पड़ती है, उपलब्ध करायी जाती है।

क्या देशभर में बढ़ने वाला है बिजली का बिल?

आने वाले समय में देश भर में बिजली का बिल बढ़ने वाला है! इंडिया एनर्जी एक्सचेंज में कल भी स्पॉट बिजली की कीमत में 11 फीसदी मतलब कि 40 पैसे प्रति यूनिट की बढ़ोतरी हुई है। गर्मी इसी तरह से बढ़ती रही तो वह दिन दूर नहीं, जबकि भारत में बिजली की पीक डिमांड रिकार्ड स्तर तक चली जाए। पिछले साल गर्मियों में भारत में बिजली की पीक डिमांड 243 गीगावाट रही थी। हालांकि इस बढ़ी कीमत का असर आपके बिजली बिल पर नहीं दिखेगा, क्योंकि इसे आपकी बिजली वितरण कंपनी झेलती है। हम राजस्थान नहीं बल्कि दिल्ली एनसीआर की बात कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से यहां गर्मी का सितम ऐसा बढ़ा है कि लोगों को दिन में भी एसी चलाना पड़ रहा है। ऐसे में बिजली की खपत बढ़ रही है। बिजल की खपत बढ़ रही है तो बिजली तो जाहिर है कि इसका प्रोडक्शन बढ़ाना होगा। यदि बिजली का प्रोडक्शन नहीं बढ़ेगा तो पावर कट करना होगा। ऐसे में लोग बिजली वितरण विभाग के हेल्पलाइन नंबर पर फोन करने लगते हैं।

डिमांड जब बढ़ती है तो डिस्कॉम को स्पॉट मार्केट से बिजली खरीदनी होती है। स्पॉट मार्केट मतलब पावर एक्सचेंज, जहां बिजली की खरीद-बिक्री होती है। जिन पावर प्रोड्यूसर्स के पास पीपीए से ज्यादा बिजली बनती है, वे इसे पावर एक्सचेंज में बेच देते हैं। पावर एक्सचेंज में वैसे डिस्कॉम बिजली खरीदते हैं, जिनके पास बिजली खरीद की पर्याप्त व्यवस्था पहले से नहीं है। यहां दिक्कत यह होती है कि जैसे ही स्पॉट मार्केट में डिमांड बढ़ती है तो बिजली की कीमत बढ़ जाती है। अब इंडिया एनर्जी एक्सचेंज में कल का ही रेट देख लीजिए। कल वहां बिजली का औसत रेट 4.04 रुपये प्रति यूनिट था, जो कि एक दिन पहले के मुकाबले 40 पैसे या 11 फीसदी ज्यादा है। जैसे-जैसे डिमांड बढ़ेगी, यह रेट और चढ़ सकता है। जब बिजली की डिमांड बढ़ती है तो बिजली वितरण कंपनियों या डिस्कॉम के लिए गाढ़ा वक्त आ जाता है। हमारे-आपके घरों तक बिजली पहुंचाने वाली कंपनियों को ही डिस्कॉम कहते हैं। जब बिजली की डिमांड बढ़ती हैं तो इनके पसीने छूटने लगते हैं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये कंपनियां सामान्य दिनों की डिमांड तो पूरी करने के लिए बिजली बनाने वाली कंपनियों से लॉन्ग टर्म पावर पर्चेज एग्रीमेंट कर लेती है। लेकिन बढ़ी डिमांड को पूरा करने के लिए उन्हें स्पॉट एक्सचेंज से बिजली खरीदनी होती है। यह बिजली आमतौर पर महंगी पड़ती है। इसलिए उनका मार्जिन प्रभावित होता है।

इसे लोगों की बढ़ती आमदनी का असर ही कहा जाए कि वे अब बिजल से चलने वाले उपकरणों का ज्यादा इस्तेमाल करने लगे हैं। वहीं तेज गर्मी में खेतों में पटवन के लिए भी बिजली की ज्यादा खपत हो रही है। तभी तो पिछले साल बिजली की डिमाड 7 फीसदी बढ़ी थी। भारत में इससे पहले बिजली की डिमांड औसतन 6 फीसदी की दर से बढ़ती रही है। इस साल तो कुछ ज्यादा ही डिमांड बढ़ने के आसार हैं। बीते फरवरी में ही खबर आई थी कि मार्च 2032 तक बिजली की पीक डिमांड 384 गीगावाट तक तक चली जाएगी। यह पिछले साल मई में आए अनुमान से पांच फीसदी ज्यादा है। साल 2023 में बिजली की पीक डिमांड 243 गीगावाट थी।

स्पॉट बाजार में बिजली की कीमत बढ़ने का असर आपके बिजली बिल पर नहीं दिखेगा। दरअसल, आपकी डिस्कॉम की जिम्मेदारी होती है कि वह पहले से तय कीमत पर आपको साल में 365 दिन 24 घंटे बिजली की निर्बाध आपूर्ति करे। इसके लिए वह बिजली बनाने वाली कंपनियों से पीपीए करती है। जब इससे डिमांड पूरा नहीं होता तो पावर एक्सचेंज से बिजली खरीदती हैं। यदि वहां से बिजली खरीदना बूते के बाहर हो जाता है तो आपके यहां पावर कट हो जाता है। तभी तो नोएडा-गाजियाबाद जैसे नो पावर कट जोन में भी गर्मी के दिनों में घंटों पावर कट होता है।

इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस साल अप्रैल, मई और जून में जैसे-जैसे तापमान में बढ़ोतरी होगी, वैसे-वैसे देश में बिजली की मांग भी बढ़ेगी। इसलिए डिस्कॉम को अपनी बिजली खरीद रणनीतियों को लागत प्रभावी ढंग (कॉस्ट इफेक्टिव) से प्रबंधित करने जैसे महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। हाल के आंकड़ों से पता चलता है कि डे अहेड मार्केट (डीएएम) सेगमेंट में कीमतों में कोई बदलाव नहीं आया है और यह स्थिर है। हालांकि टर्म-अहेड मार्केट (टीएएम) एक अलग तस्वीर पेश करता है, जो उच्च दरों और डिस्कॉम के लिए बढ़े हुए वित्तीय बोझ को दर्शाता है। यह DISCOMs के लिए डीएएम की स्थिरता का लाभ उठाने और अपने बिजली खरीद लागत को काफी हद तक कम करने के लिए एक अवसर उपलब्ध करता है।